Amalaki Ekadashi Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, एक साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. फाल्गुन मास में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है. वर्ष 2026 में यह व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ आंवले के पेड़ की भी पूजा की जाती है. माना जाता है कि और आंवले के वृक्ष का पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता और पौराणिक कथा-
आंवले के पेड़ की उत्पत्ति की कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के पेड़ की उत्पत्ति सृष्टि के आरंभ से जुड़ी है. कहा जाता है कि जब चारों ओर जल ही जल था और नई सृष्टि की रचना होनी थी, तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की तपस्या की. उनकी कठोर साधना से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर प्रकट हुए. भगवान के दर्शन पाकर ब्रह्मा जी अत्यंत भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले. मान्यता है कि उन्हीं आंसुओं से आंवले के वृक्ष का जन्म हुआ.
इसी कारण आंवले के पेड़ को धरती का पहला वृक्ष माना जाता है और इसे 'आदि वृक्ष' भी कहा जाता है.
एक दूसरी कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जो अमृत निकला था, उसकी कुछ बूंदें धरती पर गिरी थीं. जहां-जहां अमृत की बूंदें गिरीं, वहां आंवले के पेड़ उग आए. इसके औषधीय गुणों के कारण भी इसे अमृत फल कहा जाता है.
आमलकी एकादशी पर क्यों होती है पूजा?मान्यता है कि आमलकी एकादशी के दिन ही आंवले के पेड़ का प्राकट्य हुआ था. इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है. इसलिए भक्त इस दिन पेड़ की पूजा करते हैं और आंवले का फल भगवान को अर्पित करते हैं.
कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को वरदान दिया था कि आंवला उन्हें अत्यंत प्रिय होगा. जो व्यक्ति श्रद्धा से आंवले के पेड़ की पूजा करेगा और उसका फल अर्पित करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे और जीवन की परेशानियां दूर होंगी.
इस तरह आमलकी एकादशी का व्रत आस्था, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है. इस दिन व्रत रखकर और आंवले के पेड़ की पूजा कर भक्त भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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