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Adhik Maas Kalashtami 2026: अधिकमास कालाष्टमी आज, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान काल भैरव की पूजा, जानें पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव भगवान शिव के रौद्र स्वरूप माने जाते हैं. उनकी पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किया गया कालाष्टमी व्रत जीवन की अनेक परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है.

Adhik Maas Kalashtami 2026: अधिकमास कालाष्टमी आज, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान काल भैरव की पूजा, जानें पूजा विधि
कैसे करें कालाष्टमी की पूजा?
(P.C- NDTV)

हिंदू धर्म में कालाष्टमी का व्रत भगवान काल भैरव की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. आज ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है. अधिकमास में पड़ने पर इसे अधिकमास कालाष्टमी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं और काल भैरव की पूजा करते हैं, उनके जीवन से दुख, भय और बाधाएं दूर होती हैं. आइए जानते हैं आज अधिकमास कालाष्टमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, साथ ही जानेंगे भगवान काल भैरव की पूजा विधि- 

आज के शुभ मुहूर्त

कालाष्टमी के दिन पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए कई विशेष मुहूर्त बन रहे हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक रहेगा. प्रातः संध्या का समय सुबह 4:22 बजे से 5:23 बजे तक है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2:39 बजे से 3:35 बजे तक रहेगा. शाम 7:16 बजे से 7:37 बजे तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा.

पूजा का शुभ मुहूर्त

भगवान काल भैरव की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है. आज यानी 8 जून को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और शाम को 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस बीच आप पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

कैसे करें कालाष्टमी की पूजा?
  • कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें. 
  • दिनभर भगवान का ध्यान करें और सात्विक जीवनशैली अपनाएं. 
  • शाम के समय प्रदोष काल में भगवान काल भैरव की पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है.
  • पूजा के दौरान भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • उन्हें पुष्प अर्पित करें और तिलक लगाएं. 
  • सरसों का तेल, काले तिल, नारियल, लड्डू तथा मीठा पान चढ़ाएं. 
  • इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएं और भैरव चालीसा का पाठ करें. 
  • पूजा के दौरान भगवान का स्मरण और मंत्र जाप करना बेहद शुभ माना जाता है.
  • अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें.
काल भैरव मंत्र

ॐ कालकालाय विद्हे, तन्नो काल भैरवः प्रचोदयात्॥
ॐ हीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
ॐ हीं हीं हीं हीं हीं क्षेम् क्षेत्रपालाय कालभैरवाय नमः॥

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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