- सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर शून्य कर दी है
- पेट्रोल-डीजल की कीमत में कच्चे तेल की बढ़ी कीमत, राज्य सरकार का वैट और कंपनियों के खर्च शामिल होते हैं.
- तेल कंपनियों ने एक्साइज ड्यूटी में राहत का एक हिस्सा अपने बढ़े हुए घाटे को पूरा करने में लगाया है.
सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती कर दी. पेट्रोल पर 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से सीधे शून्य. सुनने में लगता है कि अब तेल सस्ता हो जाना चाहिए, लेकिन हकीकत इससे अलग है. आम आदमी के मन में यही सवाल है कि जब टैक्स घटा तो कीमत क्यों नहीं घटी? इसका जवाब एक लीटर पेट्रोल के पूरे गणित में छिपा है, जिसमें सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार और तेल कंपनियां भी शामिल होती हैं.
पहले समझिए पूरा खेल क्या है
पेट्रोल-डीजल की कीमत सिर्फ एक टैक्स से तय नहीं होती. इसमें कई परतें होती हैं:
- कच्चे तेल की कीमत (क्रूड ऑयल)
- रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्ट खर्च
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकार का वैट (VAT)
- पेट्रोल पंप डीलर का कमीशन
यानी एक्साइज ड्यूटी घटने का मतलब यह नहीं कि पूरा फायदा सीधे ग्राहक तक पहुंच जाएगा.

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क्यों नहीं घटे दाम?
1. कच्चा तेल महंगा हो गया
ईरान-इजरायल-अमेरिका टकराव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं. सरकार ने ड्यूटी घटाकर इस बढ़ोतरी का असर कम करने की कोशिश की है, पूरी तरह खत्म करने की नहीं.
2. कंपनियों ने घाटा एडजस्ट किया
तेल कंपनियां (OMCs) पहले से बढ़ी लागत झेल रही थीं. ड्यूटी में मिली राहत का एक हिस्सा कंपनियों ने अपने नुकसान को संतुलित करने में लगा दिया.
3. राज्य सरकार का टैक्स जस का तस
केंद्र ने एक्साइज घटाई, लेकिन राज्य का VAT नहीं घटा. कई राज्यों में VAT प्रतिशत में होता है, इसलिए बेस प्राइस बढ़ते ही टैक्स भी बढ़ जाता है.
4. रुपये की कमजोरी भी वजह
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से कच्चा तेल खरीदना और महंगा पड़ता है. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ता है.
असल बात क्या है?
सरकार ने जो ड्यूटी घटाई, वो कीमत बढ़ने से रोकने के लिए थी, घटाने के लिए नहीं. अगर ड्यूटी नहीं घटती, तो पेट्रोल 100 रुपये के पार जा सकता था. यानी आपको जो राहत दिख नहीं रही, वो असल में 'बढ़ोतरी से बचाव' है.
आसान भाषा में समझें
पहले पेट्रोल 95 रुपये था. क्रूड महंगा हुआ, तो कीमत 105 तक जा सकती थी. इससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ता. इससे बचने के लिए सरकार ने टैक्स घटाया, तो कीमत फिर से 95 के आसपास रोक दी गई. सरकार का कदम राहत जरूर है, लेकिन जेब पर सीधा फायदा दिखना मुश्किल है.
एक लीटर पेट्रोल का पूरा हिसाब (उदाहरण: दिल्ली)
मान लीजिए दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब ₹95 प्रति लीटर है, तो उसका ब्रेकअप कुछ ऐसा होता है:
| घटक | पहले (ड्यूटी ₹13) | अब (ड्यूटी ₹3) |
| कच्चा तेल + रिफाइनिंग | ₹42 | ₹52 ⬆️ |
| ट्रांसपोर्ट/मार्केटिंग | ₹3 | ₹3 |
| केंद्र एक्साइज ड्यूटी | ₹13 | ₹3 ⬇️ |
| राज्य VAT | ₹32 | ₹32 |
| डीलर कमीशन | ₹5 | ₹5 |
| कुल कीमत | ₹95 | ₹95 |
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