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This Article is From Apr 22, 2019

अगर प्रज्ञा ठाकुर के पास श्राप देने की शक्ति तो आतंकी मसूद और हाफिज सईद को क्यों नहीं दिया?: यूपी के पूर्व DGP

आठ पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने भोपाल से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर की इस टिप्पणी की रविवार को कड़ी निंदा की कि उनके शाप से ही महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे की मौत हुई. 

अगर प्रज्ञा ठाकुर के पास श्राप देने की शक्ति तो आतंकी मसूद और हाफिज सईद को क्यों नहीं दिया?: यूपी के पूर्व DGP
प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

जब से मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बीजेपी ने मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है, तब से वह अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं. मुंबई आतंकी हमले के शहीद हेमंत करकरे की शहादत पर अपमानजनक टिप्पणी को लेकर प्रज्ञा सिंह चौतरफा घिरी हुई हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा है कि साध्वी प्रज्ञा ने शहीद हेमंत करकरे की शहादत का मजाक उड़ाया है. इतना ही नहीं, आठ पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने भोपाल से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर की इस टिप्पणी की रविवार को कड़ी निंदा की कि उनके शाप से ही महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे की मौत हुई. 

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एनडीटीवी से बातचीत में यूपी के पूर्व पुलिस चीफ प्रकाश सिंह ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा ने शहीद हेमंत करकरे की शहादत का मजाक उड़ाया है. अगर साध्वी प्रज्ञा में शक्ती है श्राप (शाप) देने की तो उन्होंने मसूद अजहर और हाफिज सईद को क्यों नहीं दिया?. आगे प्रकाश सिंह ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा ने शहीद हेमंत करकरे की शहादत का मजाक उड़ाया है. उन्होंने आगे कहा कि अगर एक डॉक्टर किसी वीआईपी का कान देख लेता है तो उसे पद्मश्री दिया जाता है, यहां हमारे आदमी जान जोखिम में डाल कर मारते हैं, उनको कोई पूछने वाला नहीं है. आप हमारी शहादत का मजाक उड़ाए... हमारी कुर्बानी को ट्विस्ट देकर कहें कि मेरे श्राप से मर गया तो फिर जले पर नमक छिड़कने वाली बात हो गई. साध्वी ने एक कंडिशनल बयान देकर सफाई दी जिसका कोई मतलब नहीं.

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आठ पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने मांग की कि जिन लोगों ने देश की खातिर अपनी जान कुर्बान की, उनका सम्मान किया जाना चाहिए.    एक बयान में इन पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने कहा कि देश को करकरे के प्रति आभारी होना चाहिए जिन्होंने महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते की अगुवाई की और जो 26/11 के मुम्बई हमले में शहीद हो गये थे. बयान में कहा गया है, ‘प्रज्ञा ठाकुर के निंदनीय और अफसोसजनक बयान से बस इस बात की जरूरत प्रमुखता से उठती है कि देश की आजादी के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों से जिन 35000 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, उनके बलिदान का सार्वजनिक रूप से कद्र किया जाए.'    

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जिन अधिकारियों ने बयान पर हस्ताक्षर किये हैं वे पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक जूलियो रिबेरियो, उत्तर प्रदेश और असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक और बीएसफ के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह, केरल के पूर्व पुलिस महानिदेशक पी के एच ठाकरान और जैकब पुन्नूसे, राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (हैदराबाद) के पूर्व महानिदेशक कमल कुमार, महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक संजीव दयाल, असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक और एनएसजी के पूर्व डीजी जयंतो चौधरी और मेघालय के पूर्व एन रामचंद्रन हैं. 

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