आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रविवार को केजेपी के आंदोलन को समर्थन देने जंतर-मंतर पहुंचे. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत होती है. सिसोदिया ने सभी राजनीतिक दलों से नीट प्रश्न पत्र लीक होने के मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में जारी प्रदर्शन में शामिल होने की भी अपील की.
मनीष सिसोदिया ने कहा, "मुझे आश्चर्य हुआ कि सरकार 20 दिनों तक सोनम वांगचुक को नजरअंदाज करती रही और जब 20वें दिन उनको लगा कि इस आंदोलन को लेकर समर्थन बढ़ता जा रहा है तो, सफेद चादर वाला जादू दिखाकर सोनम वांगचुक को यहां से गायब कर दिया. अस्पताल के लिए छू मंतर कर दिया. मैं कल वाला वो वीडियो देखकर सोच रहा था कि काश सरकार यही जादू शिक्षा मंत्री की कुर्सी के सामने करके दिखाती तो, मंत्री धर्मेंद्र प्रधान वहां से गायब हो जाते."

आप नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक इस प्रदर्शन की अनदेखी की है और सोनम वांगचुक की अपील पर ध्यान नहीं दिया है. यही वजह है कि देशभर के युवा इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट हुए हैं. उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “शिक्षा सुधार कोई छोटा काम नहीं है. इसमें सालों तक लगातार प्रयास करने पड़ते हैं. मैंने अपना जीवन शिक्षा सुधारों के लिए काम करते हुए बिताया है और इस उद्देश्य के लिए अपना बाकी जीवन भी समर्पित करने को तैयार हूं.”
सिसोदिया ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को ‘शिक्षा क्रांति के सिपाही' बताया और कहा कि सोनम वांगचुक ने अपनी सेहत को दांव पर लगाकर आंदोलन को मजबूती दी है. उन्होंने आंदोलनकारियों से अब तक बातचीत नहीं करने को लेकर सरकार की आलोचना की.
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