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दिल्ली में रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में सर्वे करेगा MCD

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद MCD दिल्ली में रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध कमर्शियल काम का सर्वे करेगा. सात दिन में रिपोर्ट तैयार होगी. लापरवाही पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी. इस आधार पर MCD कमिश्नर अदालत में जवाब दाखिल करेंगे.

दिल्ली में रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में सर्वे करेगा MCD
  • MCD ने SC के आदेश पर रिहायशी इलाकों में अवैध कमर्शियल गतिविधियों का व्यापक सर्वे कराने का निर्णय लिया है.
  • सभी जोनल अधिकारियों को 7 दिनों में सर्वे पूरा कर व्यापारिक उपयोग वाली प्रॉपर्टी की सूची बनानी है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कमर्शियल उपयोग को पर्यावरणीय और शहरी नियोजन के लिए गंभीर खतरा बताया है
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नई दिल्ली:

दिल्ली में रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध कमर्शियल काम पर अब सख्ती होने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम (MCD) ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी रिहायशी कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और केवल आवासीय उपयोग के लिए चिह्नित इलाकों में व्यापक सर्वे कराने का फैसला किया है.

MCD ने अपने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सात दिनों के भीतर अपने‑अपने क्षेत्रों का सर्वे पूरा करें और उन प्रॉपर्टीज की पूरी सूची तैयार करें, जिनका इस्तेमाल रहने के बजाय व्यापारिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. यह रिपोर्ट सीधे एमसीडी मुख्यालय भेजी जाएगी.

गलती या लापरवाही पर होगी कार्रवाई

MCD ने साफ किया है कि अगर सर्वे में किसी तरह की लापरवाही, गलत रिपोर्टिंग या किसी मामले को जानबूझकर छुपाने की बात सामने आई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर एमसीडी कमिश्नर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करेंगे.

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की पीठ जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन के हालिया फैसले के बाद आया है. कोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जिनमें रिहायशी कॉलोनियों, इमारतों और जमीन का बिना अनुमति कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा हैय

कोर्ट ने इसे कानून और जनहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे उन लोगों को गंभीर नुकसान होता है, जिन्होंने घर खरीदने और बसने में अपनी जीवन भर की कमाई लगाई है.

पर्यावरण और शहरी व्यवस्था पर पड़ रहा असर

शीर्ष अदालत ने चेताया कि इस तरह के गलत इस्तेमाल के पर्यावरणीय और नागरिक परिणाम बेहद गंभीर हैं. इससे शहरी नियोजन प्रभावित हो रहा है और ट्रैफिक, पार्किंग, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि देश के कई बड़े शहरों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों तक में यह समस्या तेजी से फैल रही है.

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नगर निकायों की भूमिका पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि इन अवैध गतिविधियों को रोकने में स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों की भूमिका संदेह के घेरे में है, क्योंकि वे समय रहते कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं. इसी वजह से अदालत ने सभी राज्यों के नगर निकायों को रिहायशी इलाकों में कमर्शियल इस्तेमाल की जांच कर सख्त कदम उठाने के आदेश दिए हैं. अब माना जा रहा है कि दिल्ली में शुरू होने वाला यह सर्वे, भविष्य में अवैध कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ी कार्रवाई का आधार बनेगा.

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