- आम आदमी पार्टी की पंजाब में ताकत बढ़ी थी लेकिन राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का बीजेपी में शामिल होना बड़ा झटका है
- राघव चड्ढा ने 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP का प्रचार संभाला और पार्टी को रिकॉर्ड 92 सीटें दिलाईं थीं
- भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को पंजाब के गद्दार करार दिया और जनता से उन्हें माफ न करने की अपील की
दिल्ली का किला ढहने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP)की सारी ताकत पंजाब से आ रही है. ऐसे में पंजाब में AAP का झाड़ू हर विधानसभा में चलाने वाले राघव चड्ढा बीजेपी के हो गए. हालांकि, इसमें तकनीकि रूप से अभी दिक्कत है. मगर राघव के जाने का अंदाजा तो AAP के रणनीतिकारों को बहुत पहले हो गया था, इसलिए धीरे-धीरे दूरियां बढ़ती साफ दिख रही थीं. अभी चंद दिनों पहले ही AAP ने फैसला किया कि उसके और राघव चड्ढा की राहें अलग-अलग हो गईं हैं. पहले AAP और फिर राघव चड्ढा ने एक दूसरे पर सार्वजनिक बयानबाजी शुरू की. राघव चड्ढा को राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया. AAP ने पूरा अनुमान कर लिया था कि राघव के बीजेपी में जाने से उसे क्या नफा-नुकसान होना है.

AAP के अनुमान को राघव ने तोड़ा
मगर आज राघव चड्ढा ने AAP के उस अनुमान को गलत साबित कर दिया. राघव अकेले बीजेपी में नहीं गए. बल्कि AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से खुद को लेकर 7 को तोड़ लिया. राघव चड्ढा ने अपने साथ संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और हरभजन सिंह के बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर दिया. बम फटा तो AAP भी तुरंत हरकत में आई. सीधे-सीधे एहसान फरामोश होने का तमगा दिया, लेकिन जिस बात पर सबसे जोर दिया गया, वो था पंजाब के गद्दार. जी हां, खुद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कुछ लोग पार्टी छोड़कर गए हैं, लेकिन वे पंजाबी नहीं बल्कि पंजाब के गद्दार हैं. आपको लगेगा कि पंजाब के सीएम ने ऐसा बोला मगर पार्टी की भी लाइन यही रही. पार्टी के मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि AAP के जिन सांसदों ने बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है, उन्हें पंजाब की जनता कभी माफ नहीं करेगी. एक अच्छी सरकार पंजाब में चल रही है. भगवंत मान पंजाब के लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं. और आज उस सरकार के साथ ऑपरेशन लोट्स का खेल खेला जा रहा है. हमारे सांसदों को तोड़ा जा रहा है.

राघव चड्ढा सहित सातों को क्यों कहा गया ऐसा
आखिर इतनी बड़ी बात क्यों कही भगवंत मान ने? वो AAP के गद्दार भी कह सकते थे. मगर नहीं पंजाब पर फोकस था. दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह भी राघव चड्ढा ही हैं. 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने राघव चड्ढा को पंजाब का सह-प्रभारी बनाया था. भले ही आधिकारिक प्रभारी जरनैल सिंह थे, लेकिन पूरा दबदबा राघव चड्ढा का रहा. उन्होंने पूरा कैंपेन डिजाइन किया और ग्राउंड लेवल पर लागू भी किया. यहां तक की टिकट बंटवारे में भी उनका अहम रोल माना जाता था. मीडिया रणनीति बनाने के साथ ही अरविंद केजरीवाल-भगवंत मान के साथ मिलकर चुनाव प्रचार को संभाला. अवैध माइनिंग जैसे मुद्दे उठाए. तत्कालीन CM चरणजीत चन्नी के हलके में अवैध खनन को बड़ा मुद्दा बनाया.

सरकार बनने के बाद भी रही भूमिका
नतीजा AAP को 117 में से रिकॉर्ड 92 सीटें मिलीं. चुनाव के बाद राघव चड्ढा को "जीत का हीरो" कहा गया. भगवंत मान सरकार में सलाहकार नियुक्त हुए. उन्हें राज्य सरकार की सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाया गया. उनका काम सरकार की जन-हितैषी योजनाओं की देखरेख और वित्त के मामलों पर सलाह देना था. जब तक दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तब तक विरोधी कहते थे कि "पंजाब की सरकार RC यानी राघव चड्ढा के रिमोट कंट्रोल से चलती है". उन्हें "सुपर CM" तक कहा गया. फिर जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तो अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का दखल पंजाब में बढ़ गया. हालांकि, इससे पहले ही दोनों के जेल जाने के समय राघव चड्ढा लंदन चले गए थे और कभी भी खुलकर केजरीवाल और सिसोदिया का बचाव नहीं किया. जाहिर है पंजाब में AAP के भगवंत मान चेहरा जरूर थे, लेकिन दिमाग राघव चड्ढा का माना गया. अब राघव चड्ढा बीजेपी में चले गए हैं. साथ में और 6 सांसदों को ले गए हैं. इससे पंजाब के AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं में खलबली मचनी थी, सो मची. पर AAP की कोशिश है कि अब ज्यादा डैमेज नहीं हो. इसीलिए राघव चड्ढा और उनके साथ गए सांसदों पर पंजाब का नाम लेकर हमले किए जा रहे हैं.

बीजेपी का चुपचाप अभियान
मगर बीजेपी पंजाब की तैयारी आज से नहीं बल्कि सालों से कर रही है. 2014 में मोदी-शाह के उभार के बाद से ही बीजेपी पंजाब पर फोकस कर रही है. उसी चुनाव में अरुण जेटली को पंजाब के अृमतसर से चुनाव लड़ाया गया, मगर वो हार गए. उनको चुनाव लड़ाकर बीजेपी पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती थी, मगर ये नहीं हो पाया. फिर 2019 में पीएम मोदी ने एक बड़ा फैसला किया. 24 अक्टूबर 2019 को करतारपुर कॉरिडोर पर भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों ने जीरो प्वाइंट पर मिलकर समझौते पर दस्तखत किए. 9 नवंबर 2019 को PM नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के PM इमरान खान ने इसका उद्घाटन किया. 12 नवंबर 2019 को गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती पर कॉरिडोर चालू किया गया. ये पहली बड़ी कोशिश पंजाब का दिल जीतने की कोशिश के तौर पर की गई. इसके बाद किसान आंदोलन के चलते 26 सितंबर 2020 को शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में NDA से नाता तोड़ लिया. बीजेपी ने उसे नहीं मनाया. 2022 विधानसभा चुनाव बीजेपी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और सुखदेव ढींढसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. 73 सीट लड़कर बीजेपी महज 2 सीट ही जीत पाई.

2022 के बाद दिखी तेजी
इसके बाद ही बीजेपी ने मिशन पंजाब शुरू कर दिया. बीजेपी को समझ आ गया कि बगैर पंजाब के मजबूत नेताओं के सिर्फ योजनाओं के बूते सरकार नहीं बनाई जा सकती. कांग्रेस के दिग्गज नेता सुनील जाखड़, कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं को शामिल किया. इसके साथ ही कांग्रेस के बड़े नेताओं जयवीर शेरगिल, परनीत कौर, रवनीत सिंह बिट्टू, राज कुमार वेरका, बलबीर सिंह सिद्धू, सुंदर शाम अरोड़ा, गुरप्रीत सिंह कांगड़, फतेहजंग सिंह बाजवा, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को शामिल कराया गया. वहीं AAP से आए सुशील कुमार रिंकू और शीतल अंगुराल आ चुके हैं. अकाली दल से अमरपाल सिंह बोनी अजनाला, थीमनजिंदर सिंह सिरसा, तरनजीत सिंह संधू, हंसराज हंस जैसे नेताओं ने भी बीजेपी की सदस्यता ले ली. यही नहीं बॉलीवुड एक्टर और पंजाब के फेमस गायक दिलजीत दोसांझ PM मोदी से 1 जनवरी 2025 को मिले. इसे भी बीजेपी का मिशन पंजाब का हिस्सा ही माना गया. मतलब साफ है कि बीजेपी धीरे-धीरे पंजाब में अपना आधार बढ़ाती जा रही है. राघव चड्ढा और उनके साथ आए 6 सांसद अब इसमें अपना योगदान देंगे तो जाहिर है AAP के लिए 2027 का चुनाव बहुत आसान तो नहीं होने जा रहा.
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