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क्या आपको पता है कि दिल्ली की पहली FIR कब, कहां और किस जुर्म में लिखी गई थी?

Delhi News: दिल्ली के 200 से ज्यादा थानों में एक थाना ऐसा है, जिसे देश के 15000 पुलिस थानों में पहला स्थान हासिल है. यही वह जगह है, जहां राजधानी की पहली FIR दर्ज करवाई गई थी. इस जगह के बारे में डिटेल में पढ़ें.

क्या आपको पता है कि दिल्ली की पहली FIR कब, कहां और किस जुर्म में लिखी गई थी?
दिल्ली की पहली FIR के बारे में जानें.
  • दिल्ली में पहली FIR 31 दिसंबर 1861 को सदर बाजार थाना में तेल चोरी के मामले में दर्ज की गई थी
  • पहली FIR में दल्लू माली ने रामदास और लक्ष्मण दास के खिलाफ सात रुपए के तेल चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी
  • सदर बाजार थाना अंग्रेज़ों द्वारा बनवाई गई तीन मंजिला इमारत है जो भारतीय स्थापत्य कला का मिश्रण है
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नई दिल्ली:

आज की तारीख़ में राजधानी दिल्ली में औसतन 1000 FIR रोज दर्ज की जाती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि एक वक्त दिल्ली में पहली FIR महज 7 रुपए चोरी की दर्ज की गई थी. आप ये जानना जरूर चाहेंगे कि दिल्ली की पहली FIR किसने और किसके ऊपर किस जुर्म के तहत दर्ज करवाई थी? उस थाने से लेकर चोरी की रकम तक डिटेल में जानिए सबकुछ.

165 साल पहले 7 रुपये के तेल चोरी पहली FIR 

 दिल्ली में पहली FIR 31 दिसंबर 1861 को लिखी गई थी. उस वक्त सदर बाज़ार में तेल के एक व्यापारी दल्लू माली सदर बाज़ार थाने पहुंचे और उन्होंने दो लोगों के खिलाफ 7 रुपये का तेल चोरी करने की FIR लिखवाई गई थी. उर्दू और फ़ारसी में लिखी ये FIR एक पन्ने की थी. सोचिए उस वक्त 7 रुपए की कीमत क्या होगी ? आप इससे अनुमान लगा सकते हैं कि 1861 में सोना 14-16 रुपए प्रति तोला यानि 16 रुपए में आप 10 ग्राम सोना खरीद सकते थे. इस हिसाब से देखा जाए तो उस वक्त 7 रुपए के तेल चोरी यानि आज के करीब 60 हजार रुपए के बराबर हुई. दल्लू मल ने 7 रुपए तेल चोरी की FIR रामदास और उनके भाई लक्ष्मण दास पर लिखवाई गई थी. FIR के मुताबिक, ये दोनों भाई आवारा टाइप के लोग थे. इन्होंने दल्लू मल के तेल की चोरी करवाई थी.

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सदर बाज़ार थाने की ऐतिहासिक इमारत सबसे शानदार 

पहाड़गंज के भीड़भाड़ वाले इलाके से गुज़रते हुए जब आप सदर बाज़ार की ओर चलेंगे तो मशहूर ईदगाह मैदान से कुछ ही दूरी पर आपको सदर बाज़ार थाना मिलेगा, ये दिल्ली का दूसरा सबसे पुराना थाना है. दिल्ली की पहली FIR यहीं लिखी गई थी. सदर बाजार थाने की तीन मंजिला इमारत अंग्रेज़ों ने बनवाई थी. तीन मंजिला इस इमारत के अंदर दाखिल होते ही ऊंचा मेहराबदार दरवाजा दिखेगा. ये अंग्रेज़ी स्थापत्य कला का नमूना है, जिसमें प्रवेशद्वार काफ़ी भव्य होता था.

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थाने की इमारत भारतीय स्थापत्य कला का प्रतीक

इसी भव्य दरवाज़े से जब आप अंदर प्रवेश करेंगे तो कोर्ट यार्ड यानि आंगन पड़ता है जो भारतीय स्थापत्य कला की पहचान है. इस कोर्ट यार्ड के चारों तरफ दो मंजिला ये भव्य इमारत गोल खंभों पर टिकी है, जो अंग्रेज़ी और भारतीय स्थापत्य कला का मिलाजुला प्रतीक है. वर्तमान समय में यहां के SHO सहदेव सिंह तोमर है जो बताते हैं कि मूल इमारत की संरचना से कोई छेडछाड नहीं की गई है. इसको हेरिटेज बिल्डिंग का दर्जा मिला है. 

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15000 पुलिस थानों में सदर बाज़ार थाना पहले नंबर पर 

इमारत की ख़ासियत ये है कि गर्मियों हवादार और सामान्य से ज्यादा ठंड रहती है.मोटी दीवार, ऊंची छत और कोर्टयार्ड में लगे पेड़ों की वजह से इमारत में रोशनी और हरियाली दोनों मौजूद रहती हैृ. सहदेव तोमर बताते हैं कि शिकायतकर्ता आते हैं तो उनके लिए अच्छे बैठने की सुविधा और हमारा हेल्प डेस्क है जो उनकी पूरी मदद करता है. उद्देश्य यही है कि यहां आने वाले शिकायतकर्ताओं के मन में कोई डर न हो. गृह मंत्रालय के एक सर्वे में देशभर के 15000 पुलिस थानों में सदर बाज़ार पुलिस थाने को पहला स्थान मिला था. ये थाना अपने आप में बहुत सारे इतिहास को पूरी आधुनिक सुविधाओं के साथ समेटे हुए हैं. इमारत, इसकी ऐतिहासिकता को बिना छेड़े हुए तमाम आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस है, यही इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है.
 

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