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हिंदुत्व से लेकर जमीन अतिक्रमण, Gen-Z की आकांक्षा... दिल्ली शब्दोत्सव में भारतोत्सव पर चर्चा

संवाद के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि भारत में Gen-Z एस्पिरेशनल है, उनकी आकांक्षाएं देश को सबसे ऊपर ले जाने की है. मौजूदा परिस्थिति में Gen-Z के सामने जो चुनौतियां हैं, उनके जो मसले हैं, उन पर उनके साथ बात की जानी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढा जाना चाहिए.

हिंदुत्व से लेकर जमीन अतिक्रमण, Gen-Z की आकांक्षा... दिल्ली शब्दोत्सव में भारतोत्सव पर चर्चा
  • दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में सुनील अंबेकर ने RSS के 100 साल पूरे होने और हिंदुत्व के महत्व पर विचार व्यक्त किए
  • बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रही हिंसा को स्टेट स्पॉन्सर्ड बताया गया
  • न्याय व्यवस्था, यूनिफॉर्म सिविल कोड और कृष्ण जन्मभूमि विवाद जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञों ने गहराई से चर्चा की
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नई दिल्ली:

दिल्ली में आयोजित "दिल्ली शब्दोत्सव 2026 - भारत अभ्युदय" कार्यक्रम में रविवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के उदय और विकसित भारत के लक्ष्य के महत्व से जुड़े पहलुओं पर कई घंटे गंभीर चर्चा और मंथन हुआ. ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित दिल्ली शब्दोत्सव - 2026 में रविवार को "संघे शक्ति कलियुगे" विषय पर चर्चा से जन संवाद की शुरुआत हुई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, सुनील अंबेकर ने RSS के 100 साल पूरे होने से लेकर हिंदुत्व के बढ़ते महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे.

दिल्ली शब्दोत्सव में जन संवाद के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों का सवाल भी उठा. एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कहा, "बांग्लादेश में जो घटनाएं हुई हैं, वह एक स्टेट स्पॉन्सर्ड हिंसा जैसी हो रही है. कोई कार्रवाई इसे रोकने के लिए नहीं की जा रही है. पूरी दुनिया को इसके बारे में ध्यान देना चाहिए. कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह का समर्थन नहीं होना चाहिए. पूरी दुनिया को मिलकर ऐसी घटनाओं पर लगाम कसना चाहिए. मुझे लगता है आने वाले समय में यह परिस्थिति बदलनी चाहिए."

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जन संवाद के दौरान हिन्दुत्व और RSS के सौ साल पूरे होने पर सुनील अंबेकर ने कहा, "संस्थापक डॉ हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक Process Driven संस्था बनाया, एक प्रोग्रेसिव व्यवस्था तैयार की. इसका प्रमुख सिद्धांत था - राष्ट्र सर्वप्रथम. उनकी सोच थी सारा हिंदू समाज को एकजुट करने की. आज देश में हर रोज 87,000 नित्य लगने वाली शाखाएं लगती हैं. इनमें 32,000 शाखाएं सप्ताह में एक बार लगती है. Dr. Hedgewar ने कहा था कि गांव और शहर में एक परसेंट भी स्वयंसेवक बन जाते हैं, तो हम देश में जो वातावरण लाना चाहते हैं वह ला सकते हैं."

हिंदुत्व पर चर्चा के दौरान सुनील अंबेकर ने कहा, "हिंदू हमारी एक सांस्कृतिक पहचान है, और वह हमारे राष्ट्र से जुड़ती है. हमारे पूर्वजों ने हमेशा यही प्रयास किया सबको अपना मानकर. हिंदू का मतलब है - यू आर कनेक्टेड! Realization of Hindutva is Oneness. हमारे प्रकृति के अनुसार, हमारे प्रोफेशन के अनुसार हमारी कई प्रकार की आइडेंटिटी होगी, लेकिन वह Sub-Identity होगी. संस्कृति के हिसाब से चलने वाला हमारा हिंदुत्व ही है, हमें अगर एक रहना है. सबको एक करने वाला अगर कोई सूत्र है तो वह हिंदुत्व है."

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शब्दोत्सव के तीसरे सत्र के दौरान चर्चा का विषय था "ऑब्जेक्शन मी लार्ड". इसमें भारत में न्याय व्यवस्था के अलग-अलग पहलुओं पर जाने माने वकीलों ने लंबी चर्चा की. जुडिशियल सिस्टम के कोलोनियल इतिहास से लेकर जजों की नियुक्ति और कॉलेजियम सिस्टम से जुड़े मसलों पर चर्चा हुई. कानून विशेषज्ञों ने विस्तार से कानून व्यवस्था को और कारगर और बेहतर बनाने के लिए अपने विचार और सुझाव रखे.

दिल्ली शब्दोत्सव में कई घंटे तक चले जन संवाद के दौरान यूनिफार्म सिविल कोड को लेकर संविधान सभा में चली लंबी बहस का भी जिक्र हुआ. उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने इसे लागू किया है.

कृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई. सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, "मथुरा श्रीकृष्ण जन्म भूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामला चल रहा है. मुझे पूरा यकीन है कि जब इस पर कोर्ट में पूरा ट्रायल होगा हम सारे ऐतिहासिक सबूत पेश करेंगे. मुझे पूरा यकीन है जब भी यह केस अपने निष्कर्ष पर पहुंचेगा, वहां पर हम पूजा पाठ का अधिकार प्राप्त कर पाएंगे."

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इसके बाद चौथे सत्र में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनसंवाद में शामिल हुए. उन्होंने विस्तार से उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज से उठी समस्या और चुनौतियों से निपटने की उत्तराखंड सरकार की रणनीति को सामने रखा. उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ी इलाकों में सरकारी जमीन के अतिक्रमण के बढ़ते मामलों पर सख्ती से पहल करते हुए करीब 10000 एकड़ सरकारी जमीन को अवैध अतिक्रमण से खाली कर लिया है.

उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "उत्तराखंड की सांस्कृतिक मूल्य बनी रहे, ये हमारा संकल्प है. पिछली सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. मैं इसको "लैंड जिहाद" की संज्ञा देता हूं. पहाड़ी इलाकों में सरकारी भूमि का अतिक्रमण किया गया. हमने सरकारी जमीन के अतिक्रमण के खिलाफ एक अभियान शुरू किया. हमने उत्तराखंड में 10,000 एकड़ से ज्यादा की सरकारी जमीन पर से अतिक्रमण खत्म कर वापस लिया है."

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उत्तराखंड सरकार राज्य में मदरसा बोर्ड को खत्म करने के फैसले के बाद अब पूरे राज्य में उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "1 July, 2026 के बाद उत्तराखंड में उन सारे मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, जो उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के अनुसार शिक्षा मुहैया नहीं करेंगे. हमने मदरसा बोर्ड खत्म करने के फैसले के बाद यह तय किया है."

"Gen Z डायलॉग्स : विकसित भारत के सारथी" सत्र में चर्चा में भाषा सुंबली, अभिलिप्सा पांडा, विशाल चौरसिया और चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भाग लिया. इस सत्र के दौरान हुए जन संवाद में Gen-Z की बढ़ती आकांक्षाओं का विस्तार से विश्लेषण किया गया, और भारत को एक विकसित देश बनाने के लक्ष्य में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई.
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आज के युवा भारत को विकसित देश बनाना चाहते हैं. जब इमरजेंसी लगी थी, उस वक्त देश के युवाओं ने देश में लोकतंत्र बचाने की जंग लड़ी थी. आज देश की Gen-Z देश के संविधान के साथ है, रचनात्मक बदलाव के साथ है.

संवाद के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि भारत में Gen-Z एस्पिरेशनल है, उनकी आकांक्षाएं देश को सबसे ऊपर ले जाने की है. मौजूदा परिस्थिति में Gen-Z के सामने जो चुनौतियां हैं, उनके जो मसले हैं, उन पर उनके साथ बात की जानी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढा जाना चाहिए.

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