- दिल्ली में सबसे अधिक मौतें संचार तंत्र के फेल होने से होती हैं, जो कुल मृत्यु का लगभग तेइस प्रतिशत है
- गंदे पानी या दूषित भोजन से होने वाले जीवाणु संक्रमणों के कारण दिल्ली में सोलह हजार साठ मौतें दर्ज की गई हैं
- 2024 में दिल्ली में कुल तीन लाख 6459 हुए, जिसमें लड़कों की संख्या लड़कियों से अधिक है
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या कितनी भयनाक है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 2024 में सिर्फ फेफड़े संबंधी बीमारी से यहां 9211 मौतें हुई हैं, जबकि 2023 में ये आंकड़ा 8801 का था. ये खुलासा हुआ है दिल्ली सरकार की वार्षिक रिपोर्ट में. इस रिपोर्ट में दिल्ली में जन्म और मृत्यु से जुड़े अन्य आंकड़े भी विस्तार से दिए गए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में सरकुलेट्री सिस्टम (संचार तंत्र) के फेल होने को बताया गया है.

दिल्ली में मोटेतौर पर 23 फीसदी लोगों की मौत सिर्फ एक वजह से हो जाती है. इसमें ह्रदय गति या रक्त संबंध प्रवाह रुकने को अहम कारण बताया गया है. इसके अलावा करीब 17 फ़ीसदी मौतें यानि 16060 मौतें गंदा पानी या दूषित खाना जीवाणु जन्य संक्रमण से होते हैं. मौत का तीसरा सबसा बड़ा कारण फेफड़े या सांस संबंधी बीमारी को बताया गया है. इस बीमारी के कारण 10 फ़ीसदी मौतें हुई हैं जो 9211 हैं.
दिल्ली में इस वक्त मृत्यु दर 6.37 है जबकि 2023 में ये 6.16 फीसदी थी.दिल्ली की आबादी इस वक्त करीब 2 करोड़ 18 लाख के करीब है. दिल्ली में 2024 में 306459 जन्म हुए जिनमें 159549 यानि 52.06 फ़ीसदी लड़के और 146832 यानि 47.91 फ़ीसदी लड़कियों का जन्म हुआ यानि जन्मदर 14 फ़ीसदी है जो पिछले साल 14.66 फीसदी के मुक़ाबले कम है.

इनमें से स्नातक से नीचे दसवीं पास महिलाएं सबसे ज़्यादा 41.12 फ़ीसदी बच्चे पैदा कर रही हैं, जबकि स्नातक पास महिलाएं केवल 9.63 फीसदी और निरक्षर महिलाएँ 16.70 फ़ीसदी बच्चों को जन्म देती रही हैं.
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