दिल्ली के अशोक विहार इलाके के जेलरवाला बाग में सोमवार को दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑथॉरिटी (डीडीए) की बुलडोजरों ने अवैध झुग्गियों को ध्वस्त किया. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने आशियानों को एक-एक कर ढहते देखते रहे. इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. डीडीए की कार्रवाई से घबराए लोग इस दौरान घरों में से अपना सामान निकालते देखे गए. वहीं कुछ लोगों ने हाई कोर्ट के स्टे के बावजूद उनके आशियाने को गिराने का आरोप लगाया है.
सोमवार की सुबह 8 बजे से डीडीए के 5-6 बुलडोजरों ने अवैध झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की. इस दौरान करीब 200 अवैध झुग्गियों को तोड़ दिया गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए करीब 200 पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे.
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डीडीए ने कार्रवाई से पहले दिया था नोटिस
डीडीए ने यहां पर कारवाई करने से पहले नोटिस दे दिया था. करीब 2100 परिवारों में से 1600 को पुनर्वास योजना के तहत स्वाभिमानी सोसायटी में घर दे दिया गया है. वही 50 के करीब ऐसे लोग है जिन्हें मकान नहीं मिल पाया है. ऐसे में कुछ लोगों का दावा है कि वे हाई कोर्ट से स्टे लेकर आए हैं, लेकिन आज की कार्रवाई में जिन घरों पर स्टे है, उन्हें भी तोड़ा गया है.
करीब 30 साल से जेलरवाला बाग में रहने वाली 58 साल की सावित्री देवी कहती हैं, जिंदगीभर हमारे पति हमें, बच्चों को पालते रहे और यह मकान बनाया था. हमें अभी दूसरा घर नहीं मिला है, इसलिए कोर्ट से स्टे मिला था. घर पर डीडीए ने खुद मार्क भी किया है, लेकिन आज बुलडोजर लेकर आए तो हमारे घर को भी तोड़ दिया. रोते हुए सावित्री देवी कहती है कि बताइए अब हम कहां जाएं?

बहुत से लोगों को अभी तक नहीं मिला घर
स्वाभिमान फ्लैट्स में 1,675 अपार्टमेंट्स बनाए गए हैं. इन्हें जनवरी 2025 में शुरू किया गया गया था. इसका उद्देश्य जेलरवाला बाग से विस्थापित परिवारों को पुनर्वास देना था, लेकिन सावित्री देवी जैसे बहुत से लोग है जिन्हें अभी घर नहीं मिला है.
डीडीए का दावा है कि अब तक करीब 1,100 लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है, लेकिन 1992 से वहां रह रहे दिलीप कुमार जैसे निवासी, जिनके पास वैध राशन कार्ड है, तस्वीर को और भी डरावना बताते हैं.
एनडीटीवी से बात करते हुए कुमार ने कहा, “यहां करीब 3,100 लोग रहते थे. करीब 500 लोग जिनके घर तोड़े गए हैं, अभी भी फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यहां दूसरी झुग्गियों से हटाए गए लोगों को भी फ्लैट दिए जा रहे हैं.” कुमार ने डीडीए को “निर्दयी” बताया और कहा कि उनके बिजली मीटर हटा दिए गए हैं और अब भी उन्हें बेदखली का डर सता रहा है. उन्होंने कहा, “हम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मुझे यकीन है कि वे हमारे घर भी तोड़ देंगे और बिना किसी राहत के हमें बाहर निकाल देंगे.”
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अभियान को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अभियान का बचाव करते हुए सुरक्षा का हवाला दिया. एक प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा था, “अगर रेलवे लाइन पर अतिक्रमण रहेगा और कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध ढांचों को हटाने की जरूरत को बरकरार रखा, लेकिन इसका मानवीय मूल्य नकारा नहीं जा सकता है. कई परिवारों को बिना पर्याप्त नोटिस दिए उजाड़ दिया गया और प्रदर्शन होते रहे.
इस मुद्दे पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं. भाजपा ने आप पर पुनर्वास में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि आम आदमी पार्टी ने कहा कि बीजेपी ने कहा था कि जहां झुग्गी वहां मकान बनाएंगे, लेकिन बिना घर दिए ही लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं.
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