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दिल्‍ली में सड़कों-चौराहों पर लगे 2.5 लाख CCTV कैमरे हटाए जाएंगे, जानें क्‍या है वजह?

दिल्ली सरकार लगभग 2.5 लाख CCTV कैमरे हटाकर नए लगाएगी, जिनमें से 50 हजार कैमरे पहले चरण में बदले जाएंगे. ये कैमरे सुरक्षा ऑडिट के बाद इंस्टॉल होंगे.

दिल्‍ली में सड़कों-चौराहों पर लगे 2.5 लाख  CCTV कैमरे हटाए जाएंगे, जानें क्‍या है वजह?
  • दिल्ली में करीब 2.75 लाख सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें से अधिकांश आम आदमी पार्टी की सरकार ने लगाए थे
  • दिल्ली CM रेखा गुप्ता के कार्यकाल में फेज़वार तरीके से पुराने और विवादित चायनीज कैमरे हटाकर नए लगाए जाएंगे
  • 2020 से 2022 के बीच दिल्ली में लगे लगभग 1 लाख 40 हजार कैमरों में हाइविज़न जैसी विवादित चीनी कंपनियों के हैं
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नई दिल्‍ली:

दिल्ली में सड़कों और चौराहों पर लगे करीब 2.5 लाख कैमरे हटाए जाएंगे. ये सभी कैमरे आम आदमी पार्टी की सरकार में लगाए गए थे. दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री रेखा गुप्‍ता के कार्यकाल में अब इन्‍हें अलग-अलग फेज में हटाया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, फर्स्‍ट फेज में लगभग 50 कैमरों को बदला किया जाएगा. इसके लिए शहर के संवेदनशील इलाकों को चुना गया है, जहां सबसे पहले 50 हजार कैमरे बदलकर नए लगाए जाएंगे. इसके लिए बाक़ायदा दिल्ली पुलिस से मिलकर सेक्युरिटी ऑडिट कराकर लगाया जाएगा. इनमें ऐसे हज़ारों चायनीज कैमरे भी हैं, जो अपनी अवधि पूरी कर चुके हैं और उनको हटाकर लेटेस्‍ट कैमरे लगाए जाएंगे. इस वक़्त राजधानी में करीब 2 लाख 75 हज़ार कैमरे लगे हुए हैं.

CCTV कैमरा को क्यों बदलना चाहती है रेखा सरकार

दिल्‍ली में लगभग 1 लाख 40 हजार चायनीज कैमरे लगे हैं. इनमें भी कई विवादित चीनी कंपनी हाइविज़न (Hikvision) के हैं. दरअसल, दिल्ली में 2020 से 2022 तक 2.5 लाख कैमरे लगाए हैं जिनमें Hikvision कंपनी के कैमरे भी हैं. ये कंपनी दुनिया की CCTV बनाने वाली बड़ी कंपनियों में से एक है, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह कई गंभीर कारणों से अंतरराष्ट्रीय विवादों के केंद्र में भी रही है. यही वजह है कि दिल्‍ली की रेखा गुप्‍ता सरकार ने अब इन कैमरों को बदलने का फैसला किया है. 

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डेटा चोरी होने का डर

फिर भारत सरकार ने भी चीन की सीसीटीवी कंपनियों के लिए सुरक्षा मानकों (STQC नियमों) को कड़ा करते हुए हाइविज़न और अन्य चीनी कंपनियों के इंटरनेट से चलने वाले कैमरों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. नियमों के मुताबिक, सरकार उन प्रॉडक्ट को सर्टिफाई (Certify) नहीं कर रही है, जिनमें चीनी चिपसेट (Chipsets) का इस्तेमाल किया गया है. ये इसलिए किया जा रहा है, ताकि डेटा चोरी होने का डर न रहे. दरअसल, कई सुरक्षा से जुड़े जानकार अंदेशा जता चुके हैं कि कैमरे का डेटा विदेशी सर्वर पर भी भेजा जा सकता है. अमेरिका और यूके जैसे देशों ने पहले ही इस तरह की चीनी कंपनियों पर बैन लगा रखा है.

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दिल्ली में दो प्रमुख चरणों में कैमरे लगाने का काम हुआ था. पहला चरण 2020 से नवंबर 2022 तक 1,40,000 कैमरे लगाए गए. दूसरे चरण 2025 से मार्च 2026 तक एक लाख 35 हजार कैमरे लगाए गए. सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में लगे ज्यादातर सीसीटीवी कैमरों की मियाद भी खत्म हो गई और बहुत सारे कैमरे चीनी कंपनी के होने की वजह से पहले चरण में उन्हीं कैमरों को बदला जाएगा.

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STQC नियमों को CCTV पर क्यों लागू किया जा रहा 

STQC यानि Standardisation Testing and Quality Certification है, जो भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक निदेशालय है. यह एक ऐसी संस्था है जो यह जांचती है कि इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता के हैं या नहीं.साथ ही सीसीटीवी को भी यहां से सर्टिफाइड किया जाएगा कि इसमें कोई सामग्री ऐसी तो नहीं जो डेटा चोरी या सर्विलांस को कोई दूसरा उपयोग कर सकता हो.

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