Kejriwal Bail: अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत.
- अदालत के 3 सवाल: केजरीवाल की जमानत (Kejriwal Bail) याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि तर्कों के आधार पर हमने 3 प्रश्न तैयार किए हैं. क्या गिरफ्तारी में अवैधता थी? क्या अपीलकर्ता को नियमित जमानत दी जानी चाहिए? क्या आरोप पत्र दाखिल करना परिस्थितियों में इतना बदलाव है कि उनको ट्रायल कोर्ट फिर से भेजा जा सके?
- गिरफ्तारी अवैध नहीं: दोनों जजों ने सहमति से फैसला देते हुए केजरीवाल की जमानत मंजूर कर ली. उन्होंने कहा कि धारा 41 A सीआरपीसी का उल्लंघन नहीं है.गिरफ्तारी अवैध नहीं है. केजरीवाल इस केस पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे और ट्रायल कोर्ट से सहयोग करेंगे.
- हिरासत में रखना न्याय का मजाक: हमने निजी आजादी पर विचार किया है. ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है. बाकी शर्तें ट्रायल कोर्ट लगाएगा. इन आधारों पर अपीलकर्ता को हिरासत में रखना न्याय का मजाक होगा. विशेषकर तब जब उसे अधिक कठोर PMLA में जमानत दी गई है.
- CBI पहले कहां थी: ऐसा लगता है कि ईडी मामले में केजरीवाल को निचली अदालत से नियमित जमानत दिए जाने के बाद ही सीबीआई एक्टिव हुई और उनकी हिरासत की मांग की. 22 महीने से अधिक समय तक CBI को उन्हें गिरफ्तार करने की जरूरत महसूस नहीं हुई. इस तरह की कार्रवाई से गिरफ्तारी पर ही गंभीर सवाल उठते हैं. इस पर विचार किया जा सकता है.
- गिरफ्तारी सही नहीं ठहरा सकते: जहां तक गिरफ्तारी के आधार का सवाल है, ये गिरफ्तारी की आवश्यकता को पूरा नहीं करती. सीबीआई गोलमोल जवाबों का हवाला देकर गिरफ्तारी को उचित नहीं ठहरा सकती और हिरासत जारी नहीं रख सकती. आरोपी को बयान देने के लिए भी मजबूर नहीं किया जा सकता.
- जांच पर ये नहीं कहना चाहिए: सीबीआई एक प्राथमिक जांच एजेंसी है. ऐसा कोई संकेत नहीं दिया जाना चाहिए कि जांच ठीक से नहीं की गई. सीबीआई को पिंजरे में बंद तोते के रूप में देखा जाना चाहिए.
- ED केस वाली शर्तें लागू: अरविंद केजरीवाल पर ईडी मामले में मिली अंतरिम जमानत पर लागू शर्तें सीबीआई मामले में भी लागू रहेंगी.वह कोई भी फाइल साइन नहीं कर पाएंगे.
- ये सब नहीं कर सकेंगे: अरविंद केजरीवाल जमानत अवधि के दौरान शराब नीति मामले में टिप्पणियां नहीं करेंगे.उनको जमानत में पूरा सहयोग करना होगा. वह बतौर सीएम दफ्तर नहीं जा सकते हैं. इसके साथ ही वह किसी भी फाइल पर साइन नहीं कर पाएंगे.
- गवाह से बात नहीं करेंगे: अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री दफ्तर और सचिवालय नहीं जा सकेंगे.वह किसी भी गवाह से कोई भी बातचीत नहीं करेंगे. जरूरत पड़ने पर उनको ट्रायल कोर्ट में पेश भी होना होगा.
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