राजधानी दिल्ली में सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी को एक साथ मजबूत करने के लिए एक अनोखी परियोजना पर काम चल रहा है. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के व्यस्त यमुना विहार-भजनपुरा मार्ग पर बन रहा यह डबल-डेकर ढांचा दिल्ली का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें सड़क फ्लाईओवर और एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर को एक ही संरचना में विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और लोगों की यात्रा को आसान बनाना है.
यमुना विहार से भजनपुरा तक बनेगा आधुनिक कॉरिडोर
करीब 1.40 किलोमीटर लंबा यह ढांचा यमुना विहार और भजनपुरा मेट्रो स्टेशन के बीच बनाया जा रहा है. इसका विस्तार करावल नगर, घोंडा और बृजपुरी जंक्शन से होकर मंगल पांडे मार्ग तक होगा. यह इलाका लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझता रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद यहां यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
70 फीसदी ट्रैफिक ऊपर शिफ्ट होने का अनुमान
दिल्ली सरकार के अनुसार फ्लाईओवर शुरू होने के बाद इस मार्ग का 65 से 70 प्रतिशत ट्रैफिक एलिवेटेड कॉरिडोर पर चला जाएगा. इससे नीचे की सड़क पर स्थानीय वाहनों का दबाव काफी कम होगा. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गोकुलपुरी से खजूरी खास होते हुए सिग्नेचर ब्रिज तक लोगों को लगभग सिग्नल-फ्री सफर मिल सकेगा. इससे रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोगों का समय बचेगा.
निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंचा
परियोजना का लगभग 88 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. 22 जुलाई तक कुल 80 डेक स्लैब में से 74 लगाए जा चुके हैं जबकि केवल 6 स्लैब का काम बाकी है. 5,600 मीटर में प्रस्तावित क्रैश बैरियर में से 4,100 मीटर का निर्माण पूरा किया जा चुका है. इसके अलावा 18 एक्सपेंशन जॉइंट्स में से 14 लगाए जा चुके हैं.
अब रैंप निर्माण, अंतिम सड़क सतह बिछाने, 100 बिजली के खंभे लगाने और सुरक्षा संबंधी कुछ कार्य शेष हैं. क्रैश बैरियर की पेंटिंग और कंक्रीट संरचना पर एंटी-कार्बोनेशन कोटिंग का काम भी पूरा किया जाना है.
लागत बढ़ी लेकिन परियोजना को मिली मंजूरी
इस परियोजना की संशोधित लागत 291 करोड़ रुपये तय की गई है. पहले इसकी अनुमानित लागत 220.10 करोड़ रुपये थी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में संशोधित बजट को मंजूरी दी गई. फ्लाईओवर की चौड़ाई 23 मीटर होगी और दोनों ओर तीन-तीन लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इसके दोनों सिरों पर 140 मीटर लंबे रैंप भी होंगे.
दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना का निर्माण दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) कर रहा है. लोक निर्माण विभाग और डीएमआरसी के बीच 24 फरवरी 2021 को समझौता हुआ था. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक वर्ष 2023 में कुछ जरूरी मंजूरियां न मिलने के कारण काम प्रभावित हुआ था. अब सभी स्वीकृतियां मिलने के बाद निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है. सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा कर जनता को समर्पित करना है. इसके शुरू होने के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
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