- नई दिल्ली में 2 जनवरी से आयोजित हो रहा है देश का सबसे बड़ा साहित्य-सांस्कृतिक महोत्सव 'दिल्ली शब्दोत्सव 2026'
- इस दौरान 100+ वक्ता, 40 से अधिक पुस्तकों का विमोचन, कवि सम्मेलन, नृत्य-संगीत और आध्यात्मिक प्रस्तुतियां होंगी.
- 40 विश्वविद्यालयों की भागीदारी, Gen-Z को भारतीय विचारधारा से जोड़ने पर फोकस.
नई दिल्ली में 2 जनवरी से 'दिल्ली शब्दोत्सव 2026' कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है. भारत की सांस्कृतिक, साहित्यिक और वैचारिक चेतना को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला यह कार्यक्रम 4 जनवरी तक मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित किया जा रहा है. भारत के इतिहास, संस्कृति और आने वाली पीढ़ी की ऊर्जा को दर्शाने वाले इस अभूतपूर्व तीन दिवसीय शब्दोत्सव में प्रवेश मुफ्त है, लेकिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना आवश्यक है. ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026' का भव्य उद्घाटन 2 जनवरी (शुक्रवार) को दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक निश्चित किया गया है. उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन होंगे. इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा भी मंच पर मौजूद रहेंगे.

दिल्ली शब्दोत्सव 2026 क्या है?
दिल्ली के कला, संस्कृति और भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने 'दिल्ली शब्दोत्सव 2026' की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि, "दिल्ली शब्दोत्सव 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, साहित्यिक और वैचारिक चेतना का उत्सव है."
उन्होंने कहा कि ‘दिल्ली शब्दोत्सव' भारत की ज्ञान परंपरा, संस्कृति और वैचारिक चेतना को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाला एक स्थायी ब्रांड बनायेगा. इसके तहत साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श को साझा रूप से प्रदर्शित किया जाएगा ताकि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय पटल तक विस्तार कर सके.
इस तीन दिवसीय महोत्सव में देशभर से 100 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ता भाग ले रहे हैं. इसमें लेखक, फिल्ममेकर, विचारक, पत्रकार, कानूनी विशेषज्ञ और युवा आइकॉन शामिल हैं. इस दौरान 40 से अधिक पुस्तकों का विमोचन, 6 भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम और 2 बड़े कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे. इसके साथ ही दिल्ली एवं एनसीआर के 40 से अधिक विश्वविद्यालयों के छात्र भी इसमें सक्रिय सहभागिता करेंगे.

दिल्ली शब्दोत्सव 2026 के मंच पर भारत की कहानियां, गीत और विचार जीवंत हो उठेंगे. तीन दिवसीय यह आयोजन भारत के अभ्युदय की भावना को मनाता है- एक ऐसा नया भारत, जो अपनी प्राचीन सभ्यता से जुड़ा है और आत्मविश्वास और रचनात्मकता के बल पर आगे बढ़ रहा है. इस कार्यक्रम का आयोजन सुरुचि प्रकाशन ने हिंदी अकादमी और दिल्ली सरकार के सहयोग से किया है.
इस आयोजन के दौरान हर शाम कुछ खास प्रस्तुति होगी. यहां भारत की अलग-अलग सुरों से सजी संगीतमय महफिल, युवाओं के लिए जोश से भरा यूथ ओपन माइक स्टेज, किताबों पर चर्चा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भारत के अलग-अलग स्वादों से सजा फ़ूड कोर्ट; शब्दोत्सव का हर कोना एक नया अनुभव पेश करेगा.
हर रोज यहां हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी का अनुमान है. यही कारण है कि शब्दोत्सव महज एक उत्सव नहीं बल्कि भारत के अभ्युदय की एक जीवंत तस्वीर है. इसमें शामिल होने वाला हर एक शख्स खुद को एक उभरते, आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा महसूस करते हैं.

वक्ताओं की सूची
इस महोत्सव में भारत के कई प्रतिष्ठित दिग्गज और देशभर के प्रमुख वक्ता हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें शामिल हैं- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश भदौरिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर, कलाकार और लेखक मुकुल कानितकर, फिल्ममेकर चंद्रप्रकाश द्विवेदी, बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी, शास्त्रीय संगीत कलाकार माधवी लता, नाटककार व लेखक विक्रमजीत बनर्जी, लेखक व आलोचक विष्णु शंकर जैन, अभिनेता व लेखक अखिलेंद्र मिश्रा, टीवी अभिनेता व पूर्व सांसद नीतीश भारद्वाज. इस दौरान अन्य गणमान्य नेता, साहित्यकार और युवा विचारक भी अपने विचार साझा करेंगे.

इस महोत्सव में मीडिया, न्यायपालिका और सामाजिक विमर्श से जुड़े विचारक भी शामिल होंगे. इस दौरान हर्षदीप कौर, हंसराज रघुवंशी और प्रहलाद सिंह टिपनिया सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे. भरतनाट्यम, कथक, भजन संध्या, कवि सम्मेलन, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन जैसे कार्यक्रम भी होंगे.

कार्यक्रम की रूपरेखा
‘दिल्ली शब्दोत्सव' में 3 दिनों तक कई सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, इनमें प्रमुख हैं:
- 40 से अधिक नई पुस्तकों का विमोचन— लेखक और प्रकाशकों के सहयोग से नई रचनाओं का सराहनीय प्रकाशन सत्र.
- 6 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां — भरतनाट्यम, कथक, लोक और समकालीन नृत्य-संगीत संग्रह.
- 2 बड़े कवि सम्मेलन — जहां देशभर के कवि अपने शब्दों के जादू बिखेरेंगे.
- यूथ ओपन माइक स्टेज — युवा लेखकों, कवियों और कलाकारों को मंच उपलब्ध कराएगा.
कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग इस दौरान यहां फूड कोर्ट में भारत के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं,

युवा एवं छात्रों की भागीदारी
इस आयोजन की एक खास बात है युवा और छात्रों की सहभागिता. दिल्ली और एनसीआर के लगभग 40 विश्वविद्यालयों के छात्र इस महोत्सव में भाग लेंगे और Gen Z Dialogues जैसे सत्रों में अपनी बात रखेंगे. इससे यह अंदाजा होता है कि शब्दोत्सव न केवल अनुभवियों के लिए, बल्कि युवा प्रतिभाओं के लिए भी एक संवाद मंच तैयार करेगा.

दिल्ली का सांस्कृतिक भविष्य
दिल्ली शब्दोत्सव को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नई सोच और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया जा रहा है. यहां विचारकों, लेखकों, कलाकारों और युवाओं का एक साझा मंच तैयार होगा, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सोच का समन्वय दिखाई देगा. दिल्ली सरकार के अनुसार यह महोत्सव आगे जाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति, साहित्य और वैचारिक विमर्श के लिए एक प्रभावी मंच का रूप लेगा. ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026' कहानी, संगीत, विचार और भारत की सांस्कृतिक चमक को उजागर करने वाला एक ऐसा उत्सव है जो दिल्ली को साहित्यिक और सांस्कृतिक विश्व मानचित्र पर एक नई पहचान देगा.
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