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40,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED का एक्शन, आरकॉम के पूर्व निदेशक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

ईडी के अनुसार, आरकॉम से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है. जांच में अपराध से अर्जित धन को विदेशी कंपनियों और ऑफशोर इकाइयों के जरिए डायवर्ट करने के आरोप सामने आए हैं.

40,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED का एक्शन, आरकॉम के पूर्व निदेशक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
  • ED ने ₹40,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में RCom के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
  • ईडी ने पुनीत गर्ग को बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार किया था
  • धोखाधड़ी से प्राप्त धन को विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर इकाइयों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था

ईडी ने ₹40,000 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की गई है. मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में होनी है. ईडी ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज करने के बाद पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया था. जांच के शुरुआती चरण में शेष ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' का पता लगाने, अन्य लोगों को पहचानने और मनी लॉन्ड्रिंग को उजागर करने के लिए ईडी ने गर्ग को 9 दिनों की रिमांड पर लिया था. पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

क्या है मामला

ईडी के अनुसार, आरकॉम और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े ₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है. इस मामले में ईडी का आरोप है कि इस धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर इकाइयों के जरिये इधर‑उधर किया गया. यह भी सामने आया है कि इस धन का इस्तेमाल अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन में एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदने समेत निजी खर्चों में किया गया. ईडी का कहना है कि आरकॉम की दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के दौरान इस संपत्ति को कथित तौर पर धोखाधड़ी के तरीके से बेचा गया और बिक्री से मिली रकम को फर्जी निवेश व्यवस्था के जरिये विदेश भेजा गया.

ईडी के अनुसार, पुनीत गर्ग लंबे समय तक रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) में अहम पदों पर रहे. 

  • 2006 से 2013 तक ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के प्रेसिडेंट,
  • 2014 से 2017 के बीच रेगुलेटरी अफेयर्स के प्रेसिडेंट,
  • अक्टूबर 2017 में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर,
  • और अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक नॉन‑एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर काम किया

ईडी का कहना है कि 2001 से 2025 तक इतने लंबे समय तक ऊंचे पदों पर रहते हुए पुनीत गर्ग ने बैंक फ्रॉड से कमाए गए पैसे को छिपाने, घुमाने (लेयरिंग) और ठिकाने लगाने में अहम भूमिका निभाई. जांच में सामने आया है कि इसी कथित काले धन से अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक लग्ज़री फ्लैट खरीदा गया था। बाद में जब आरकॉम की कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रक्रिया (CIRP) चल रही थी, तब पुनीत गर्ग ने इस फ्लैट को कथित तौर पर धोखाधड़ी से बेच दिया. ईडी के मुताबिक, इस बिक्री से करीब 8.3 मिलियन डॉलर (लगभग ₹70 करोड़) मिले, जिसे फर्जी निवेश दिखाकर दुबई स्थित एक कंपनी के जरिए बाहर भेज दिया गया.

खास बात यह है कि यह पूरी डील रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल की जानकारी और मंजूरी के बिना की गई. ईडी का यह भी दावा है कि जिस दुबई कंपनी के माध्यम से यह पैसा भेजा गया, उसका संबंध पाकिस्तान से जुड़े एक व्यक्ति से है. एजेंसी के अनुसार, यह मामला सिर्फ बैंक फ्रॉड तक सीमित नहीं है, बल्कि देश‑विदेश में पैसे छिपाने और घुमाने के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें पुनीत गर्ग की भूमिका अहम बताई जा रही है.

CBI की एफआईआर पर जांच

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत पुनीत गर्ग को आरकॉम और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था. जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई 21 अगस्त 2025 को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की गई, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120‑बी, 406 और 420, साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1989 की धाराएं 13(2) और 13(1)(d) शामिल हैं.

जांच में क्या कुछ आया सामने

आपको बता दें कि ईडी के अनुसार, पुनीत गर्ग ने साल 2006 से 2013 तक आरकॉम में ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष के रूप में काम किया. इसके बाद 2014 से 2017 के बीच वे कंपनी में अध्यक्ष (रेगुलेटरी अफेयर्स) रहे. फिर अक्टूबर 2017 में उन्हें आरकॉम का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया और अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक वे कंपनी के गैर‑कार्यकारी निदेशक के तौर पर कार्यरत रहे. जांच में यह सामने आया है कि 2001 से 2025 के बीच आरकॉम में वरिष्ठ प्रबंधन और निदेशक पदों पर रहते हुए पुनीत गर्ग कथित तौर पर बैंक धोखाधड़ी से प्राप्त धन के अधिग्रहण, कब्जे, छिपाने, परतदार लेन‑देन (लेयरिंग) और उसे ठिकाने लगाने की गतिविधियों में शामिल रहे.

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बैंक ऋण के रूप में लिए गए सार्वजनिक धन का एक हिस्सा पुनीत गर्ग के निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया, जिसमें उनके बच्चों की विदेश में शिक्षा से जुड़े भुगतान भी शामिल हैं. ईडी ने पुनीत गर्ग को 29 जनवरी को गिरफ्तार किया था. चिकित्सा आधार पर दी गई उनकी अंतरिम जमानत याचिका फिलहाल विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में लंबित है, जिस पर सुनवाई होने की संभावना है.

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ANI
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