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This Article is From Mar 02, 2025

‘क्लाउड पार्टिकल घोटाला’: ईडी ने सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को किया गिरफ्तार

ईडी द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर दोनों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया. पिछले महीने ईडी ने इस मामले में आरिफ निसार नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.

‘क्लाउड पार्टिकल घोटाला’: ईडी ने सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को किया गिरफ्तार
ईडी की हिरासत में भेजे गए सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर.
नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कहा कि उसने एक कंपनी के प्रवर्तक दंपति को धनशोधन रोधी कानून के तहत दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर ‘‘क्लाउड पार्टिकल घोटाले'' के माध्यम से अनेक निवेशकों को धोखा दिया था. संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को बृहस्पतिवार को हिरासत में लिया गया. पंजाब के जालंधर में धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने ‘‘मास्टरमाइंड'' सुखविंदर सिंह खरौर को दस दिन के लिए और उसकी पत्नी डिंपल खरौर को पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया.

ईडी द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर दोनों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था. पिछले महीने ईडी ने इस मामले में आरिफ निसार नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.

कोर्ट ने दी ईडी को रिमांड

ईडी को खुफिया जानकारी मिली थी कि सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे है. हालांकि, उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी था, जिसके चलते उन्हें आईजीआई एयरपोर्ट पर रोका गया और बाद में PMLA  के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को जालंधर की कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सुखविंदर सिंह खरौर को 10 दिन  और डिंपल खरौर को 5 दिन ईडी की हिरासत में भेज दिया गया.

क्या है ‘क्लाउड पार्टिकल स्कैम

एजेंसी ने कहा कि व्यूनो ग्रुप का मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक सुखविंदर सिंह खरौर इस घोटाले का ‘मास्टरमाइंड' है. मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर हजारों करोड़ रुपये के ‘क्लाउड पार्टिकल घोटाले' को अंजाम दिया, जहां निवेशकों की मेहनत की कमाई को आरोपी व्यक्तियों ने अपने निजी लाभ के लिए ‘‘हड़प'' लिया.

यह घोटाला ‘सेल एंड लीज बैक मॉडल' (SLB मॉडल) पर आधारित था, जो असल में अस्तित्वहीन और फर्जी पाया गया. इसमें निवेशकों की मेहनत की कमाई को ठगकर आरोपियों ने अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया. एजेंसी के अनुसार, इन आपराधिक गतिविधियों से 3,558 करोड़ रुपये की आय अर्जित की गई और इसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया. घोटाले की राशि को व्यावसायिक उद्देश्यों के अलावा अन्य जगहों पर खर्च किया गया.

ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि घोटाले की रकम में से करोड़ों रुपये डिंपल खरौर के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए. साथ ही, यह रकम कई कंपनियों में भेजी गई. ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है और अन्य संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल की जा रही है.

लेखक के बारे में
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मुकेश सिंह सेंगर
Associate Editor - Crime & Investigation
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