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This Article is From Jul 20, 2025

दिल्ली की 'ड्रग्स क्वीन' कुसुम ने घर की खिड़की से करोड़ों की दौलत कैसे बनाई, बड़ी गजब है कहानी

कुसुम और उसके गिरोह ने अपने ड्रग ऑपरेशन को पुलिस की नजरों से बचाने के लिए पूरी तरह व्‍यवथित सिस्‍टम बना रखा था. लेकिन कहते हैं न कि पाप की उम्र आखिर कितनी लंबी होगी! कानून के लंबे हाथ ड्रग्‍स क्‍वीन के गिरेबां तक पहुंच ही गए. 

दिल्ली की 'ड्रग्स क्वीन' कुसुम ने घर की खिड़की से करोड़ों की दौलत कैसे बनाई, बड़ी गजब है कहानी
सांकेतिक तस्‍वीर
  • दिल्ली के सुल्तानपुरी में ड्रग्स क्वीन कुसुम का चार मंजिला मकान चार अलग-अलग घरों को जोड़कर बनाया गया था.
  • मकान की जेल जैसी छोटी खिड़कियों और रस्सी से जुड़े झोलों के जरिए ड्रग्स की डिलीवरी चुपचाप होती थी.
  • कुसुम के ड्रग कारोबार में नाबालिग बच्चे मुखबिर के रूप में काम करते थे और सीसीटीवी से निगरानी भी होती थी.
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नई दिल्‍ली:

Delhi Drugs Queen Exposed: पहली नजर में वह घर आपको चौंकाएगा. चार मंजिला मकान. जेल जैसी खिड़कियां. आखिर यह क्या डिजाइन है भाई! दिल्ली के सुल्तानपुरी में एक कमरे के घरों के बीच में यह मिनी हवेली जैसी थी. बाहर से देखने पर आप जिन्‍हें, 4 अलग-अलग घर समझेंगे, वो अंदर से एक मकान है. चार मकानों के भीतरी दीवारों को तोड़कर इस चार मंजिले मकान को एक बनाया गया था. दरअसल दिल्ली की 'ड्रग्स क्वीन' कुसुम (Drugs Queen Kusum) ने इसे बहुत सोच समझकर डिजाइन कराया था. खिड़कियों का राज क्या है, कैसे करोड़ों का धंधा संचालित होता था, मुखबिर तैनात रहते थे... पूरा राज जानने पर आप भी हैरान रह जाएंगे. 

दिल्ली पुलिस ने सुल्तानपुरी की ड्रग तस्कर कुसुम की करीब 4 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी जब्त की है. कुसुम से ये सारी दौलत नशे के धंधे से कमाई थी. उसकी 8 प्रॉपर्टी जब्त की गई हैं. इनमें 7 सुल्तानपुरी में और 1 रोहिणी सेक्टर 24 में है. मार्च में छापे के बाद से फरार चल रही कुसुम की कमाई में और उसके मकान की इन खिड़कियों में कनेक्शन है. जानिए क्या है.

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ड्रग्‍स क्‍वीन की मिनी हवेली 

सुल्‍तानपुरी जैसे घनी आबादी वाले इलाके में, जहां ज्‍यादातर मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं, जहां एक-एक कमरे वाले तंग मकानों की कतार है, वहां 'ड्रग्‍स क्‍वीन' कुसुम की ये 'मिनी हवेली' एकदम से अलग दिख रही थी. न केवल साइज में, बल्कि पैमाने में भी. चूंकि ये मकान, मानदंडों के भी खिलाफ था तो पुलिस ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को पत्र लिखकर इसे गिराए जाने का अनुरोध किया है.  कुसम इसी मिनी हवेली से नशे का कारोबार चला रही थी और इस दुकानदारी का तरीका ऐसा था कि बाहर से देखने पर सबकुछ सामान्‍य लगे. इस मकान से पुलिस को दो बड़ी तिजोरी भी बरामद हुई है. 

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खिड़कियों से ऐसे चलता था धंधा 

दिल्‍ली में घरों की बालकनी या खिड़कियों पर रस्‍सी से लटके झोले दिख जाना आम बात है. ऊपरी मंजिलों पर रहीं घर की महिलाएं अक्‍सर ऐसे ही रस्‍सी लगे झोले के जरिये नीचे से सामान वगैरह मंगवाया करती हैं. सडक पर सामान बेच रहे फेरी वाले, फल वाले, सब्‍जी वाले या फिर ग्रॉसरी वाले से अक्‍सर वे इन्‍हीं झोलों के जरिये सामान लेती हैं. अब कौन दूसरी, तीसरी, चौथी या ऊंची मंजिल से नीचे आए, घुटनों को तकलीफ दे.... बस उसी झोले में पैसे गिराए और फिर सामान और वापसी के खुदरे पैसे, झोले के जरिये ही उनतक पहुंचते हैं.  

अब आप सोचेंगे कि हम इतनी डिटेल में ये सब क्‍यों बता रहे. दरअसल, कुसुम के ड्रग्‍स का कारोबार भी कुछ ऐसे ही चलता था. खिड़कियों से झोले गिराए जाते थे, उनमें ड्रग्‍स की कीमत यानी पैसे मांग कर ऊपर खींचा और फिर उसी झोले में उतनी कीमत का ड्रग्‍स नीचे सरका दिया. ड्रग्स खरीदने वाला, शायद ड्रग्‍स बेचने वाले को अच्‍छे से देख भी नहीं पाता होगा! 

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कैसे-कैसे होती थी ड्रग्‍स की डिलीवरी? 

दिल्ली के सुल्तानपुरी में ड्रग क्‍वीन कुसुम का धंधा किसी जेल से कम नहीं था. पुलिस की जांच के मुताबिक, ये कोई सामान्य घर नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ड्रग कारोबार का अड्डा था, जहां बहुत ही चालाकी के साथ नशीले आइटम्‍स बेचे जाते थे.  

  • रस्सी वाले टोकरी से डिलीवरी: नीचे गली में इंतजार कर रहे ड्रग पेडलर्स (यानी नशीले पदार्थ बेचने वाले) को रस्सी से बंधे टोकरों में डाल कर ड्रग्स नीचे उतारी जाती थी.
  • छोटी खिड़कियों से भी डील: घर में जेल जैसी छोटी-छोटी खिड़कियां बनी हुई थीं, जिनका इस्तेमाल चुपचाप ड्रग्स के पैकेट सौंपने के लिए किया जाता था.
  • छोटे बच्चे करते थे मुखबिरी: इलाके के नाबालिग बच्चे सड़क पर कुसुम की 'आंखें' थे. वे पुलिस की मौजूदगी के बारे में अंदर बैठे लोगों को तुरंत जानकारी दे देते थे.
  • सीसीटीवी से निगरानी: पूरे इलाके की हर गली और आने-जाने के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से लाइव फुटेज अंदर बैठे लोगों को मिलती रहती थी, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी.
  • मुश्किल होने पर ठिकाने लगा दिए जाते थे ड्रग्स: जरा सी भी परेशानी या खतरे का अहसास होते ही, ड्रग्स को तुरंत फ्लश कर दिया जाता था या बाहर निकलने वाले रास्तों से फेंक दिया जाता था.

कुसुम और उसके गिरोह ने अपने ड्रग ऑपरेशन को पुलिस की नजरों से बचाने के लिए पूरी तरह व्‍यवथित सिस्‍टम बना रखा था. लेकिन कहते हैं न कि पाप की उम्र आखिर कितनी लंबी होगी! कानून के लंबे हाथ ड्रग्‍स क्‍वीन के गिरेबां तक पहुंच ही गए. 

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छापेमारी के बाद से फरार है कुसुम 

कुसुम इस वक्त फरार है. मार्च में जब पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा था, तब से वो लापता है. पुलिस की इस कार्रवाई में कुल 8 प्रॉपर्टी जब्त की गई हैं, जिनमें से 7 सुल्तानपुरी में और 1 रोहिणी सेक्टर 24 में है. कुसुम पर एनडीपीएस एक्ट के तहत उस पर अब तक 12 केस दर्ज हैं, जो अलग-अलग जिलों और क्राइम ब्रांच में चल रहे हैं. मार्च महीने में पुलिस की एन्टी-नारकोटिक्स टीम (आउटर जिले की) ने जब कुसुम के घर पर रेड डाली थी, तब वहां से उसका बेटा अमित गिरफ्तार हुआ. मौके से 550 पैकेट हेरोइन, ट्रामाडोल की गोलियां, 14 लाख रुपये कैश और एक स्कॉर्पियो SUV भी बरामद हुई थी.

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