Yashasvi Jaiswal's unfortunate story: कोई खिलाड़ी देश के लिए खेले आखिरी मैच में शतक बनाए, लेकिन उसका नाम अगले दौरे के लिए टीम में न हो? कोई बल्लेबाज आखिर तीन वनडे पारियों में से 2 में शतक बनाए, लेकिन उसका नाम टीम में न हो? इसे आप क्या कहेंगे? भारतीय क्रिकेट में पहले आपने ऐसा कब देखा था? यह यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) की बदनसीबी, अजीत अगरकर एंड कंपनी की खराब प्लानिंग, BCCI का मामले विशेष में कमजोर रवैया, बढ़ती प्रतिसस्पर्धा, बदलते समीकरण हैं या वक्त की जरूरत? आप इसे कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन यशस्वी जायसवाल के करोड़ों चाहने वाले और पूर्व क्रिकेटर खुलकर चर्चा जरूर कर रहे हैं कि आखिर इस लेफ्टी बल्लेबाज की गलती क्या है, जो अफगानिस्तान के खिलाफ चेन्नई में नाबाद शतक बनाने के बावजूद उनका नाम इंग्लैंड दौरे के लिए घोषित तीन वनडे मैचों की टीम में नहीं है? जायसवाल का मीडिया में न बोलना समझ में आता है, लेकिन लेकिन देश में उपलब्ध तीनों फॉर्मेटों के चुनिंदा बल्लेबाजों में से एक जायसवाल का इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में न होने पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर रहा है क्योंकि यह मामला नीति से जुड़ा हो चला है, प्लानिंग से जुड़ा हो चला है.
पहले भी शिकार, विश्व कप विजेता टीम के सदस्य, फिर ड्रॉप
वैसे जायसवाल के नाम कुछ बिना कैटेगिरी के रिकॉर्ड भी रहेंगे! यशस्वी साल 2024 में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे. मेगा टूर्नामेंट में जायसवाल को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला. वह भारत की जीत के बाद अकेले कोने में खड़े तिरंगा लहराते देखे गए, लेकिन वह तीसरे ओपनर के रूप में टीम का हिस्सा थे. लेकिन विश्व कप के बाद जायसवाल को वर्कलोड मैनेजमेंट या आराम की बात कहते हुए उन्हें ड्रॉप कर दिया गया. क्या जायसवाल ने आराम मांगा था?
🚨 BREAKING: BCCI introduces new selection rule – Perform well to get dropped! 🤡
— Cricket Central (@CricketCentrl) June 21, 2026
Jaiswal becomes the fastest Indian to score 2 ODI hundreds, smashes an unbeaten ton yesterday, and gets rewarded with an unceremonious drop! 😭👏
And Mohammed Siraj's "workload management" is so… pic.twitter.com/8aDcfZyGVm
जायसवाल बाहर, अभिषेक अंदर !
टी20 विश्व कप जीतने के बाद जिंबाब्वे के ठीक अगले दौरे में जायसवाल की जगह एकदम अभिषेक शर्मा ने ले ली. और अब तब चीफ सेलेक्टर अगरकर के बयान में नजर दौड़ा लें,
इसके अलावा, अभिषेक हमें बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज का एक अतिरिक्त विकल्प भी देते हैं, जिससे टीम का संतुलन काफी मजबूत होता है. जब आपके पास टॉप ऑर्डर में ऐसा खिलाड़ी हो जो पहली गेंद से प्रहार कर सके और गेंदबाजी भी कर सके, तो टीम कॉम्बिनेशन के लिए उन्हें चुनना जरूरी हो जाता है."
बात अगरकर की ज्यादा गलत नहीं!
पिछले कुछ सालों में खासकर भारत की 2024 में विश्व कप जीत के बाद समीकरण तेजी से बदले हैं. निश्चित तौर पर अभिषेक का स्ट्राइक-रेट शुरुआती ओवरों में उस समय जायसवाल पर भारी पड़ रहा था. हालांकि, अभिषेक का बमुश्किल ही प्रबंधन ने बतौर बॉलर इस्तेमाल किया, लेकिन यह तो एक तथ्य है ही कि जायसवाल सिर्फ और सिर्फ विशुद्ध बल्लेबाज ही हैं और यह बात उनके खिलाफ ही जाती है. तब बात बदनसीबी की नहीं, बल्कि 'परफॉरमेंस' और समग्र कौशल की भी थी. चीफ सेलेक्टर का यह तर्क समझ में आता है

अब रोहित का पेंच, या गलत प्लानिंग?
निश्चित रूप से अब अगर जायसवाल इंग्लैंड जाने वाली टीम का हिस्सा नहीं हैं, तो इस बार इस फॉर्मेट में बात कौशल की कम, बल्कि बदनसीबी की ज्यादा है. वजह है एक तरफ नियमित अंतराल पर सिर्फ वनडे ही खेल रहे 39 साल के रोहित शर्मा अगले साल फिफ्टी-फिफ्टी विश्व कप खेलने पर अड़े हैं, तो BCCI उन्हें पिछले साल कप्तानी से हटाने के बावजूद मेगा इवेंट में खिलाने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.
साफ है कि यहां कमी कौशल की नहीं, बल्कि जायसवाल को सेलेक्टरों की गलत प्लानिंग की कीमित ज्यादा चुकानी पड़ रही है, जो इस लेफ्टी बल्लेबाज के लिए बदनसीबी का सबब बनती है.
इसलिए मांजरेकर ने कह दी सेलेक्टरों से माफी की बात
जायसवाल का इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में न होना हैरानी की बात है. और यही वजह है कि संजय मांजरकेर ने बहुत बड़ी बात कह दी. मांजरेकर ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा, 'यशस्वी जायसवाल की आखिरी पारी नाबाद 116 रन की थी. और फिर भी, ये खिलाड़ी भारत के लिए नहीं खेल रहे हैं. इसके बजाय, चयनकर्ता एक ऐसे सीनियर खिलाड़ी (वेटरन) के साथ गए हैं जिसकी फिटनेस पर सवालिया निशान है, और जो साफ तौर पर आउट ऑफ फॉर्म (खराब फॉर्म में) है. अब मुझे यह समझाइए। इसके पीछे क्या तर्क है? क्या विज़न है?"
'
BCCI को लेने होंगे साहसिक फैसले?
अगर अगरकर एंड कंपनी गुरनूर बराड़ जैसे खिलाड़ी को खोजने और उसे मौका देने के लिए पीठ थपथपाए जाने की हकदार है, तो यशस्वी जायसवाल के मामले में चीफ सेलेक्टर तर्कों की कसौटी पर कमजोर पड़ते दिख रहे हैं. वहीं, अगर रोहित शर्मा को पिछले साल वनडे टीम की कप्तानी से हटाने का फैसला लिया गया होगा, तो यह भी साफ है कि यह BCCI की हरी झंडी के बाद ही लिया गया होगा. वहीं, इस फैसले के पीछे कहीं न कहीं यह भी साफ झलकता है कि रोहित शर्मा साल 2027 विश्व कप की प्लानिंग का हिस्सा नहीं ही हैं. और जब वह हिस्सा नहीं हैं, तो फिर BCCI आखिर क्यों कमजोर पड़ रहा है. क्यों खिलाड़ी विशेष से साफ-साफ यह नहीं ही कह दिया जाता- "सॉरी, अब आप हमारी प्लानिंग में फिट नहीं बैठ रहे. और आपकी वजह से एक 24 साल के खिलाड़ी का हक मारा जा रहा है, और उसके मनोबल पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है." इस मामले विशेष में हेड कोच और चीफ सेलेक्टर एक बार को 'एक पेज' पर हो सकते हैं. और अगर बात अगले स्तर तक नहीं जा पा रही, तो एकदम साफ है कि मैनेजमेंट, सेलेक्टरों और खिलाड़ी विशेष पर फैसले लेने के बीच BCCI खड़ा है. यहां भारतीय बोर्ड को न्यायिक और सही दृष्टि से देखना ही होगा.
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