भारत की सीनियर पुरुष टीम के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर मानते हैं कि टी20 फॉर्मेट में फील्डिंग के स्तर में आ रही गिरावट को ठीक करने के लिए राष्ट्रीय टीम को अपने कल्चर में पूरी तरह बदलाव की जरूरत है. श्रीधर ने यह भी कहा कि 22 अक्टूबर से शुरू होने वाले न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम में शामिल नए खिलाड़ी फील्डिंग के मामले में पूरी तरह तैयार नहीं हैं. आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में टी20 मुकाबलों में भारत की फील्डिंग का स्तर गिरा है. कैच पकड़ने की क्षमता के मामले में भारत टॉप 10 देशों में दूसरे-आखिरी स्थान पर है (73.4 प्रतिशत). टीम ने चौंकाने वाले 58 कैच छोड़े हैं. भारतीय फील्डरों ने भले ही 129 रन बचाए हों, लेकिन कैच छोड़ने और ग्राउंड-फील्डिंग की गलतियों के कारण 226 रन अतिरिक्त बने, जिससे कुल मिलाकर 97 रनों का नुकसान हुआ.
इसके अलावा, रनआउट के मौके चूकने के मामले में भारत सभी टीमों में सबसे आगे है (19 मौके चूके), जबकि टीम ने 14 रनआउट किए भी हैं. साथ ही, भारतीय विकेटकीपरों ने स्टंपिंग के पांच मौकों में से दो मौके गंवाए. न्यूजीलैंड में मैच स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे शुरू होंगे, जिसका मतलब है कि फील्डरों को कड़ाके की ठंड में मैदान पर उतरना होगा.
श्रीधर ने सोमवार को 'सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क' द्वारा आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में कहा,"फॉर्म अच्छी नहीं है. भारतीय टीम की फील्डिंग का फॉर्म, न सिर्फ पिछले कुछ मुकाबलों में, बल्कि पिछले कुछ महीनों में भी अच्छा नहीं रहा है. हमने टी20 वर्ल्ड कप जीता, लेकिन उस टूर्नामेंट में भी हम एक अच्छी फील्डिंग यूनिट के आसपास भी नहीं थे. उस सेमीफाइनल में शायद अक्षर पटेल ने ही हमें हारने से बचाया था. इसलिए हमें अपनी फील्डिंग में सुधार करने की जरूरत है."
श्रीधर ने आगे कहा,"मुझे लगता है कि फील्डिंग के मामले में और एक खास संस्कृति बनाने के मामले में अब फील्डिंग को निश्चित रूप से कम प्राथमिकता दी जा रही है. जैसा कि हम देख सकते हैं, भारतीय टीम की बैटिंग में एक कल्चर नजर आता है. इसी तरह, तेज गेंदबाजों के इस्तेमाल में भी एक साफ कल्चर है, खासकर वनडे में, जहां शुभमन गिल पिच पर जोरदार गेंदें फेंकना पसंद करते हैं, लेकिन फील्डिंग में ऐसा कल्चर नहीं दिखता."
पूर्व फील्डिंग ने आगे कहा,"चिंता की बात यह है कि टीम में आने वाले नए खिलाड़ियों की फील्डिंग क्षमता उतनी अच्छी नहीं है. कुछ तेज गेंदबाज हैं, कुछ बल्लेबाज हैं, लेकिन जो भी आ रहा है, वह कोहली, सूर्यकुमार या श्रेयस जैसा फील्डर नहीं लगता, उस पीढ़ी की बात कर रहा हूं, क्योंकि ऐसा लगता है कि उन्हें सिर्फ एक ही स्किल, यानी बैटिंग, पर तैयार किया गया है."
घरेलू क्रिकेट सिस्टम को इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए कहते हुए, श्रीधर ने जोर दिया कि हेड कोच गौतम गंभीर और फील्डिंग कोच सुभादीप घोष के नेतृत्व में मौजूदा कोचिंग स्टाफ को कैचिंग और ग्राउंड फील्डिंग के मामले में कड़े स्टैंडर्ड और जवाबदेही तय करनी होगी. उन्होंने कहा,"यह थोड़ी चिंता की बात है, लेकिन यह भारतीय टीम की चिंता का विषय नहीं है. यह पूरे सिस्टम के लिए जागने और सच्चाई को समझने का समय है. तो बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन फील्डिंग कोच के सामने इन युवा खिलाड़ियों को तुरंत मैच प्रैक्टिस के लिए तैयार करने की चुनौती होगी."
श्रीधर ने अपनी बात बढ़ाते हुए कहा,"मुझे लगता है कि वे 18 तारीख को भारत से निकलेंगे और 19 तारीख को पहुंचेंगे और 22 तारीख को उनका (टी20) मैच है, जो बहुत चुनौतीपूर्ण है. लेकिन आज के दौर में क्रिकेट तो हालात के हिसाब से ढलने के बारे में ही है, है ना? इसीलिए तो आपको इतनी मोटी रकम मिलती है. मैं यह देखने के लिए बहुत उत्साहित हूं कि भारतीय टीम कैसे हालात के हिसाब से खुद को ढालती है. हो सकता है कि वे टी20 फॉर्मेट में बहुत अच्छी तरह ढल जाएं, लेकिन जब रेड बॉल की बात आएगी, तो मामला बिल्कुल अलग होगा."
श्रीधर का मानना है कि न्यूजीलैंड के अनोखे मौसम में भारतीय फील्डिंग यूनिट की तुरंत परीक्षा होगी. उन्होंने कहा,"जैसा कि आपने कहा, न्यूजीलैंड में एक बड़ी बात शुरुआती वसंत का मौसम है. आमतौर पर, भारत जनवरी-फरवरी में न्यूजीलैंड का दौरा करता है, जब मौसम थोड़ा गर्म होने लगता है. लेकिन इस बार, शायद यह उन दुर्लभ मौकों में से एक है जब हम अक्टूबर के आखिर और पूरे नवंबर में वहां जा रहे हैं. इसलिए मुझे लगता है कि हमारे फील्डर्स को वहां के माहौल के हिसाब से खुद को ढालना होगा."
"इस साल भारत में अक्टूबर का महीना बहुत गर्म रहा है, जिसकी वजह 'सुपर अल नीनो' है. इसलिए हमारे फील्डर्स, बॉलर्स और बैटर्स को वहां के माहौल के हिसाब से काफी बदलाव करने होंगे, खासकर वेलिंगटन जैसे शहरों में खेलते समय, जहां बहुत तेज हवाएं चलती हैं. ऊंचे कैच हमेशा एक चुनौती बन सकते हैं, लेकिन अगर आप क्राइस्टचर्च के हैगली ओवल में हैं, तो यह एक बहुत ही सुंदर और हरा-भरा क्रिकेट ग्राउंड है. वहां बहुत ठंड हो सकती है, जब फील्डर्स को अपने हाथों को गर्म रखने के लिए हैंड वार्मर का इस्तेमाल करना पड़ता है, या जेब में हाथ रखने पड़ते हैं या बीच-बीच में उन्हें गर्म करना पड़ता है, लेकिन यह आसान नहीं होगा."
भारत के लिए एक अच्छी फील्डिंग यूनिट बनाने के लिए, श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली मौजूदा टी20 टीम में भी ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय होनी चाहिए. 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की लंबी तैयारी को देखते हुए, श्रीधर ने बड़े टूर्नामेंट में कैच लेने वालों के गेम-चेंजिंग असर पर जोर दिया. उन्होंने 1983 के फाइनल में कपिल देव और 2024 के टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में सूर्यकुमार यादव के शानदार कैच का जिक्र किया.
(इनपुट आईएएनएस)
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