वैभव सूर्यवंशी को हाल ही में श्रीलंका दौरे में मेजबान खिलाड़ियों द्वारा निशाना बनाए जाने का मामला अभी भी गरम है, लेकिन एक बात साफ है कि अब इस रणनीति को दुनिया की बाकी टीमें भी सूर्यवंशी के खिलाफ अमल में लाएंगी. और फिर से वैभव के धैर्य और मनोदशा की परीक्षा होगी. और विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीलंका में भारत ए के मैच के दौरान उनके आपा खोने जैसी स्थिति से बचने के लिये उन्हें स्थिति प्रबंधन प्रशिक्षण देने की जरूरत है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस समय 15 वर्ष के सूर्यवंशी की सबसे ज्यादा चर्चा है और विरोधी टीमें अब उन्हें नाकाम करने के लिये हर पैतरा आजमायेंगी. एक जाने माने मनोवैज्ञानिक का मानना है कि भारत के इस युवा बल्लेबाज को हालात का सामना करने के लिये तैयार रहना होगा.
भारत के मशहूर खेल मनोवैज्ञानिक डॉक्टर स्वरूप सावनूर ने कहा, ‘मैने दो-तीन साल पहले राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में वैभव और अंडर 16 लड़कों के समूह के साथ काम किया है. बीसीसीआई और वीवीएस लक्ष्मण की अगुवाई वाले एनसीए को इसकी अहमियत पहले से पता है और इसलिये ही खिलाड़ियों के शिविर में आने पर उनकी खेल मनोविज्ञान सेवा प्रोफाइल बनाई जाती है.' सावनूर बीसीसीआई के अलावा आईपीएल में पंजाब किंग्स , घरेलू क्रिकेट में विदर्भ और भारत की अंडर 17 फुटबॉल टीम के साथ काम कर चुके हैं . सोमवार को श्रीलंका-ए से सुपर ओवर में भारत ए की हार के बाद सूर्यवंशी की मैदान पर विपक्षी श्रीलंकाई क्रिकेटर विशेन हलाम्बागे के साथ धक्का मुक्की और बहस हो गई थी ।
सावनूर ने कहा, ‘खिलाड़ियों को उनकी मनोस्थिति समझाने और उस पर काम करने के तरीके तलाशने के लिये मैने सीओई में 18 . 19 हाई परफार्मेस शिविर लगाये हैं. इस पर और काम करने की जरूरत है क्योंकि अंडर 19 स्तर पर इतने शानदार क्रिकेटर आते हैं जो सीनियर स्तर पर उस प्रदर्शन को दोहरा नहीं पाते. हालात की समझ का विकास करना जरूरी है.' भारतीय क्रिकेट टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है जब विराट कोहली, रोहित शर्मा, आर अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे बड़े खिलाड़ियों के अलग-अलग प्रारूप से संन्यास के बाद कई युवा क्रिकेटर अपनी जगह पक्की करने की कोशिश कर रहे हैं. एक पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता ने भी मानसिक तैयारी के महत्व पर जोर दिया .
उन्होंने कहा , ‘युवा क्रिकेटरों की प्रतिभा पर कोई संदेह नहीं है लेकिन कई बार अपने कैरियर में वे कुछ रिकॉर्ड या उपलब्धियां अर्जित करने की जल्दी में होते हैं. यह खतरनाक है और इससे व्यग्रता आती है. बीसीसीआई और टीम प्रबंधन को नये खिलाड़ियों को समझाने की जरूरत है कि जल्दबाजी मत करो और हम तुम्हारे साथ हैं. इससे वे बड़े स्तर पर अच्छा खेलने के लिये तैयार होंगे.'
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