India vs Bangladesh controversy: मुस्तिफजुर रहमान के मामले पर पंगा लेना बांग्लादेश और उसके खिलाड़ियों को खासा महंगा पड़ सकता है. मतलब कुछ अग्रणी भारतीय बल्ला निर्माता कंपनियां उसके कप्तान लिटन सहित बाकी बल्लेबाजों से जारी करार खत्म कर सकती हैं. हाल ही में बांग्लादेश में कई हिंदुओं की बर्बरतापूर्ण तरीके से हुई हत्या, फिर मुस्तिफजुर रहमान के आईपीएल से बाहर किए जाने के बाद उपजे हालात के बाद ये फैसला ले सकती हैं. बहरहाल, इन कंपनियों से भारतीय सहित दुनिया के तमाम क्रिकेटर साल भर में बहुत ही मोटी कमाई करते हैं. हम आपको बताते हैं कि बल्ला निर्माता कंपनियां कैसे और किन-किन शर्तों के साथ अनुबंध करती हैं, अनुबंध का मॉडल क्या होता है..वगैरह..वैगरह. यही वो अनुबंध या उनकी शर्तें हैं, जिनके आधार पर बड़ी- बड़ी कंपनियां जैसे MRF विराट कोहली, शुभमन गिल से कॉन्ट्रैक्ट करती हैं या पूर्व में सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज क्रिकेटर से सालाना करार करती आई हैं.

1. अनुबंध की फिक्स राशि मिलती है
किसी भी खिलाड़ी के साथ सालाना अनुबंध की एक तय रकम फिक्स होती है. और अनुबंध की बाकी 30 प्रतिशत राशि उसके प्रदर्शन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं और बातों पर निर्भर करती है. मतलब उदाहरण के तौर पर अगर कोई भारतीय ए स्टार क्रिकेटर (कोहली या गिल) किसी कंपनी से सालाना पांच करोड़ रुपये फीस वसूलता है, तो उसे इसकी तय 70 प्रतिशत रकम मिलेगी. मतलब खिलाड़ी विशेष तो 3.5 करोड़ रुपये मिलेंगे. और इस रकम का भुगतान साल में 3-4 किश्तों में किया जाता है. और खिलाड़ी को अनुबंध के तहत सभी आधिकारिक मैचों और जहां भी कैमरे लगे होंगे, वहां ट्रेनिंग में बल्लों का इस्तेमाल किया जाता है.

2. बड़े या आईसीसी टूर्नामेंटों में बोनस रकम
अगर खिलाड़ी विशेष बड़े टूर्नामेंटों में खेलता है, तो उसे अनुबंध की 15 प्रतिशत राशि बोनस रकम के रूप में मिलती है. यह करीब 75 लाख रुपये होती है. खिलाड़ी विशेष के विश्व कप, आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट, टीम के सेमीफाइनल या फाइनल में पहुंचने, प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट या कुछ ऐसा ही पुरस्कार जीतने पर यह बोनस राशि दी जाती है.

3. कंपनी विशेष के लिए विज्ञापन शूट करना
अगर खिलाड़ी कंपनी के प्रोडक्ट के विज्ञापन शूट में हिस्सा लेता है, तो इसके लिए उसे अनुबंध का 10 प्रतिशत अलग से मिलता है. यह रकम करीब 50 लाख रुपये होती है. इसके तहत खिलाड़ी विशेष को हर साल 2-3 विज्ञापन शूट में हिस्सा लेने के अलावा, सोशल मीडिया अभियान (पोस्ट करना, रील बनाना आदि), डीलर से मुलाकात, इवेंट्स में हिस्सा लेना आदि शामिल है.
4. परफॉरमेंस पर इंसेंटिव
अगर खिलाड़ी विशेष कंपनी के लोगो लगे बल्ले से शानदार प्रदर्शन करता है, तो उसे 5 प्रतिशत इंसेटिव भी मिलता है. यह अलग-अलग और खिलाड़ी की ब्रांड वेल्यू के हिसाब से भी हो सकता है. मसलब अर्द्धशतक के लिए अलग, तो शतक के लिए ज्यादा प्रतिशत. बल्ले से प्लेयर ऑफ द सीरीज के लिए और ICC टूर्नामेंटों में प्लेयर ऑफ द मैच बनने पर

5. नॉन-कैश प्रोड्क्ट कॉन्ट्रैक्ट !
इसके तहत खिलाड़ी विशेष को पैसे की जगह सामाना दिया जाता है.अनुबंध के तहत कई बल्ले, पैड्स ग्लव्स और जो भी खिलाड़ी विशेष को जरूरत हो, उसे दिया जाता है. इस सामान की कीमत सालना 5 से 15 लाख रुपये हो सकती है.

6. एजेंट का कमीशन!
खिलाड़ी विशेष का कंपनी से अनुबंध कराने वाले एजेंट अपना 15 से 15 से 25 प्रतिशत कमीशन लेता है. इसे ऐसे समझें कि अगर खिलाड़ी विशेष का अनुबंध 5 करोड़ रुपये का है, तो एजेंट की फीस 50 से 75 लाख रुपये तक ही हो सकती है. कुछ मामलों में एजेंट फीस करोड़ रुपये से भी ऊपर चली जाती है.
यह भी पढ़ें:
सिर्फ बल्ले पर लोगो से करोड़ों! जानिए टॉप 6 भारतीय क्रिकेटरों की सालाना कमाई
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं