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कतर ने किया गैस का शटडाउन, एक्सपर्ट ने बताया अब भारत के पास क्या हैं विकल्प?

QatarEnergy LNG crisis: कतर के एलएनजी उत्पादन रोकने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने से भारत के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है. प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. किरीट पारिख ने गैस की बचत के साथ दूसरे सोर्स के इस्तेमाल पर जोर दिया है.

कतर ने किया गैस का शटडाउन, एक्सपर्ट ने बताया अब भारत के पास क्या हैं विकल्प?

QatarEnergy LNG crisis: ग्लोबल पावर मार्केट से एक ऐसी खबर आई जिसने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. दुनिया के सबसे बड़े गैस एक्सपोर्ट सेंटर कतरएनर्जी ने एलएनजी उत्पादन रोकने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव की वजह से कार्गो जहाजों की आवाजाही बंद है. ऐसे में भारत, जो अपनी जरूरत की 50% गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात करता है, अब एक बड़े संकट की दहलीज पर खड़ा है.

QatarEnergy LNG crisis

QatarEnergy LNG crisis

खपत कम करना ही सिर्फ एक ऑप्शन

भारत के प्रमुख तेल और गैस अर्थशास्त्री डॉ. किरीट पारिख ने एनडीटीवी से बातचीत में स्थिति की गंभीरता की तरफ संकेत दिया. उन्होंने कहा कि भारत के कुल एलएनजी आयात का लगभग 20% हिस्सा अकेले कतर से आता है. कुल आयातित गैस में कतर की हिस्सेदारी करीब 40% है. अब समय आ गया है कि भारत गैस के इकोनॉमिक इस्तेमाल की ओर बढ़े. हमें विशेष रूप से पावर सेक्टर और उद्योगों में गैस की खपत को कम करना होगा.

बिजली और हाइड्रोजन प्रोडक्शन पर पड़ेगा सीधा असर

गैस की कमी का सबसे बड़ा असर बिजली प्रोडक्शन और इंडस्ट्री यूनिट्स पर पड़ने की आशंका है. डॉ. पारिख ने इस संकट से निपटने के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं-

  • गैस की कमी को पूरा करने के लिए बिजली क्षेत्र में कोयले का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है. हालांकि इससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी, जिसका बोझ आम नागरिक पर पड़ सकता है.
  • अभी के समय में पेट्रोलियम कंपनियां हाइड्रोजन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर गैस का उपयोग करती हैं. इसे बिजली के जरिए भी बनाया जा सकता है, लेकिन यह ऑप्शन बहुत ही महंगा साबित होगा.
  • जिन इंडस्ट्री के लिए गैस एक क्रिटिकल रिसोर्स है, उन्हें अब अपने ऑपरेशन प्लानिंग को बदलना होगा.

क्या होगा आगे?

भारत के पास बिजली उत्पादन की अच्छी क्षमता तो है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर यह महंगा सौदा साबित होने वाला है. भारतीय खरीदार अब दूसरे सोर्स की तलाश में हैं, लेकिन ग्लोबल मार्केट में बढ़ती मांग और सप्लाई चेन की रुकावट ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है.

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