T20 World Cup 2026 में करीब दस दिन पहले दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट विद्वान ने शायद ही सोचा होगा कि ऑस्ट्रेलियाई का वर्ल्ड कप 2026 में ऐसा हाल होगा. सोमवार की समाप्ति के बाद वर्ल्ड कप में खुद को जिंदा रखने के लिहाज से कंगारू 'वेंटिलटेर' पर थे. यहां से उसके क्वालीफाई करने के करीब 20 प्रतिशत ही आसार बचे थे और यह बहुत ज्यादा जटिल थे. और आज मंगलवार को जिंबाब्वे और ऑयरलैंड के बीच मुकाबला पूरी तरह बारिश से धुलने के बाद ऑस्ट्रेलिया का हैरतअंगेज रूप से टी20 विश्व कप से पत्ता साफ हो गया. यही इस फॉर्मेट की ब्यूटी है. वर्ल्ड कप में खुद को जिंदा रखने की सबसे जरूरी कोशिशों की लड़ाई में सोमवार को पल्लेकल में सहायक मेजबान श्रीलंका ने कंगारुओं को पल्लेकल में 8 विकेट से पीटकर लगभग विश्व कप के दरवाजे पर ला खड़ा किया था. पिछले मैच में कंगारुओं के लिए ब्लेसिंग मुजरबानी सबसे बड़े दुश्मन साबित हुए थे, तो सोमवार की रात श्रीलंकाई ओपनर पथुम निसानका ने 52 गेंदों पर 10 चौकों और 5 छक्कों से ऑस्ट्रेलियाई टीम और उनके चाहने वालों की मुस्कान छीन ली. यह 17 के वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले ही राउंड में बाहर हो गई. आखिरी बार कंगारू साल 2009 में विश्व कप के पहले ही राउंड में बाहर हुए थे.
जोर का झटका, हाय जोरों से लगा!
दो-तीन पहले ही कंगारुओं के जायके को जिंबाब्वे ने ऐसा कड़वा किया कि श्रीलंका से मिली 8 विकेट से हार तक आते-आते यह और गहरा गया. श्रीलंका के धीमे विकेट कंगारुओं के मानो धीमा जहर बन गए. ऐसे में न जिंबाब्वे के खिलाफ न बाद में बैटिंग करते बात नहीं और न ही श्रीलंका के खिलाफ पहले. दोनों ही मैचों में उसके बल्लेबाज रन बनाने लिए जूझते रहे. हैरानी की बात जिंबाब्वे के खिलाफ किसी स्पिनर का नहीं, बल्कि मीडियम पेसर मुजरबानी का प्रदर्शन रहा जिन्होंने चार ओवर में 17 रन पर 4 विकेट चटकाकर कंगारुओं को नॉकआउट कर दिया.
कैमरून ग्रीन, टिम डेविड रनों को तरसे
जिंबाब्वे के खिलाफ कैमरून ग्रीन और टिम डेविड खाता तक नहीं खोल सके, तो इनका कुछ ऐसा ही हाल श्रीलंका के खिलाफ हुआ. घर में धीमी पिचों के मास्टर बल्लेबाजों के खिलाफ एडम जंपा विकेट लेने के लिए तरस गए. कुल मिलाकर श्रीलंका के खिलाफ हार एक बार को समझ में आती है, लेकिन यह जिंबाब्वे का मैच था, जिसने कंगारुओं को वह जख्म दे दिया है, जहां से क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के आकाओं को बहुत कुछ सोचना होगाा
धीमी पिचों पर एडम जंपा को पड़े विकेट के लाले
श्रीलंका की पिचें स्पिनरों की मददगार मानी जाती हैं, लेकिन एडम जंपा जिंबाब्वे के खिलाफ एक भी विकेट नहीं ले सके, जो बहुत ही हैरानी की बात रही. श्रीलंका के खिलाफ तो जंपा एक कदम आगे चले गए. उन्होंने बिना कोई विकेट लिए चार ओवरों में 41 रन खर्च कर डाले. साफ है कि कंगारू रणनीति को लेकर ओवर कॉन्फिडेंट रहे और उन्होंने बॉलिंग अटैक की खामी की भरपाई बैटिंग के बूते अपनाई, लेकिन बल्लेबाजों की नाकामी के कारण यह रणनीति नाकाम हो गई.
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