भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और स्टार ओपनर स्मृति मंधाना का बेबाक अंदाज फैंस को काफी पसंद आता है. क्रिकेट के मैदान से बाहर भी उनकी तस्वीरें और वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. यही वजह है कि कई फैंस उन्हें 'भारत की नेशनल क्रश' भी कहते हैं. इस बीच स्मृति का एक पुराना वीडियो फिर से चर्चा में है, जिसमें उन्होंने खुलकर बताया कि वह अपने जीवनसाथी में कैसी खूबियां देखना चाहती हैं.
दरअसल, केबीसी के एक एपिसोड में स्मृति मंधाना से एक फैन ने सवाल किया, 'आपके सोशल मीडिया पर बहुत सारे फॉलोअर्स हैं और देश के कई युवा आपको फॉलो करते हैं. ऐसे में आप एक लड़के में कौन-सी क्वालिटीज देखती हैं?' यह सवाल सुनते ही स्मृति अपनी हंसी नहीं रोक पाईं और कुछ सेकंड तक मुस्कुराती रहीं. इसके बाद उन्होंने अपने दिल की बात शेयर की.
स्मृति ने कहा, 'लड़का अच्छा हो.' उनके इतना कहते ही शो के होस्ट अमिताभ बच्चन ने पूछा, 'अच्छे का मतलब क्या होता है?' इस पर मंधाना ने जवाब दिया, 'वह केयर करने वाला हो और मेरे खेल को समझने वाला हो. क्योंकि मैं उसे उतना समय नहीं दे पाऊंगी, इसलिए उसका समझदार होना और हमेशा परवाह करना मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी है.'
बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन ने स्मृति से उनकी क्रिकेट यात्रा के बारे में भी पूछा. इस पर उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनके घर में क्रिकेट का माहौल था. उनके पिता और भाई दोनों क्रिकेट खेलते थे. पिता का सपना था कि उनके बच्चे क्रिकेट खेलें और उनमें से कोई एक भारत का प्रतिनिधित्व करे. स्मृति ने कहा कि बचपन में वह अक्सर अपने भाई की प्रैक्टिस के दौरान गेंदें उठाती थीं और नेट्स के पीछे खड़े होकर उन्हें बल्लेबाजी करते देखती थीं. उनका भाई बाएं हाथ से बल्लेबाजी करता था, इसलिए उन्होंने भी उसी तरह खेलना सीख लिया.
स्मृति ने यह भी बताया कि जब उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, तब लड़कियों के लिए ज्यादा अवसर नहीं थे और उन्हें ज्यादातर लड़कों के साथ प्रैक्टिस करनी पड़ती थी. हालांकि, उनके माता-पिता ने कभी भी समाज की बातें उन तक नहीं पहुंचने दीं. उन्होंने हमेशा उन्हें खुलकर खेलने की आजादी दी और हर कदम पर उनका साथ दिया.
इस दौरान अमिताभ बच्चन ने भी स्मृति के माता-पिता की तारीफ करते हुए कहा कि महिलाओं को भी उतने ही अवसर मिलने चाहिए जितने पुरुषों को मिलते हैं. स्मृति ने बताया कि उनके माता-पिता को अक्सर लोगों के ताने सुनने पड़ते थे. लोग कहते थे, 'लड़की को क्रिकेट खेलने क्यों भेज रहे हो? धूप में काली हो गई तो शादी कौन करेगा?' लेकिन उनके माता-पिता ने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने हमेशा अपनी बेटी की पसंद और सपनों को प्राथमिकता दी, जिसका नतीजा आज पूरी दुनिया देख रही है.'
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