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चयनकर्ता, कप्तान संगकारा मना करते रहे, मुरलीधरन नहीं माने, फिर वह किया, जो 148 साल में कोई नहीं कर सका

कुछ कारनामे इतने बड़े होते हैं कि वास्तव में इनकी कोई रिकॉर्डबुक नहीं होती, लेकिन अपने आप में इतिहास बन जाते हैं. और मुरलीधरन ने जो भारत के खिलाफ किया, वह रिकॉर्डबुक से कहीं ऊपर के ब्रैकेट में जमा हो गया

चयनकर्ता,  कप्तान संगकारा मना करते रहे, मुरलीधरन नहीं माने, फिर वह किया, जो 148 साल में कोई नहीं कर सका
श्रीलंकाई दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन
Source: Social media

Muttiah Muralitharan made impossible possible: कुछ बातें किसी भी खेल में ऐसी होती हैं, जो किसी रिकॉर्डबुक में नहीं होती, लेकिन जब बोती हैं, ये अपने आप में इतिहास बन जाती हैं. और कुछ ऐसा ही श्रीलंका के पूर्व महान बॉलर मुथैया मुरलीधरन के साथ हुआ. दरअसल साल 2010 में मुरलीधरन गॉल में आखिरी टेस्ट मैच खेल रहे थे. और इस टेस्ट से पहले मुरलीधरन के 792 विकेट थे, लेकिन मुरली ने पहले ही कह दिया, 'यह उनका आखिरी टेस्ट है.' तब कप्तान कुमार संगाकारा और चयनकर्ता इस दिग्गज ऑफ स्पिनर से पूरी सीरीज में खेलने की अपील करते रहे कि उनके सामने सवाल 800 विकेट का है, लेकिन मुरलीधरन अपना फैसला पलटने से टस से मस नहीं हुए. 

कप्तान कुमार संगाकारा का प्रस्ताव

संगाकारा और चयनकर्ताओं ने मैच से पहले मुरलीधरन से गुजारिश की कि वे पूरी 3-मैचों की टेस्ट सीरीज खेलें. उनका मानना था कि अगर वह पहले मैच में 8 विकेट नहीं ले पाते हैं, तो अगले दो मैचों में उनके पास 800 का आंकड़ा छूने का पूरा मौका रहेगा, लेकिन मुरलीधरन न तो कप्तान के प्रस्ताव को स्वीकार किया, न ही चयनकर्ताओं की बात मानी. 

मैच से पहले मुरली का बड़ा ऐलान

मुरलीधरन ने संन्यास लेने का फैसला तो नहीं बदला, लेकिन उन्होंने पूर्व संध्या पर बड़ा ऐलान कर दिया, 'अगर मैं इस मैच में 8 विकेट लेता हूं, तो न केवल मेरे 800 विकेट होंगे, बल्कि हम यह टेस्ट भी जीतेंगे. अगर मैं विकेट नहीं ले पाता, तो कोई बात नहीं, लेकिन यह मेरा आखिरी टेस्ट हैं. मैं 792 (या 800 से कम) पर ही खुश रहूंगा धन्यवाद. मैं 8 विकेट लेने जा रहा हूं.'

जो मुरली ने दुनिया से कहा, सच कर दिखाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुरलीधरन ने जो पूरी दुनिया से कहा, वह इस महान बॉलर ने सच कर दिखाया. उन्होंने पहली पारी में सचिन तेंदुलकर को मिलाकर 63 रन देकर 5 विकेट लिए, तो दूसरी पारी में उन्होंने 3 विकेट चटकाए. नुरली ने आखिरी विकेट लेफ्टआर्म स्पिनर प्रज्ञान ओझा का था. इस प्रदर्शन से मुरली ने न केवल 800 विकेट पूरे किए, बल्कि श्रीलंका ने 10 विकेट से मैच जीता. 

आखिरी विकेट का रोमांचक मोड़

मुरलीधरन को जब 800वें विकेट के लिए मुरलीधरन को अंतिम 1 विकेट की दरकार थी, लेकिन भारतीय निचले क्रम और दूसरे श्रीलंकाई गेंदबाजों की वजह से ड्रामा बढ़ गया. भारत का 9वां विकेट मलिंगा ने ले लिया, जिससे मुरली के लिए केवल 1 ही मौका बचा. भारत के आखिरी दो बल्लेबाज प्रज्ञान ओझा और वीवीएस लक्ष्मण थे. लक्ष्मण रन आउट हो गए, जिससे मैदान पर सिर्फ प्रज्ञान ओझा और इशांत शर्मा बचे. मुरलीधरन लगभग 23-24 ओवरों से लगातार गेंदबाजी कर रहे थे, लेकिन अंतिम विकेट नहीं मिल रहा था. 

बहरहाल मैच के 5वें और अंतिम दिन, भारत की दूसरी पारी के 115वें ओवर में वह ऐतिहासिक क्षण आया. मुरलीधरन की ऑफ-स्पिन गेंद ओझा के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर सीधे लेग स्लिप/फर्स्ट स्लिप में खड़े माहेला जयवर्धने के हाथों में चली गई. इसी के साथ ही मुरलीधरन ने वह कर दिखाया, जो शायद ही टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत से लेकर अभी तक कभी किसी गेंदबाज ने 148 साल के इतिहास में किया हो. मतलब कह कर करियर के आखिरी टेस्ट में 8 विकेट लेना. 

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Muttiah Muralitharan, Kumar Sangakkara, India, Sri Lanka, Cricket
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