- भारतीय बल्लेबाज श्रेयस अय्यर को पिछले साल अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर स्प्लीन इंजरी हुई थी, जो दर्दनाक थी
- चोट लगने के बाद अय्यर को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, तब उन्हें चोट की गंभीरता का पता चला
- अय्यर ने विजय हजारे ट्रॉफी में प्रभावशाली प्रदर्शन कर न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चयन पाया
Shreyas Iyer on Injury: भारतीय बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने स्प्लीन इंजरी से जुड़े अनुभव साझा करते हुए इसे 'बेहद दर्दनाक' बताया है. अय्यर पिछले साल अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर फील्डिंग के दौरान चोटिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें लंबे वक्त तक क्रिकेट मैदान से दूर रहना पड़ा. इसके बाद अय्यर ने घरेलू क्रिकेट के साथ क्रिकेट मैदान पर वापसी की. उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में 82 और 45 रन की पारियां खेलीं, जिसके बाद उन्हें न्यूजीलैंड के विरुद्ध वनडे सीरीज के लिए चुना गया. अय्यर ने सीरीज के पहले मैच में 49 रन बनाए, जिसकी मदद से टीम इंडिया ने मुकाबला अपने नाम किया.
'जब हॉस्पिटल में एडमिट किया गया'
अय्यर ने राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में दूसरे वनडे से पहले ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में कहा,"यह दर्दनाक था, बहुत ज्यादा दर्दनाक. मुझे एहसास नहीं हुआ कि वह चोट कितनी गंभीर थी. मुझे पता नहीं चला कि स्प्लीन हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह एक अंग है. मुझे तो इस शब्द के बारे में पता भी नहीं था. फिर अगले दिन जब मुझे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, उसके बाद मुझे एहसास हुआ कि यह एक गंभीर चोट थी. उस दिन मुझे 'स्प्लीन' शब्द के बारे में पता चला."
अय्यर ने बताया कि रिकवरी प्रोसेस ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया. उन्होंने कहा,"इस प्रोसेस में लगा कि मुझे खुद को थोड़ा समय देना होगा, खुद पर ज्यादा जोर नहीं डालना होगा क्योंकि मैं ऐसा इंसान हूं जो एक जगह बैठ नहीं सकता. मैं कुछ न कुछ करता रहना चाहता हूं. लेकिन इस चोट ने खासकर मुझे खुद पर सोचने, तरोताजा होने और जितना हो सके आराम करने का समय दिया. ऐसा नहीं है कि आप उठकर तुरंत वर्कआउट शुरू कर दें. मुझे बताया गया था कि छह से आठ हफ्तों में आप सामान्य हो जाएंगे, जिसके बाद ट्रेनिंग शुरू कर सकते हैं. इसलिए मैंने बस सही गाइडलाइंस फॉलो कीं."
'स्वाभाविक है बड़े शॉर्ट की कोशिश'
जब उनसे पूछा गया कि क्या वापसी के बाद से वह बड़े शॉट्स के लिए ज्यादा कोशिश कर रहे हैं, तो अय्यर ने कहा कि यह जानबूझकर नहीं बल्कि स्वाभाविक था. उन्होंने कहा,"सच कहूं तो, मैं कुछ भी करने की कोशिश नहीं कर रहा हूं. यह बस मेरी मूल प्रवृत्ति है. मैं नेट्स में जितनी ज्यादा प्रैक्टिस करता हूं, मैच में खेलना उतना ही आसान हो जाता है. नेट्स में भी, मैं यह तय नहीं करता कि किसी खास एरिया को टारगेट करूंगा या बॉलर्स पर अटैक करूंगा. मुझे उस पल में रहना पसंद है और मैंने तय किया है कि अगर गेंद मेरे एरिया में आएगी, तो मैं उस पर अटैक करूंगा."
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