
शशांक मनोहर (फाइल फोटो)
मुंबई:
आईपीएल-9 में मैदान पर आठ टीमें मुकाबले के लिए उतरेंगी, लेकिन इनमें से दो का रंग-रोगन, नाम-पता बिल्कुल नया होगा। ये दोनों टीमें राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के निलंबन की वजह से मैदान पर उतरेंगी। लोढ़ा कमेटी के फैसले पर रविवार को बीसीसीआई वर्किंग कमेटी ने औपचारिक मुहर लगा दी।
बीसीसीआई में शशांक मनोहर की सल्तनत वापस आते ही बदलाव की बयार दिखने लगी है। बीसीसीआई वर्किंग कमेटी की पहली बैठक में फैसला हो गया कि चेन्नई और राजस्थान की जगह आईपीएल में दो सालों के लिए दो नई टीमें आएंगी। दूसरी सबसे अहम बात ये रही कि पहली पारी में छवि पर सवाल उठाने वाली पेप्सी के साथ समझौते की सारी गुंजाइश खत्म हो गईं। चीन की मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कंपनी वीवो को बाकी बचे 2 सालों के लिए पहले के करार के नियमानुसार आईपीएल टाइटल स्पॉन्सर चुन लिया गया।
इसके अलावा बीसीसीआई में बड़े बदलावों पर चर्चा हुई, जिसमें सबसे अहम था हितों का टकराव। प्रस्ताव आया किसी भी पदाधिकारी का रिश्तेदार क्रिकेट के कारोबार से सीधे या परोक्ष तरीके से नहीं जुड़ेगा, कोई क्रिकेटर खिलाड़ियों की नुमाइंदगी करने वाली एजेंसी में हिस्सेदार नहीं रहेगा, किसी एसोसिएशन की मैनेजिंग कमेटी के सदस्यों का चयन, बतौर राष्ट्रीय चयनकर्ता नहीं होगा, बीसीसीआई अध्यक्ष की चयन में वीटो पावर खत्म होगी, कमेंट्री करने वाले एक्सपर्ट बीसीसीआई से संबंधित नहीं रहेंगे।
फिलहाल सारे एसोसिएशन इन प्रस्तावों को पढ़ रहे हैं, उम्मीद है 9 नवंबर को होने वाली बोर्ड की वार्षिक आम बैठक में इन बदलावों पर मुहर लग सकती है।
बीसीसीआई में शशांक मनोहर की सल्तनत वापस आते ही बदलाव की बयार दिखने लगी है। बीसीसीआई वर्किंग कमेटी की पहली बैठक में फैसला हो गया कि चेन्नई और राजस्थान की जगह आईपीएल में दो सालों के लिए दो नई टीमें आएंगी। दूसरी सबसे अहम बात ये रही कि पहली पारी में छवि पर सवाल उठाने वाली पेप्सी के साथ समझौते की सारी गुंजाइश खत्म हो गईं। चीन की मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कंपनी वीवो को बाकी बचे 2 सालों के लिए पहले के करार के नियमानुसार आईपीएल टाइटल स्पॉन्सर चुन लिया गया।
इसके अलावा बीसीसीआई में बड़े बदलावों पर चर्चा हुई, जिसमें सबसे अहम था हितों का टकराव। प्रस्ताव आया किसी भी पदाधिकारी का रिश्तेदार क्रिकेट के कारोबार से सीधे या परोक्ष तरीके से नहीं जुड़ेगा, कोई क्रिकेटर खिलाड़ियों की नुमाइंदगी करने वाली एजेंसी में हिस्सेदार नहीं रहेगा, किसी एसोसिएशन की मैनेजिंग कमेटी के सदस्यों का चयन, बतौर राष्ट्रीय चयनकर्ता नहीं होगा, बीसीसीआई अध्यक्ष की चयन में वीटो पावर खत्म होगी, कमेंट्री करने वाले एक्सपर्ट बीसीसीआई से संबंधित नहीं रहेंगे।
फिलहाल सारे एसोसिएशन इन प्रस्तावों को पढ़ रहे हैं, उम्मीद है 9 नवंबर को होने वाली बोर्ड की वार्षिक आम बैठक में इन बदलावों पर मुहर लग सकती है।
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