पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ऑस्ट्रेलियाई इतिहास के सबसे सफलतम तेज गेंदबाजों में से एक रहे हैं. इस कंगारू तेज गेंदबाज ने छह बार कि विश्व विजेता के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 718 विकेट झटके हैं. 1999 में अपना टेस्ट डेब्यू करने के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. हालांकि, ली परिवार से अकेले ब्रेट नहीं थे, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला था, बल्कि उनके बड़े भाई ने उनसे पहले ही कंगारू टीम के लिए ना सिर्फ डेब्यू किया था, बल्कि रातों रात स्टार भी बन गए थे.
घरेलू सर्किट में अपनी पावरहिटिंग बल्लेबाजी से सुनहरे बालों वाले शेन ली लंबे समय तक चयनकर्ताओं की नजर में बने हुए थे. शेन ली ने जूनियर स्तर से ही अपनी बैटिंग से चर्चाओं में रहे. इसी के चलते उन्हें 1991-92 में ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम में जगह मिली थी. शेन ली ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते तो थे ही, तेज गेंदबाज भी थे. ऐसे में सेलेक्टर्स उन्हें एक ऑल-राउंडर के रूप में देख रहे थे, जो निचले क्रम पर आकर तेजी से रन बटोर सके. अंडर-19 टीम में आने के बाद शेन ली ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतत: उन्हें ऑस्ट्रेलियाई सीनियर टीम का बुलावा मिला.
शेन ली ने दिसंबर 1995 में अपना डेब्यू किया था. वेस्टइंडीज के खिलाफ इस मैच में इस मुकाबले में सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आने के बाद उन्होंने 144.44 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. 27 गेंदों में उन्होंने 39 रन बनाए. इस पारी ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया. 1996 में वर्ल्ड कप होना था, और चयनकर्ताओं ने इसे कारण शेन ली पर दांव लगाया था. डेब्यू मैच में उनकी इस मैच जिताऊ पारी ने चनयकर्ताओं को भरोसा दिया कि वह उनके काम कर सकते हैं.
शेन ली ने इसके बाद 1996 में समरसेट के लिए काउंटी क्रिकेट में एक बेहदर शानदार सीजन दिया. उनका औसत अपनी टीम के सभी बल्लेबाजों में ज्यादा था. इसके बाद उन्हें वर्ल्ड कप में मौका मिला. भारत-पाकिस्तान और श्रीलंका की मेजबानी में हुए इस वर्ल्ड कप के लिए जब ली को चुना गया था, उनकी उम्र सिर्फ 22 साल थी और उनके पास सिर्फ 6 मैचों का अनुभव था.
हालांकि, शेन ली वर्ल्ड कप में सिर्फ 9 रन बना पाए थे. भारत के खिलाफ उन्होंने 10 गेंदों का सामना किया था और 9 रन बनाकर आउट हुए थे. जबकि जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी बैटिंग ही नहीं आई थी. शेन ली ने जैसा प्रदर्शन डेब्यू में किया था, उसके अगले सात मैचों में वह उसे दोहरा नहीं पाए. इन मैचों में वह दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए थे. ऐसे में उन्हें ड्रॉप किया गया.
दो साल टीम से बाहर रहने के बाद उन्होंने वापसी जरूर की. लेकिन इस बार गेंदबाजी से. उनके करियर चोटों से प्रभावित रहा और अधिक आगे नहीं बढ़ पाया. 1999 वर्ल्ड कप टीम में भी ली जगह बनाने में सफल हुए थे, लेकिन इस दौरान भी ऐसा ही हुआ. एक मैच खेले, एक में बैटिंग नहीं आई. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 1999-2000 में घरेलू मैदान पर जबरदस्त प्रदर्शन किया था और शेन ली ने उनकी सटीक और समझदारी भरी बॉलिंग से सबको प्रभावित किया. जुलाई 2000 में उन्हें अपने राज्य का कैप्टन भी बनाया गया और उन्होंने 13 फर्स्ट-क्लास और 14 वन-डे मैचों में ब्लूज़ को लीड किया.
लगातार चोट और फ्लॉप प्रदर्शन के बाद आखिरकार शेन ली को कंगारू टीम में कभी वापसी नहीं हो पाई. अपने करियर के दौरान उन्होंने कुल 45 वनडे खेले और सिर्फ 477 रन बनाए. 95.39 की स्ट्राइक रेट से. वह एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए थे. 29 साल की उम्र में घुटने की चोट की वजह से ही इस खिलाड़ी ने 2003 में अपने करियर को अलविदा कह दिया था.
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