15 नवंबर 1989 को कराची के नेशनल स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच खेला गया. यह मुकाबला क्रिकेट इतिहास के सबसे खास मैचों में गिना जाता है, क्योंकि इसी मैच से 16 साल के सचिन तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी. लेकिन इस मैच में एक और भारतीय तेज गेंदबाज सलिल अंकोला ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था.
सचिन तेंदुलकर ने आगे चलकर 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए, वहीं, सलिल अंकोला के टेस्ट करियर की शुरुआत और अंत एक ही मैच में हो गया. अंकोला के लिए यह कहानी इसलिए ज्यादा दर्दनाक थी, क्योंकि उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में जगह बनाई थी.
घरेलू क्रिकेट में मचाया तहलका
सलिल अंकोला ने 1988-89 सीजन में महाराष्ट्र के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था. अपने शुरुआती मैचों में ही उन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी से सबका ध्यान खींच लिया. गुजरात के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने छह विकेट लेने के साथ 43 रन भी बनाए और इसी दौरान हैट्रिक भी पूरी की. इसके बाद बड़ौदा के खिलाफ उन्होंने 6/51 का शानदार प्रदर्शन किया. अपने पहले ही फर्स्ट क्लास सीजन में अंकोला ने 27 विकेट झटके. उनका गेंदबाजी औसत 20.18 रहा और उन्होंने तीन बार पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट लिए.
पाकिस्तान दौरे पर मिली टीम इंडिया में जगह
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन का इनाम अंकोला को 1989 में पाकिस्तान दौरे के लिए भारतीय टीम में चयन के रूप में मिला. यह वह दौर था जब पाकिस्तान के पास इमरान खान, वसीम अकरम और उभरते हुए वकार यूनिस जैसे खतरनाक गेंदबाज मौजूद थे. टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले अंकोला ने दौरे के एक अभ्यास मैच में भी अपनी गेंदबाजी का दम दिखाया. BCCP Patron's XI के खिलाफ उन्होंने पहली पारी में 6/77 और दूसरी पारी में दो विकेट लिए. इसके बाद कराची टेस्ट में उन्हें भारत की प्लेइंग इलेवन में जगह मिल गई.
डेब्यू टेस्ट में लिए सिर्फ दो विकेट
कराची टेस्ट में अंकोला ने अपना पहला टेस्ट विकेट सलीम मलिक का लिया. मलिक को मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 36 रन के स्कोर पर कैच किया. इसके बाद पाकिस्तान की दूसरी पारी में अंकोला ने विकेटकीपर सलीम यूसुफ को आउट किया. इस तरह अपने पहले और आखिरी टेस्ट में अंकोला ने कुल दो विकेट लिए. चोट के कारण वह पाकिस्तान के खिलाफ बाकी टेस्ट मैचों से बाहर हो गए. शुरुआत में यह महज एक सीरीज से बाहर होना लगा, लेकिन बाद में यही चोट उनके टेस्ट करियर के अंत की वजह बन गई.
टेस्ट टीम में दोबारा जगह नहीं मिलने के बावजूद अंकोला का अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर पूरी तरह खत्म हो गया, हालांकि, इसी पाकिस्तान दौरे पर उन्होंने वनडे डेब्यू किया और अगले कुछ सालों तक भारतीय वनडे टीम में आते-जाते रहे. लगातार होने वाली चोटें हालांकि उनके करियर की सबसे बड़ी परेशानी बन गईं.
28 साल की उम्र में खत्म हो गया क्रिकेट करियर
अंकोला के लिए भारतीय टीम में वापसी की उम्मीदें कई बार जगीं, लेकिन वह लंबे समय तक टीम का हिस्सा नहीं बन सके. उस समय जवागल श्रीनाथ भारतीय तेज गेंदबाजी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो चुके थे, जबकि मनोज प्रभाकर और वेंकटेश प्रसाद जैसे गेंदबाज भी टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे. आखिरकार 28 साल की उम्र में अंकोला का क्रिकेट करियर समय से पहले खत्म हो गया. पैर में बोन ट्यूमर और लगातार चोटों ने उनके खेल को काफी प्रभावित किया.
मां की मौत के बाद मुश्किल दौर, डिप्रेशन का लिया इलाज
हाल के वर्षों में अंकोला को क्रिकेट से अलग अपनी निजी जिंदगी में भी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 2026 में पुणे के पास एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर डिप्रेशन का इलाज कराया. जुलाई 2026 में अंकोला ने बताया कि इलाज से उन्हें काफी मदद मिली और अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं. उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों से मदद लेने और इसके आसपास मौजूद झिझक को दूर करने की अपील भी की.
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