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This Article is From Mar 28, 2013

टेस्ट की तरह वन-डे में भी सफल हो सकते हैं पुजारा : राहुल द्रविड़

टेस्ट की तरह वन-डे में भी सफल हो सकते हैं पुजारा : राहुल द्रविड़
नई दिल्ली: पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने भारत की नई रन मशीन चेतेश्वर पुजारा को एकदिवसीय टीम में भी शामिल करने की वकालत करते हुए कहा कि सौराष्ट्र का यह बल्लेबाज टेस्ट मैचों की तरह वन-डे क्रिकेट में भी सफल हो सकता है। पुजारा को शुरू से ही द्रविड़ का उत्तराधिकारी माना जा रहा था तथा वह अब तक उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा उतरे हैं। पुजारा ने अभी तक जो 13 टेस्ट मैच खेले हैं उनमें 65 .55 की औसत से 1180 रन बनाए जिसमें चार शतक भी शामिल हैं।

द्रविड़ को लगता है कि सौराष्ट्र का यह बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में उन्हीं के जैसा रवैया अपनाता है। द्रविड़ ने कहा, उसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत की है। सच्चाई यह है कि उसकी शुरुआत मुझसे भी बेहतर है। मैं समझता हूं कि वह बल्लेबाजी के पुरानी परंपरा के हिसाब से आगे बढ़ा है। उसके पास कई तरह के शॉट हैं और वह नए शॉट भी इजाद कर रहा है। टेस्ट क्रिकेट में उसका रवैया वैसा ही जैसा मेरा था।

इस पूर्व कप्तान से एक कार्यक्रम में दुनियाभर के नौ क्रिकेट प्रेमियों को बातचीत का मौका मिला। पुजारा ने अब तक एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला है, लेकिन घरेलू स्तर पर एकदिवसीय मैचों में उन्होंने 56.97 की औसत से रन बनाए हैं, जिसमें आठ शतक और 17 अर्धशतक शामिल हैं।

द्रविड़ ने कहा, वह बेसिक्स पर ध्यान देता है। आप देख सकते हो कि लगातार सुधार कर रहा है और वह ऐसा खिलाड़ी है, जो सवालों का जवाब ढूंढता है। वह जिस तरह से क्रिकेट खेल रहा है। मुझे लगता है कि वह कई सवालों के जवाब ढूंढ सकता है और इनमें से एक सवाल वनडे क्रिकेट है।

द्रविड़ का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट को बनाए रखने के लिए इसका कार्यक्रम सही तरह से तैयार करने की जरूरत है तथा सभी टीमों को अधिक से अधिक मैच दिए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा, मैं निश्चित तौर पर इसका बेहतर कार्यक्रम देखना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि अधिक से अधिक टीमें टेस्ट क्रिकेट खेलें। मैं चाहता हूं कि सभी टीमों को एक-दूसरे के खिलाफ अधिक से अधिक मैच खेलने का मौका मिले। इससे टेस्ट क्रिकेट आगे बढ़ेगा और उसमें सुधार होगा। टेस्ट क्रिकेट को बनाए रखने का एक ही रास्ता है कि जितना संभव हो अधिक मैच खेलना। द्रविड़ ने कहा कि अपने करियर के शुरुआती दौर में विदेशों में खेलने पर उन्हें उछाल से तालमेल बिठाने में दिक्कत हुई।

उन्होंने कहा, मैं विदेशों में ऐसी परिस्थितियों में सफल होना चाहता था, जिनका मुझे अनुभव नहीं था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती दौर में मुझे उछाल वाली गेंदों से सामंजस्य बिठाने में मुश्किल हुई। द्रविड़ ने कहा, जब मैं पहली बार ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका या इंग्लैंड गया, तो मैंने देखा कि विदेशों के कुछ चोटी के खिलाड़ी लंबाई वाली गेंदों को छोड़ देते थे। भारतीय बल्लेबाज इस तरह की गेंद खेलते हैं, क्योंकि भारत में इन्हें छोड़ने पर वह आपके मिडिल या ऑफ स्टंप से गिल्लियां उड़ा सकती है। इस उछाल से सामंजस्य बिठाने और विशेषकर पारी के शुरू में यह जानना कि कौन-सी गेंद छोड़नी है, काफी मुश्किल होता है।

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