हाल ही में भारतीय पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथ्पा ने लिंकडिन पर बताया कि कैसे आईपीएल में मिले पैसे ने उन्हें लगभग बर्बाद कर दिया. वास्तव में किसी भी 20-22 साल के युवा के लिए शोहरत और रातों-रात अमीरी को संभालना बिल्कुल भी आसान नहीं होता. इसके एक नहीं कई प्रमाण हैं. ये युवा रातों-रात करोड़पति हुए, फिर इन्हें बहुत ही बुरा समय देखना पड़ा. हम आपके लिए ऐसी ही सीरीज लेकर आए हैं, जिनके तहत आपको लगातार ऐसे ही खिलाड़ियों के बारे में डिटेल से बताएंगे. और कुछ ऐसा ही करीब 18 साल पहले मेगा टूर्नामेंट के पहले ही संस्करण यानी साल 2008 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक छोटे गांव नादवा सराय (फिरोज़पुर) से निकले लेफ्टी पेसर कामरान खान के साथ हुआ. कामरान रातों-रात अपनी स्पीड के कारण राष्ट्रीय नक्शे पऱ छा गए, लेकिन वक्त बदला तो इस लेफ्टी को ऐसे दिन देखने पड़े कि उन्हें खेतों पर मजदूरी करनी पड़ी.
मां करती थीं बीड़ी बनाने का काम
कामरान के पिता जुम्मन खान एक साधारण टैक्सी चालक थे, जो दिन-रात मेहनत करके जैसे-तैसे परिवार का पेट पालते थे. वहीं उनकी मां घर पर बीड़ी बनाने का काम करती थीं. बीड़ी बनाने के इस मजदूरी भरे काम से रोजाना महज चंद रुपये ही मिलते थे. कामरान कुल चार भाइयों में से एक हैं. सीमित आमदनी और बड़ा परिवार होने के कारण उनके घर में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था. कई बार परिवार के पास दो वक्त के खाने का सही इंतजाम भी नहीं हो पाता था.

किस्मत ने ऐसे दिया कामरान को मौका
कामरान खान शुरुआती दिनों में आजमगढ़ और मऊ के स्थानीय मैदानों में बिना किसी पेशेवर कोचिंग के टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे. बिना किसी जिम या फिटनेस ट्रेनर के, गांव की गलियों में टेनिस बॉल फेंकते-फेंकते ही उनके कंधों में वह ताकत आई कि वे 140-145 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने लगे. उनका एक्शन मलिंगा की तरह थोड़ा झुका हुआ था और यही उनकी पहचान बन गया. कामरान के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब मुंबई के एक स्थानीय टूर्नामेंट में राजस्थान रॉयल्स के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट ज़ुबिन भरूचा की नजर उन पर पड़ी. वे कामरान की बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग वाली 140+ की तूफानी रफ्तार से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत शेन वॉर्न को इसकी जानकारी दी. इसके बाद वॉर्न ने कामरान को सीधे राजस्थान रॉयल्स के नेट सत्र में बुलाया, जहां से कामरान की किस्मत रातों-रात बदल गई.
कप्तान वॉर्न ने दिया नाम: 'द टॉरनेडो'
इसके बाद वॉर्न ने कामरान को सीधे राजस्थान रॉयल्स के नेट सत्र में बुलाया, जहां से कामरान की किस्मत रातों-रात बदल गई.कामरान को उस वक्त लगभग करीब 12 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जो उनके परिवार के लिए जिंदगी बदल देने वाली रकम थी. वॉर्न ने कामरान की 140 की स्पीड देखकर उन्हें 'द टॉरनेडो' (बवंडर) नाम दिया. आईपीएल इतिहास का पहला 'सुपर ओवर' कामरान खान ने ही फेंका था. इसमें जिसमें उन्होंने केकेआर के खिलाफ गेंदबाजी करते हुए अपनी टीम को जीत दिलाई थी. कामरान ने पहले ही मैच में 3 ओवर में 17 रन देकर 1 विकेट लिया था.
Do you remember Kamran Khan who played for Rajasthan Royals ?
— Venky Mama (@venkymama100) August 20, 2026
- Kamran Khan was brought by Rajasthan Royals from a tennis league and had played no first class cricket
- But his 2009 season did not went so well and also he was reported for illegal bowling action and stayed out… pic.twitter.com/VTXxu5nkY6
...और इन वजहों से गिरता गया करियर
आईपीएल 2009 के सीजन के दौरान ही मैच अधिकारियों ने उनके एक्शन को संदेहास्पद करार दिया, जो कामरान के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हुआ. इसके बाद जब एक्शन सुधारने के लिए उन्हें राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (वर्तमान में COE) भेजा गया, तो एक्शन में तो सुधार हुआ, लेकिन उनकी वह ताकत खत्म हो गई, जिसे देखकर वॉर्न ने उन्हें द टॉरनेडो का नाम दिया था. वह थी 140+ की स्पीड.
साल 2011 में उन्हें सहारा पुणे वारियर्स ने भी खरीदा, लेकिन चोटों (इंजरी) और खराब फॉर्म के कारण वे अधिक मैच नहीं खेल पाए और जल्द ही आईपीएल से बाहर हो गए. कामरान ने जो पैसा आईपीएल से कमाया था, वह परिवार की बीमारियों, इलाज, घर और अपनी ट्रेनिंग के कारण कुछ ही सालों में खत्म हो गया. कामरान के पास कोई उच्च शैक्षणिक योग्यता या पक्की नौकरी नहीं थी. जब क्रिकेट से होने वाली आय शून्य हो गई और बैंक अकाउंट खाली हो गया. ऐसे में कामरान को वापस अपने गांव आजमगढ़ लौटना पड़ा. फिर कामरान समय के साथ धीरे-धीरे गायब हो गए. और फैंस उन्हें भूल गए.
तस्वीरों ने देश भर को झंकझोर दिया
साल 2013 में जब आईपीएल का छठा सीजन आयोजित हो रहा था, तब न्यूज चैनलों पर, सोशल मीडिया पर आईं कामरान खान की तस्वीरों ने करोड़ों फैंस को झकझोर दिया. कामरान इन तस्वीरों में खेतों में फावड़ा चलाते और लकड़ी काटते हुए दिखे. तस्वीरों में वह अपने बड़े भाई निजामुद्दीन के साथ तपती धूप में नंगे बदन साधारण कपड़ों में खेतों में फावड़ा चलाते, मिट्टी खोदते और लकड़ियां काटते हुए दिखे, तो वह चर्चा का विषय बन गए. उस समय कामरान भाई के साथ दूसरों के खेतों में भी दिहाड़ी और मदद के आधार पर काम कर रहे थे ताकि परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो सके. महज तीन साल के भीतर ही सितारे अर्श से फर्श पर आ चुका था!
वर्तमान में ऐसे हो रहा है गुजारा
फिलहाल 35 साल के हो चुके कामरान खान अब बस किस्से-कहानियों का हिस्सा हैं. हालांकि, क्रिकेट को उन्होंने अभी भी पकड़ा हुआ है. वह स्थानीय और प्राइवेट लीग, अलग-अलग राज्यों में होने वाली, वेटरन लीग के साथ क्लब क्रिकेट खेलते हैं और इन मैचों की फीस से उनकी आजीविका चल रही है. साथ ही, खाली समय में वह पैतृक गांव लौटकर परिवार की थोड़ी बहुत जमीन पर खेती-बाड़ी में हाथ बंटाते हैं. साथ ही, आस-पास के गांव के युवाओं को कोचिंग भी देते हैं.
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