
नई दिल्ली:
पूर्व कप्तान कपिल देव ने भारत के लगातार लचर प्रदर्शन पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वकप 2011 में जीत के बाद भारतीय क्रिकेटर फोकस खो बैठे और उन्हें अपनी जिम्मेदारी याद नहीं रही।
कपिल ने कहा, विश्वकप के बाद भारत का हर खिलाड़ी अपना फोकस खो बैठा। किसकी क्या जिम्मेदारी है, वे भूल गए। वे अपने आप में मस्त हो गए। क्रिकेट एक टीम गेम है। उन्हें एक टीम की तरह खेलना चाहिए।
इस महान ऑलराउंडर ने शुक्रवार रात सिएट क्रिकेट अवॉर्ड्स के दौरान चर्चा में कहा, भारत नंबर एक टीम थी और उसे अपना यह स्तर बनाए रखना चाहिए था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। कपिल ने इसके साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप में विदेशी कोच रखने की परपंरा पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने इस संबंध में पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की भी आलोचना की, जिनके कप्तान रहते हुए पहली बार भारतीय टीम ने जॉन राइट के रूप में विदेशी कोच रखा था।
कपिल ने कहा, गांगुली ने विदेशी कोच बुलाकर सही नहीं किया था। हमारे यहां भी कई खिलाड़ी हैं, जो बेहतर कोच साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, मुझे तो पहले कोच शब्द पर ही आपत्ति है। उसे आप मैनेजर कह सकते हैं, कोच नहीं। फिर वाटमोर हों या फ्लेचर, वे सारी चीज नहीं जानते। मेरे विचार में आपका सबसे अच्छा कोच आपका साथी खिलाड़ी होता है, जो आपकी कमजोरियों को अच्छी तरह से समझ सकता है। इसके अलावा भाषा की समस्या के कारण भी विदेशी कोच उपमहाद्वीप में सफल नहीं हो पाते।
कपिल ने कहा, विश्वकप के बाद भारत का हर खिलाड़ी अपना फोकस खो बैठा। किसकी क्या जिम्मेदारी है, वे भूल गए। वे अपने आप में मस्त हो गए। क्रिकेट एक टीम गेम है। उन्हें एक टीम की तरह खेलना चाहिए।
इस महान ऑलराउंडर ने शुक्रवार रात सिएट क्रिकेट अवॉर्ड्स के दौरान चर्चा में कहा, भारत नंबर एक टीम थी और उसे अपना यह स्तर बनाए रखना चाहिए था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। कपिल ने इसके साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप में विदेशी कोच रखने की परपंरा पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने इस संबंध में पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की भी आलोचना की, जिनके कप्तान रहते हुए पहली बार भारतीय टीम ने जॉन राइट के रूप में विदेशी कोच रखा था।
कपिल ने कहा, गांगुली ने विदेशी कोच बुलाकर सही नहीं किया था। हमारे यहां भी कई खिलाड़ी हैं, जो बेहतर कोच साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, मुझे तो पहले कोच शब्द पर ही आपत्ति है। उसे आप मैनेजर कह सकते हैं, कोच नहीं। फिर वाटमोर हों या फ्लेचर, वे सारी चीज नहीं जानते। मेरे विचार में आपका सबसे अच्छा कोच आपका साथी खिलाड़ी होता है, जो आपकी कमजोरियों को अच्छी तरह से समझ सकता है। इसके अलावा भाषा की समस्या के कारण भी विदेशी कोच उपमहाद्वीप में सफल नहीं हो पाते।
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