कप्तान श्रेयस अय्यर ने सपने भी नहीं सोचा होगा कि बतौर भारतीय टी20 कप्तान उनका पहला दौरा कुछ ऐसा होगा. रविवार को बेल्फास्ट में दूसरे टी20 मुकाबले में हुई 1 रन से नजदीकी हार के साथ ही भारत पर दुनिया की नंबर-12 टीम के हाथों हार का कलंक लग ही गया. लेकिन इसमें भी खासा पॉजिटिव छिपा है और सेलेक्टरों से ज्यादा BCCI के लिए यहां कई सबक हैं. और सबक प्रबंधन के लिए भी हैं कि आखिर कहां क्या गलत गया और वह दौरा छोटा होने के बावजूद इसे और बेहतर कैसे बना सकते थे, तमाम दिग्गज इस सीरीज हार के बारे में अगले कई महीनों तक बात करेंगे. इस हार का हमेशा उदाहरण दिया जाएगा. जाहिर है कि हार के पीछे कई वजह हैं, चलिए 4 बड़ी वजहों पर रोशनी डालते हैं.
1. पिकनिक जैसी मनोदशा!
इसमें दो राय नहीं कि भारतीय प्रबंधन की मनोदशा आयरलैंड दौरे के लिए कुछ ऐसी ही थी. यह दो मैचों की सीरीज इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की सीरीज की तैयारियों जैसा मामला था. और यह कोच गंभीर से लेकर पूरी टीम की वॉक एंड टॉक में साफ दिखा. और यह दिखना भी एक स्वाभाविक सी बात है. 8 मार्च को टी20 विश्व कप जीतने के बाद कुछ दिन के ब्रेक के बाद आईपीएल. फिर करीब डेढ़ महीने मेगा टूर्नामेंट में व्यस्त रहने के कुछ दिन के ब्रेक के बाद आयरलैंड का दौरा. दुनिया की नबर-12 टीम के खिलाफ दौरा. जाहिर है कि यह एक रिलैक्स आगाज था. सामने से कोई चुनौती नहीं थी. "देख लेंगे, ये कल के लौंडे हमारा क्या मुकाबला करेंगे." अब जो है सामने है!
2. आयरिश हालात में ढालना बहुत ही मुश्किल था
जहां पिच पर गेंद खासी रुक कर आने वाली हो, स्ट्रोक लेना आसान न हो, मैदान का आयाम अलग किस्म का हो, मौसम को एक बार को छोड़ ही देते हैं. ऐसे में सीरीज शुरू होने से महज दो-तीन दिन देश विशेष में पहुंचकर सिर्फ एक नेट सेशन के आधार पर अगर दुनिया के धुरंधर सोच रहे हैं कि वे उस देश के हालात (ऊपर बताए गए तत्व) से खुद को समायोजित कर लेंगे, तो यह एक संभव सी बात है. और खुद को आयरिश हालात में न ढाल पाना सीरीज में हार की दूसरी बड़ी वजह था.
3. आईपीएल एप्रोच की जिद, नतीजा सामने है
जब सड़कें गड्डे वाली आती हैं, तो आपको वैसी ही ड्राइविंग करनी करनी होती है! लेकिन न तो इसके लिए कप्तान श्रेय्यस अय्यर ही मानसिक रूप से तैयार हुए, न अभिषेक शर्मा और न ही इशान किशन. एप्रोच ऐसी कि मानो घर में आईपीएल की 250 रनों की पिच हो. वही दूर से बल्ला भांजना लेकिन यहां की पिचें तो पैरों में चपलता मांग रही थीं, लेकिन जितना देर से हो सके, उतना देरी से खेलने की मांग कर रही थीं. खेलना गेंद को शरीर के नजदीक से भी था, लेकिन आप दूसरे मैच में कप्तान श्रेयस अय्यर को आउट होते विजुअल एक बार फिर से देखिए. अय्यर को पता ही नहीं है कि वह दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेल रहे हैं या फिर बेलफास्ट में! एप्रोच तो यही चीख-चीख कर कह रही है!
3. टॉप ऑर्डर से बेहतर की उम्मीद थी!
हवा-हवाई शॉट वाले अभिषेक को छोड़ दें, तो बाकियों से और बेहतर की उम्मीद थी, लेकिन ये तकनीकी समायोजन भी करते दिखाई नहीं पड़े. शायद ही जय मूंदरा भारत की किसी शीर्ष रणजी ट्ऱॉफी की XI में जगह बना सकें, लेकिन आयरिश पिचों पर आपको उनके खिलाफ शॉट खेलने के लिए न केवल पैर अच्छी तरह चलाने होंगे, बल्कि तकनकी समायोजन (उदाहरण के तौर प बल्ला सही तरह पीछे से आए आदि..), लेकिन आप संजू सैसमन के पहले प्लेडऑन विकेट को देखें. इसी अंदाज का रिप्ले कप्तान अय्यर का दूसरे मैच में देखें. ऐसे में सवाल तो उठेगा ही कि हुए दो नेट सेशन से आखिकार आप क्या आगे लेकर बढ़े? कुछ लिया भी या नहीं लिया? मैच में एप्रोच, माइंडसेट और खुद को एप्पलाई करने में तो यह नहीं ही दिखा.
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