India V/S Ireland 2nd T20I: शुक्रवार को बेल्फास्ट में पहले टी20 मुकाबले में मेजबान आयरलैंड के हाथों 34 रन से मिली स्तब्धकारी हार के बाद टीम इंडिया को शनिवार को एक झटका और लगा, जब बारिश ने उसका दौरे के सिर्फ दूसरे नेट अभ्यास पर पानी फेर दिया. निश्चित रूप से पहले मैच में हार के बाद इस प्रैक्टिस सेशन के बहुत ही ज्यादा मायने थे क्योंकि गौतम गंभीर कई बॉक्स इस सेशन से टिक कर सकते थे, जो अब नहीं ही होने जा रहे. इसका मतलब यह है कि सीरीज में 1-1 की बराबरी के लिए भारत की चुनौतियों का स्तर खासा बढ़ गया है. चलिए आप दूसरे मुकाबले से पहले उन 4 बड़ी बातों के बारे में जान लीजिए, जिसने निपटना बहुत और बहुत ही ज्यादा चैलेंजिंग गंभीर एंड कंपनी के लिए होने जा रहा है. आप बारी-बारी से जान लीजिए.
1. हालात से खुद को ढालना
सामने वाली टीम आयरलैंड थी, तो आप विश्व चैंपियन. 'अरे ये कल के लौंडे हमारा क्या बिगाड़ लेंगे. एक चपत में ही इसको सिखा देंगे.' निश्चित रूप से मनोदशा करोड़ों भारतीयों की तो ऐसी ही रही होगी. BCCI ने आयरिश टीम और इससे ऊपर यहां के हालात को कितना गंभीरता से लिया, यह आप इससे समझ सकते हैं कि टीम इस दौरे में दो या तीन दिन पहले ही आयरलैंड पहुंचीं. हेड कोच गौतम गंभीर बाद में टीम से जुड़े और पहले ही मैच से पहले सिर्फ एक ही फुल नेट सेशन आयोजित हो सका. वहीं, मेजबान टीम घर के हालात में भी ढलने के लिए पिछले करीब 7-8 दिन से मैदान पर पसीना बहा रही थी. और अंतर कैमरे पर एकदम साफ-साफ दिखाई पड़ा. आयरिश टीम के बॉलरों ने हालात (मौसम और खासकर पिच और मैदान) के हिसाब से गेंदबाजी की. ठीक वैसी गेंदें फेंकी, जैसी पिच डिमांड कर रही थी. भारतीय बॉलरों का का प्रमाण देखना हो, तो आप सिर्फ प्रसिद्ध कृष्णा (4-0-57-0) से पूरी कहानी समझ सकते हैं.

2. बल्लेबाज पिच के हिसाब से बैटिंग
निश्चित तौर पर ये आईपीएल की पिच नहीं ही हैं. यहां गेंद टप्पा खाने के बाद रुक कर भी आ रही है, तो कोई-कोई पड़कर तेज भी निकल रही है. वहीं ऊपर से मैदान का चौकोर जैसा होना, जहां कैमरामैन भी पलों को कैद करने में गच्चा खा जा रहा है. ऐसे में अगर बल्लेबाज कुछ गेंद खेलने के बाद बल्ला हांकते, तो समझ में आता कुछ कोशिश ढालने की हुई. लंबे ब्रेक के बाद संजू सैमसन के पैर नहीं चल रहे, तो ईशान किशन और खासकर कप्तान श्रेयस अय्यर का माइंडसेट तो यही कह रहा कि या तो उन्होंने पिच को आईपील की तरह लिया, या फिर आयरिश बॉलरों को हल्के में लिया. एकदम से ही गेंद को टाइम करना आसान नहीं था. और ऊपर से मेजबान बॉलरों की उम्दा बॉलिगं. परिणाम आपके सामने है. और इसी एप्रोच की परीक्षा फिर से टॉप ऑर्डर ही नहीं, बल्कि बाकी बल्लेबाजों की भी होगी ही होगी.
3. बॉलर करेंगे पिच के हिसाब से गेंदबाजी?
हर्षित राणा अच्छी कोशिशें कर रहे हैं. जब किसी खास कौशल पर मास्टरी न हो, तो बेहतर यही है कि 'गाड़ी 'अपनी ताकत के हिसाब से ही चलाई जाए. लगता है कि प्रसिद्ध कृष्णा को स्लोअर फेंकने का नया-नया जोश चढ़ा है, लेकिन मास्टरी दूर-दूर तक नहीं है. कृ्ष्णा ने स्लोअर-वन गेंदों को मानो ऑफ स्पिन में तब्दील कर दिया. पिच के हिसाब से गेंदों को गति के अनुपात में कितना धीमा करना है, यह बात कृष्णा से मीलों दूर है. पिछले मैच के 17वें ओवर की आखिरी दो गेंदें स्लोअर-वन से ज्यादा ऑफ स्पिन ज्यादा थीं. और लगातार 3 छक्के खाकर कृष्णा ओवर में 27 रन देकर हार के सबसे बड़े विलेन बन गए. और हां, जिस विद्या की हम बात कर रहे हैं, वह 24 घंटे के भीतर तो आने से रही! सवाल है कि फिर प्रयोग किया ही क्यों जाए? क्यों न तब तक अपनी ताकत (गति, कंधा मारकर गुड लेंग्थ से बॉल को उठाना) पर काम किया जाए?
4. परफैक्ट XI का सवाल?
यह सवाल गौतम एंड गंभीर के लिए अब चयन कम बल्कि मजबूरी ज्यादा हो चला है! अब आप यहां सिर्फ एक या तीन मैचों की विफलता पर उन खिलाड़ियों को XI से बाहर नहीं रख सकते, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही आपको विश्व कप जिताने में अहम योगदान दिया है. उन खिलाड़ियों को, जिन्होंने पिछले दिनों आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन किया. परफैक्ट इलेवन का सवाल फैंस के लिए ज्यादा है, लेकिन गौतम गंभीर ही नहीं, बल्कि औसत क्रिकेट टीम का मैनेजर भी समझता है कि दूसरे मैच में भी वही XI के साथ जाना है, जिसके साथ पहले मैच में उतरे थे? सिर्फ एक ही मैच के आधार पर किसी को बाहर क्यों किया जाए? लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वॉशिगंटन सुंदर पहले मैच की XI में भी हालात के हिसाब से फिट थे? कहीं, यही सवाल गौतम गंभीर के लिए परफैक्ट XI ढूंढने की बड़ी वजह न बन जाए? बाकी तो जो होगा, वह टॉस के बाद सामने आ ही जाएगा.
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