कुछ दिन पहले दिल्ली रणजी ट्ऱॉफी में दिल्ली के कप्तान आयुष बडोनी श्रीलंका दौरे में भारत ए टीम के सदस्य थे, लेकिन हाल ही में न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया A में जगह नहीं मिली, तो अब बडोनी ने अनदेखी का बल्ले से करारा जवाव सेलेक्टरों को दिया है. दिल्ली कप्तान ने लगातार दो दोहरे शतक जड़े हैं. पिछले मैच में गुजरात के खिलाफ 217 रन की पारी खेली, तो रांची में खेले जा रहे मुकाबले में उन्होंने बिना आउट हुए 210 रन बना दिए. बचपन में आयुष बडोनी अपने दिल्ली वाले घर की छत पर बनी सीमेंट की पिच पर अपने पिता विवेक द्वारा फेंकी जाने वाली गेंदों का नियमित सामना किया करते थे.और सालों बा सीनियर सर्किट में बडोनी का सफर किसी बेहतरीन पटकथा (स्क्रिप्ट) की तरह है. उनका करियर उतार-चढ़ाव, टैलेंट प्रतिभा, अस्वीकार्यता, उत्थान, और अधिक निराशा के दौर से गुजारते हुए आखिरकार वापसी तक लेकर जाता है
रणजी ट्रॉफी डेब्यू में लग गए चार साल
26 वर्षीय बडोनी ने लगभग इन सभी दौरों का अनुभव किया है. उन्होंने हर स्तर पर अस्वीर्यता का दर्द महसूस किया है. कभी भारत की अंडर-19 टीम के स्टार रहे बडोनी ने दिल्ली क्रिकेट चयन की अंतहीन अराजकता के बीच सीनियर डेब्यू के लिए चार साल इंतजार किया. इसके बाद उन्होंने चार साल पहले कुछ शानदार छोटी पारियों के साथ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की सुर्खियों में जगह बनाई थी, लेकिन वह इस मंच पर पूरी तरह अपनी छाप नहीं छोड़ पाए थे.
दिल्ली के 'चुनिंदा क्लब' में शामिल हुए
अब हाल ही में फिर से उनके करियर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अगस्त में श्रीलंका दौरे तक 'इंडिया ए' टीम के नियमित सदस्य रहे बडोनी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज और फिर न्यूजीलैंड के के मौजूदा दौरे से बाहर कर दिया गया. लेकिन मंगलवार को रांची में झारखंड के खिलाफ अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए बडोनी ने अपना लगातार दूसरा रणजी ट्रॉफी दोहरा शतक जड़ा. यह प्रथम श्रेणी (फर्स्ट-क्लास) क्रिकेट का एक संयुक्त विश्व रिकॉर्ड है. दिल्ली के केवल कुछ ही बल्लेबाजों ने यह उपलब्धि हासिल की है. साल 2001-02 में गौतम गंभीर और फिर 2017-18 में विराट कोहली (भारत के लिए).
गंभीर का रहा है बडोनी में भरोसा
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर का आयुष बडोनी की काबिलियत में खासा भरोसा रहा है. जब गंभीर आईपीएल में लखनऊ सुपर जॉयंट्स से जुड़े थे, तो उन्होंने लगातार बडोनी को मौके दिए, लेकिन आयुष के प्रदर्शन में वैसी निरंरतरता नहीं रही, जो होनी चाहिए थी. और टीम इंडिया के लिए खेलते हुए भी इसी पहलू को हासिल करने में आयुष नाकाम रहे. शायद यही वजह रही कि वह भारत ए टीम से ड्रॉप कर दिए गए. अब देखने की बात होगी कि लगातार दो दोहरे शतक का इनाम उन्हें कब मिलता है.
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