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गैरी सोबर्सः 12 उंगलियों वाले जादूगर, पहले शतक से तोड़े वर्ल्ड रिकॉर्ड, गावस्कर बने थे लकी चार्म

बचपन में सोबर्स फटे गेंदों से खेलते थे, जो टप्पा खाने के बाद किस दिशा में घूमेंगी उसका अनुमान लगा पाना बहुत मुश्किल होता था. बाद में छह गेंदों में छह छक्के जमाने वाले क्रिकेटर बने. टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा स्कोर, सबसे अधिक रन और भी कई नायाब रिकॉर्ड अपने नाम किए.

गैरी सोबर्सः 12 उंगलियों वाले जादूगर, पहले शतक से तोड़े वर्ल्ड रिकॉर्ड, गावस्कर बने थे लकी चार्म
सर गैरी सोबर्स: छह गेंद पर छह छक्के जमाने वाला क्रिकेटर
AFP

1936 में क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा सितारा पैदा हुआ, जिसकी चमक सात समंदर पार हर उस देश तक पहुंची जहां क्रिकेट खेला जाता था. दुनिया उन्हें गैरी सोबर्स के नाम से जानती है. 17 जुलाई 2026 को उनका निधन हो गया है.

ऐसे खिलाड़ी बहुत कम पैदा होते हैं. अपने करियर में सोबर्स ने इतने रिकॉर्ड बनाए कि दुनिया हैरान रह गई.

कुछ लोगों का मानना था कि यह उनके दोनों हाथों में एक एक्स्ट्रा उंगली होने का करिश्मा था. सोबर्स ने खुद अपनी जीवनी में इसका जिक्र किया है. उन्होंने लिखा था, "कई लोग मानते हैं कि मेरी किस्मत इतनी अच्छी इसलिए थी क्योंकि मेरे हाथों में दो अतिरिक्त उंगलियां थीं."

हालांकि सोबर्स यह भी लिखते हैं कि 'बचपन में वो पुराने फटे गेंदों से खेलते थे, जो टप्पा खाने के बाद किस दिशा में घूमेंगी उसका अनुमान लगा पाना बहुत मुश्किल होता था.'

उन घूमती गेंदों पर किए गए कड़े अभ्यास में जमाए गए सैकड़ों चौके-छक्के और चटकाए गए स्टंप्स ने उन्हें एक ऐसा हरफनमौला क्रिकेटर बना दिया जिन्हें दुनिया सर गैरी सोबर्स के नाम से जानती है.

उन्हीं अनिश्चित गेंदों पर घंटों बल्लेबाजी और गेंदबाजी का अभ्यास करते-करते उन्होंने अपनी तकनीक को इतना मजबूत बना लिया कि आगे चलकर वो क्रिकेट इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडरों में गिने जाने लगे.

छह गेंद पर छह छक्के जमाने वाला क्रिकेटर

छह गेंद पर छह छक्के जमाने वाला क्रिकेटर
Photo Credit: Garry Sobers My Autobiography

पहला टेस्ट शतक ही बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड

गैरी सोबर्स ने सिर्फ 17 साल की उम्र में वेस्टइंडीज के लिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था. शुरुआती दिनों में वे नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे. धीरे-धीरे उनकी बल्लेबाजी क्रम ऊपर आता गया, लेकिन पहले 16 टेस्ट मैचों में उनके बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला.

फिर आया साल 1958. पाकिस्तान की टीम वेस्टइंडीज दौरे पर थी और 21 साल के गैरी सोबर्स ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसे क्रिकेट इतिहास कभी नहीं भूल सकता.

उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 365 रन ठोक दिए. यह उस समय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था. सबसे खास बात यह रही कि यह उनके टेस्ट करियर का पहला ही शतक था. यानी पहला शतक और सीधे वर्ल्ड रिकॉर्ड.

सोबर्स का ये रिकॉर्ड पूरे 36 सालों तक उनके नाम पर ही कायम रहा. बाद में इसी रिकॉर्ड को उनकी ही टीम के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा ने तोड़ा.

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Photo Credit: Garry Sobers My Autobiography

एक-एक कर रिकॉर्ड अपने नाम करते गए सोबर्स

365 रन की ऐतिहासिक पारी के बाद गैरी सोबर्स का बल्ला लगातार बोलता रहा. अगले ही टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जमा दिए. इसके कुछ महीने बाद भारत दौरे पर पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में तीन और शतक जड़ दिए.

सोबर्स ने एक एक कर अपने शतकों की संख्या 26 तक पहुंचाई और 8000 रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने. 

जब वो क्रिकेट से रिटायर हुए तो टेस्ट मैचों का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर और सबसे अधिक रन का रिकॉर्ड सर गैरी सोबर्स के नाम ही दर्ज था. 

सोबर्स न केवल एक शानदार बल्लेबाज थे बल्कि तेज गेंदबाजी के साथ-साथ टेस्ट मैचों में दोनों तरह की स्पिन गेंदबाजी भी किया करते थे. 

इतना ही नहीं, सोबर्स एक शानदार फील्डर भी थे. कैच पकड़ना हो, रन बचाना हो या मुश्किल मौके पर टीम को विकेट दिलाना, सोबर्स हर भूमिका में फिट बैठते थे.

एक इंसान में इतनी खूबियां - जैसे क्रिकेट के हर रोल के लिए ऊपर वाले ने उन्हें नायाब हुनर से तराशा हो.

यही वजह है कि उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे संपूर्ण ऑलराउंडर का दर्जा दिया जाता है.

जब गावस्कर को छूते ही सोबर्स ने जमा दिया था शतक

सोबर्स न केवल प्रतिभा के धनी थे बल्कि क्रिकेट के मैदान पर लगातार एकसमान प्रदर्शन करना उनकी आदत में शुमार था. 

सुनील गावस्कर अपनी किताब ऑइडल्स में लिखते हैं, "1971 में मैं पहली बार वेस्ट इंडीज़ के दौरे पर था. मैंने वहां अपने दूसरे टेस्ट में शतक जमा दिया था. सोबर्स तब वेस्ट इंडीज़ के कप्तान थे और शुरुआत तीन पारियों में उनका बल्ला खामोश रहा. तो जब मैंने शतक जमा दिया तो वो मेरे पास आए और बोले, "अरे भाई, मैं जरा तूझे छू लूं, शायद तुम्हारी किस्मत का असर मुझ पर भी हो जाए." 

जिन गैरी सोबर्स के बल्ले से पिछले दो सालों से कोई शतक नहीं निकला था, उन्होंने उसी पारी में शतक जमाया और फिर अगले दोनों टेस्ट मैचों में भी सेंचुरी जड़ दी.

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Photo Credit: Garry Sobers My Autobiography

एक ओवर की सभी छह गेंदों पर छक्के का रिकॉर्ड

सत्तर के दशक में जब सोबर्स पहली बार इंग्लैंड की काउंटी क्लब के लिए क्रिकेट खेले तब वो 32 साल के हो चुके थे और अपने पहले ही सीजन में ग्लैमरगन के खिलाफ उन्होंने एक ओवर में छह दनदनाते छक्के जमाने का कारनामा किया था. 

फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतिहास में ऐसा उससे पहले कभी नहीं देखा गया था कि किसी बल्लेबाज ने एक ओवर की सभी गेंदों पर छक्के लगाए हों.

पाकिस्तान में लिया गया 365 रनों का बदला

365 रनों की पारी खेलने के बाद जब अगले साल सोबर्स टेस्ट सीरीज खेलने पाकिस्तान पहुंचे तो वहां उन्हें खराब अंपायरिंग का सामना करना पड़ा. सर गैरी सोबर्स अपनी आत्मकथा गैरी सोबर्सः माइ ऑटोबायोग्राफी में लिखते हैं- "कराची टेस्ट की पहली पारी में फजल महमूद की गेंद लेग स्टंप के बाहर पैड पर लगी थी लेकिन अंपायर ने मुझे एलबीडब्ल्यू दे दिया. मैं हैरान था पर मैंने कुछ नहीं कहा. फ़िर जब दूसरी पारी में फजल महमूद की गेंद बल्ले का किनारा लेती हुई लेग स्लिप में खड़े एजाज बट के पास एक टप्पा खा कर गई और फजल महमूद की अपील पर अंपायर ने मुझे आउट दे दिया तो मुझे फिर बहुत हैरानी हुई." 

"मुझे याद है कि तब नॉन स्ट्राइक एंड पर खड़े कॉली स्मिथ ने फजल महमूद से गुस्से में कुछ कहा था. मैं ड्रेसिंग रूम में आया और अपना बैग तैयार करने लग गया, क्योंकि मैं वेस्ट इंडीज वापस जाना चाहता था." 

सोबर्स लिखते हैं, "पाकिस्तानी टीम के कुछ खिलाड़ियों ने मुझे पहले ही बता दिया था कि मेरे साथ यह सब होने वाला है. वास्तव में, मैंने वहां अपने करियर की सबसे खराब अंपायरिंग देखी थी."

बचपन से ही नहीं रहा पिता का साया

सोबर्स जब केवल पांच साल के थे, तब जर्मनों ने उनके पिता की नाव को एक हमले में डुबो दिया था. क्रिकेट सोबर्स का पहला शौक था जो जुनून बन गया. वह आठ साल के थे जब बारबाडोस के वांडरर्स ग्राउंड में स्कोरबोर्ड पर स्कोरिंग किया करते थे. स्कोरिंग करने की वजह से सोबर्स ने उस दौर के सभी महान क्रिकेटर्स को अपनी आंखों के सामने खेलते देखा, जिनमें तब थ्री डब्ल्यू के नाम से मशहूर वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर फ्रैंक वारेल, क्लाइड वालकॉट और एवर्टन वीक्स शामिल थे. 

सोबर्स के करियर पर फ्रैंक ग्रांट और बर्गेस ग्रैंडिसन का बहुत असर था. सोबर्स वान्डरर्स की पिच तैयार करने में उन दोनों की मदद करते थे जिसके बदले में उन्हें मैदान पर खेलने की अनुमति मिल जाती थी. ये बर्गेस ही थे जिन्होंने वेस्टइंडीज के कप्तान डेनिस एटकिंसन को तब सोबर्स की नैसर्गिक क्षमता से परिचित कराया, और एटकिंसन ने सोबर्स को अपने साथ प्रैक्टिस करने का मौका दे दिया और बाद में दुनिया को गैरी सोबर्स की नायाब प्रतिभा देखने को मिली.

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