Mumbai Indian Bowling Performance: इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत से पहले पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस उन टीमों में से एक भी जिसे खिताब का प्रवलदावे माना जा रहा था. टीम में हार्दिक पांड्या, सूर्यकुमार यादव जैसे विश्व विजेता खिलाड़ी थे. रोहित और बुमराह जैसे दिग्गज खिलाड़ी, ट्रेंट बोल्ट जैसे गेंदबाज, जिनके नाम आईपीएल इतिहास में पावरप्ले में सर्वाधिक विकेट हैं, लेकिन लीग का दो-तिहाई हिस्सा बीत जाने के बाद मुंबई की हालत खस्ता है. टीम अंक तालिका में 9वें स्थान पर है. रोहित चोटिल होककर बाहर हैं, बुमराह विकेट को तरस गए हैं. 'क्लच' हार्दिक का इम्पैक्ट नहीं डाल पा रहे हैं. गोल्डन आर्म वाले शार्दुल ठाकुर का लेकर प्लान साफ नहीं है. 8 मैचों के बाद मुंबई के सिर्फ 4 जीत है. टीम अभी तक 22 खिलाड़ियों को आजमा चुकी है और उसे अभी भी परफेक्ट प्लेइंग इलेवन नहीं मिली है. मुंबई प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने के मुहाने पर है. मुंबई अगर इस स्थिति में हैं तो उसमें उसके पैस अटैक की भूमिक अधिक है, जिसे 'पैरालाइसिस' हो गया है. मुंबई के लिए हालात इस कदर बिगड़े कि 240 से ज़्यादा रन बनाने के बाद भी टीम को हार झेलनी पड़ी. इस सीजन मुंबई के गेंदबाज़ औसतन 10.83 रन प्रति ओवर की दर से रन लुटा रहे हैं. पावरप्ले में विकेट नहीं, मिडिल ओवर्स में दबाव नहीं और डेथ ओवर्स में नियंत्रण की भारी कमी.
फोकस में क्यों हैं जसप्रीत बुमराह?
जब मुंबई की गेंदबाज़ी पर बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है जसप्रीत बुमराह का. वजह साफ है, पिछले कई सीजन से वे इस टीम के गेंदबाज़ी पोस्टर बॉय रहे हैं. लेकिन आईपीएल 2026 में तस्वीर बदली हुई है. अब तक 8 मैचों में उनके नाम सिर्फ 2 विकेट हैं और इकॉनमी लगभग 8.8 की. ये आंकड़े किसी सामान्य गेंदबाज़ के भी लिए बुरे माने जाएंगे. ऐसे में बुमराह का रिकॉर्ड मुंबई की स्थिति को बयां करने के लिए काफी है. क्योंकि उनसे उम्मीद सिर्फ रन रोकने की नहीं, बल्कि विकेट लेकर मैच पलटने की रही है.
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इस गिरावट को समझने के लिए IPL 2025 के आंकड़ों के देखिए. पिछले सीजन बुमराह ने तीनों फेज़ (पावरप्ले, मिडिल, डेथ) में प्रभावी प्रदर्शन किया था. डेथ ओवर्स में लगातार यॉर्कर डाले. बल्लेबाज़ों को रिस्क लेने पर मजबूर करने वाले स्पेल फेंके. 2023–2025 के बीच बुमराह मुंबई इंडियंस के सबसे विश्वसनीय विकेट‑टेकर रहे. खासकर अंतिम ओवरों में उनकी इकॉनमी 6–7 के बीच रही, जो बड़े मैचों में मुंबई की जीत की बुनियाद बनी.
इस सीजन क्या बदल गया?
मौजूदा सीजन में बुमराह की गेंदबाज़ी में तीन बड़े बदलाव दिखते हैं. उनकी स्लोअर बॉल पर निर्भरता अधिक है. श्रीकांत जैसे भारतीय दिग्गज भी इस पर सवाल उठा चुके है. उनकी औसत रफ्तार गिरकर 130 किमी/घंटा से नीचे आ चुकी है. क्रिकेट पंडितों की मानें तो बुमराह विकेट लेने से अधिक रन रोकने का प्रयास करते दिख रहे हैं. इस बदलाव का नतीजा यह हुआ कि बल्लेबाज़ों ने बुमराह के खिलाफ जोखिम लेना कम कर दिया और खुलकर हमला बाकी गेंदबाज़ों पर किया. दूसरी तरफ बुमराह अगर एक छोर से दवाब बना रहे हैं तो दूसरे एंड से उन्हें किसी का साथ नहीं मिल रहा है.
क्या बुमराह अकेले दोषी हैं?
नहीं. मुंबई की गेंदबाज़ी हमेशा एक यूनिट के तौर पर सफल रही है. इस सीजन वही यूनिट बिखरी हुई दिखी रही है. पावरप्ले में ट्रेंट बोल्ट जैसे दिग्गज को विकेट नहीं मिल रहे है. मिडिल ओवर्स में दबाव बनाने वाला कोई स्थायी विकल्प नहीं है. टीम ने गजनफर और अश्विनी कुमार को मौके दिए हैं. दोनों विकेट लेने में सफल तो हैं, लेकिन इकॉनमी अधिक है. यानी दवाब नहीं बन रहा.
पर्पल कैप की रेस में टॉप-10 में मुंबई का सिर्फ एक गेंदबाज है, वो हैं गजनफर. उन्होंने 6 मैचों में 10 विकेट लिए हैं. लेकिन उनकी इकॉनमी 9.40 की है. जबकि अश्विनी कुमार ने 3 मैचों में 6 विकेट लिए हैं. उन्होंने 10.20 की इकॉनमी से रन लुटाए हैं. शार्दुल ठाकुर के नाम भी 7 मैचों में 6 विकेट हैं. लेकिन शार्दुल को दो मैचों में गेंदबाजी ही नहीं मिली, जबकि उन्हें इम्पैक्ट के तौर पर गेंदबाजी के लिए बुलाया गया था. हार्दिक के नाम 4 विकेट हैं. बुमराह और बोल्ट ने नाम 2-2 विकेट.
जल्द निकालना होगा समाधान
मुंबई इंडियंस के 8 मैचों में 2 जीत और 6 हार के बाद 4 अंक हैं. मुंबई के 6 मैच बचे हैं प्लेऑफ में जाने के लिए उसे अपने बचे सभी मैच हर हाल में जीतने होंगे. इससे मुंबई अधिकतम 16 अंकों तक पहुंच पाएगी. मुंबई को इसके साथ दूसरी टीमों के परिणामों पर भी निर्भर रहना होगा. अगर मुंबई इस सीजन वापसी करना चाहती है तो उसकी गेंदबाजी यूनिट को एकजुट होकर प्रदर्शन करना होगा. वरना टीम का मौजूदा सीजन में खेल को खत्म है ही.
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