- अय्यर को इन टीम से तालमेल बनाना होगा
- यह जीत की लकीर बहुत ही मोटी है !
- फिर से खुद को स्थापित करने का चैलेंज
Shreyas Iyer 5 big challenges: सूर्यकुमार यादव टीम इंडिया के लिए अब इतिहास की बात हैं. श्रेयस अय्यर युग शुरू हो चुका है. बिगुल बज चुका है, टीम में में चुने गए खिलाड़ियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. कुल मिलाकर जब श्रेयस अय्य (Shreyas Iyer) जब आयरलैंड के खिलाफ इसी महीने की 26 तारीख को पहले टी20 में बतौर कप्तान मैदान पर उतरेंगे, तो यह एक तरह से इस युवा बिग्रेड का 2028 टी20 विश्व कप की दिशा में बहुत हद तक आगाज करने जैसा होगा, तो इस दौरे के साथ ही श्रेयस अय्यर की चुनौतियां भी शुरू हो जाएंगी. इसमें दो राय नहीं अभी तक मुंबई के लिए और आईपीएल में अय्यर का बतौर कप्तान प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा है, लेकिन अब कहानी और टेस्ट एकदम जुदा होने जा रहा. चलिए जानें कि यहां से श्रेयस अय्यर की राह में क्या 5 बड़े चैलेंज हैं, जिनका वो आगे सामना करने जा रहे हैं. और ये चैलेंज कितने मुश्किल हैं.
1. खिलाड़ियों से तालमेल
सूर्यकुमार यादव को जब कप्तान बनाया गया था, उसके पीछे एक बहुत बड़ी वजह उनका बहुर्मुखी स्वभाव और साथी खिलाड़ियों से शानदार रिश्ते होना था. लेकिन अय्यर का स्वभाव यादव के काफी उलट है और टेम्प्रामेंट भी. हाल ही में खत्म हुई इंडियन प्रीमियर लीग में इस तरह की खबरें आईं थी कि खिलाड़ियों का एक वर्ग अय्यर के रवैये से नाखुश था. लेकिन यहां उन्हें टीम को साथ लेकर चलने के मामले में सबसे पहले अपने साथी खिलाड़ियों के साथ तालमेल का स्तर शुरुआत से ही बहुत ही अच्छी तरह बैठाना होगा.
2. सूर्यकुमार यादव की "विरासत" का दबाव
श्रेयस अय्यर ने एक ऐसे कप्तान की जगह ली है, जिसने तीन महीने पहले ही अपनी कप्तानी में भारत को विश्व कप जिताया था. यह सही है कि सूर्यकुमार यादव करीब पिछले दो साल से बल्ले के साथ जूझते रहे, लेकिन जब बात जीत की आती है, तो टीम सूर्यकुमार ने जीत की बहुत मोटी लकीर और विरासत तैयार कर दी है. पिछले दो साल में अपनी कप्तानी में यादव ने 52 में से 42 मैच जिताने के साथ विदाई ली है. और यह एक भारी-भरकम विरासत है. और तमाम पूर्व पंडित और मीडिया विपरीत परिणाम की ज्यादा आने की सूरत में ज्यादा दिन तक यह नहीं कह पाएंगे कि भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है. टीम अय्यर को सकारात्मक परिणाम शुरुआत से ही देने होंगे क्योंकि इस फॉर्मेट में टीम ने बहुत ही ऊंचे नामक स्थापित कर दिए हैं.
3. खुद को दोबारा से स्थापित करना
श्रेयस अय्यर ने खासे लंबे समय के बाद टीम इंडिया में वापसी की है. उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी मैच दिसंबर 2023 में खेला था. तब से टीम इंडिया और उनके खुद के हालातों में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है. अय्यर ने भारत के लिए अभी तक 51 मैचों में 30.66 के औसत से 1104 रन बनाए हैं. लेकिन यह औसत उनकी क्षमता के हिसाब से खासा कम है. अब यहां से न उन्हें लेकर 'अलग रूप' में अपने औसत को ऊपर ले जाने की जिम्मेदारी होगी, बल्कि उस शून्य की भरना होगा, जिसे सूर्यकुमार यादव की नाकामी ने पैदा कर दिया.
4. युवाओं को सही तरह से संभालना
इस अय्यर टीम में कई युवा खिलाड़ी हैं. खासतौर पर वैभव सूर्यवंशी और नए पेसर प्रिंस यादव. यह सही है कि टीम की मदद के गौतम गंभीर जैसा दिग्गज हेड कोच, सहायक कोच विक्रम राठौर सहित पूरा कोचिंग स्टॉफ हमेशा साथ रहेगा, लेकिन मैदान पर यह भूमिका अय्यर को निभानी होगी. खासतौर पर गेंदबाजी में उन्हें ओवर देते समय, इनकी पिटाई के दौरान. और यही बात वैभव के लिए भी लागू होती है. और इस चुनाती की अनदेखी नहीं की जा सकती.
5. कप्तानी के लिए प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला
इस टीम अय्यर में उनके अलावा कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके पास कप्तानी का न अच्छा केवल अनुभव है, बल्कि वह उनके साथ भारत की कप्तानी के लिए होड़ में भी रहे. इसमें संजू सैमसन, इशान किशन और वह तिलक वर्मा भी हैं, जिन्हें BCCI ऑल फॉर्मेट खिलाड़ी के रूप में देखती है. जाहिर है कि आलोचकों, पूर्व क्रिकेटरों की नजरें उनके एक-एक फैसले और प्रदर्शन पर लगी होगी. यह सही है कि पहला एसाइनमेंट आयरलैंड के खिलाफ है, लेकिन इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की सीरीज और एशियन गेम्स वो बड़ी प्रतियोगिताए हैं, जिन्हें लेकर समीक्षक उन्हें टीम परिणाम को पैमाने पर सबसे ऊपर रखते हुए तौलेंगे क्योंकि साल 2028 का टी20 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की धरती पर भारत के मुकाबले मुश्किल पिचों पर खेला जाएगा.
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