बस अगले कुछ दिन और. इसके बाद टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर आधिकारिक रूप से अपने पद पर नहीं रहेंगे! संभवत: 4 अक्टूबर के बाद नए चीफ सेलेक्टर के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा. बीसीसीआई ने उनका विकल्प ढूंढ लिया है और रिपोर्ट के अनुसार अब पूर्व लेफ्टआर्म स्पिनर प्रज्ञान ओझा भारत के नए चीफ सेलेक्टर होंगे. बीसीसीआई ने ओझा से जिम्मेदारी लेने के लिए कह दिया है और रिपोर्ट के अनुसार वह हेड कोच गौतम गंभीर के साथ मीटिंग भी कर चुके हैं. वैसे अगरकर के 'जाने' की तस्वीर लगभग तभी साफ हो गई थी जब पिछले महीने की शुरुआत में मुंबई में हुई बीसीसीआई की रिव्यू मीटिंग में उन्होंने ऑन लाइन तक जुड़ना गवारा नहीं समझा. हालांकि, बोर्ड ने उनका बचाव किया था, लेकिन इसी के साथ ही रेस में संभावित दावेदारों के नाम आने शुरू हो गए थे. लेकिन यहां थोड़ा चौंकाने वाली बात यह रही कि चर्चा जोर-शोर से चीफ सेलेक्टर पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल की थी, लेकिन इसमें बाजी प्रज्ञान ओझा मार ले गए. चलिए डिटेल से जानिए कि क्यों पार्थिव पटेल रेस में पिछड़ गए.
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दो ही नाम थे शुरुआत से रेस में आगे
3 सितंबर मुंबई में हुई बीसीसीआई की इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के प्रदर्शन को लेकर आयोजित हुई रिव्यू मीटिंग में अगरकर के न पहुंचने के बाद ही हर जगह यह चर्चा थी कि उनका सितंबर को खत्म हो रहा कार्यकाल आगे बढ़ेगा या नहीं. बोर्ड ने अगरकर को मनाने की भी कोशिश की, लेकिन वह मन बना चुके थे. और यहां से रेस में पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल और प्रज्ञान ओझा के नाम सबसे आगे थे. सूत्रों के अनुसार बीसीसीआई ने इस बारे में डिटेल से बातचीत की थी, लेकिन सैलरी पर आकर पेंच फंस गया.
यहां आकर फंस गया पार्थिव का पेंच
दरअसल बात यह है कि बीसीसीआई जब भी किसी पूर्व दिग्गज या खिलाड़ी को सिस्टम से जोड़ता है, तो उसे वर्तमान वेतन के साथ ही खिलाड़ी विशेष को हो रही कमाई की क्षतिपूर्ति राशि भी इस वेतन में जोड़ी जाती है. पूर्व में जब अचानक ही रवि शास्त्री कमेंट्री छोड़कर इंडिया का डायरेक्टर बने, तो भी बीसीसीआई ने शास्त्री को हो रही कमाई को भी कुल सैलरी पैकेज में जोड़ा था, तो वीवीएस लक्ष्मण को एनसीए हेड के मामले में भी ऐसी ही पॉलिसी बनाई गई, लेकिन पार्थिव पटेल के मामले में ऐसा करना बोर्ड के लिए संभव नहीं था.
बोर्ड को करीब दस करोड़ रुपये का पड़ता चीफ सेलेक्टर
निश्चित रूप से इस बड़ी राशि के लिए न केवल बीसीसीआई को चौतरफा कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, बल्कि यह एक "गलत उदाहरण" स्थापित करने जैसी बात भी होती. यही इकलौती सबसे बड़ी वजह रही, जिससे मजबूत दावेदार होने के बावजूद भी पार्थिव पटेल चीफ सेलेक्टर बनने की रेस में प्रज्ञान ओझा से पिछड़ गए.
प्र.: अजीत अगरकर का कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है और बीसीसीआई ने नए चीफ सेलेक्टर के रूप में किसे चुना है?
उ.: अजीत अगरकर का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है और बीसीसीआई ने नए चीफ सेलेक्टर के रूप में पूर्व लेफ्टआर्म स्पिनर प्रज्ञान ओझा को चुना है.
प्र.: चीफ सेलेक्टर की रेस में शुरुआत में कौन से दो नाम सबसे आगे थे?
उ.: शुरुआत में चीफ सेलेक्टर की रेस में पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल और पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा के नाम सबसे आगे थे.
प्र.: पार्थिव पटेल के चीफ सेलेक्टर न बन पाने की मुख्य वजह क्या रही?
उ.: पार्थिव पटेल की कुल सालाना कमाई (कमेंट्री, आईपीएल कोचिंग और विज्ञापनों से) लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये थी। बीसीसीआई द्वारा वर्तमान वेतन में क्षतिपूर्ति राशि जोड़ने पर बोर्ड को उन्हें लगभग 10 करोड़ रुपये सालाना भुगतान करना पड़ता, जिससे भारी आलोचना और एक गलत उदाहरण स्थापित होने की संभावना थी. यही वजह थी कि वह इस रेस में पिछड़ गए.
प्र.: बीसीसीआई द्वारा किसी पूर्व खिलाड़ी को सिस्टम से जोड़ने पर सैलरी पैकेज तय करने की क्या नीति है?
उ.: बीसीसीआई जब भी किसी पूर्व दिग्गज को जोड़ता है, तो वह उनके वर्तमान वेतन के साथ-साथ खिलाड़ी विशेष को हो रही अन्य कमाई की क्षतिपूर्ति राशि (जैसे रवि शास्त्री या वीवीएस लक्ष्मण के समय किया गया था) को भी कुल सैलरी पैकेज में जोड़ता है।
प्र.: मुंबई में हुई बीसीसीआई की रिव्यू मीटिंग का मुख्य एजेंडा क्या था?
उ.: 3 सितंबर को मुंबई में हुई इस रिव्यू मीटिंग का मुख्य एजेंडा इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर भारतीय टीम के प्रदर्शन की समीक्षा करना था.
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