मुंबई लोकल अब सबके लिए, लेकिन समय की पाबंदी से नाराजगी

मुंबई में लोकल ट्रेन में सफर की छूट से आम आदमियों को बस के थकाऊ सफर से मुक्ति तो मिली लेकिन समय का बंधन बरकरार

मुंबई लोकल अब सबके लिए, लेकिन समय की पाबंदी से नाराजगी

प्रतीकात्मक फोटो.

मुंबई:

मुंबई (Mumbai) की लोकल ट्रेनों (Local Trains) में अब आम आदमी भी सफर करने लगे हैं. आम मुंबईकर को दस महीने बाद ये मौका मिला है. पहले दिन ही लाखों यात्रियों ने लोकल से सफर किया. लोकल में सफर की छूट से आम आदमियों को बस के थकाऊ सफर से मुक्ति तो मिली है लेकिन पूरी तरह से नहीं क्योंकि समय का बंधन बरकरार है.

लोकल के वेस्टर्न रेलवे सबअर्बन सेक्शन में सोमवार को शाम छह बजे तक 232578 टिकट बिके. जिससे रेलवे को 147.66 लाख रुपये की आय हुई. मध्य रेल लोकल में 29 जनवरी को शाम 6 बजे तक करीब 10 लाख लोगों ने यात्रा की थी. एक फरवरी को शाम 6 बजे तक करीब 14.5 लाख लोंगों ने यात्रा की. रात 12 बजे तक इसमें पांच से छह लाख यात्री और जुड़ने का अनुमान है. मतलब अकेले मध्य रेल लोकल में 6 से 7 लाख के करीब यात्री एक दिन में बढ़ सकते हैं. 

गत 29 जनवरी को पश्चिम, मध्य और हार्बर लोकल में 19 से 20 लाख यात्रियों ने सफर किया था. यह आंकड़ा आज एक दिन में, यानी सभी को यात्रा की अनुमति मिलने के बाद 34 लाख तक जाने का अनुमान है. मतलब एक दिन में 13 से 14 लाख यात्री बढ़े हैं.

घटकोपर में रहने वाले ताराचंद पेशे से सेल्समैन हैं. 10 महीने बाद पहली बार आम मुम्बईकर को लोकल ट्रेन से सफर करने की इजाजत मिली है तो लॉकडाउन के बाद पहली बार ट्रेन पकड़ने आए. ताराचंद जैसे लाखों लोग हैं जिन्हें पहली बार लोकल गाड़ी में सफर करने का मौका मिला है. लिहाजा मुंबई के स्टेशनों पर लोकल गाड़ियों में जिंदगी फिर से लौट आई है.


मुंबई में के लिए लोकल शुरू हो गई लेकिन समय का बंधन है सुबह 7 बजे के पहले, दोपहर 12 से 4 बजे और रात 9 बजे के बाद. आम लोगों में 10 महीने बाद लोकल गाड़ी से यात्रा करने की खुशी के साथ समय के बंधन को लेकर नाराज़गी भी दिखी.

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


मुंबई में लोकल गाड़ी से सफर की अहमियत और आम आदमी की मजबूरी देख रेल प्रशासन अभी नरम रुख अपनाए हुए है. मुंबई लोकल में लॉकडाउन के पहले तक 80 लाख के करीब लोग रोजाना सफर करते थे. लॉकडाउन के बाद चरणबद्ध तरीक़े से मिली छूट के बाद पिछले सप्ताह तक यात्रियों की से संख्या 19 लाख तक पहुंची थी. इसमें अब तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.