इंदौर में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन स्थल.
भोपाल:
इंदौर के ऐतिहासिक रीगल तिराहे इस बार एक खास मेहमान तिरंगा फहराएंगे. अपना समूह तिरंगा अभियान समिति ने इस स्वतंत्रता दिवस पर वीर शहीद औरंगज़ेब के पिता मोहम्मद हनीफ, माता राज बेगम और भाई कासिम मोहम्मद को विशाल ध्वज के ध्वजारोहण के लिए आमंत्रित किया है, जो इस अद्भुत आयोजन का हिस्सा बन मानक स्तर के सबसे विशाल ध्वज का ध्वजारोहण करेंगे.
इस मौके पर शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की उपस्थिति में उन्हें "साहस को सलाम' प्रशस्ति पत्र से नवाज़ा जाएगा साथ ही एक लाख रुपये का चैक बतौर सम्मान निधि प्रदान किया जाएगा.
औरंगजेब सेना की उस टीम में शामिल थे जिसने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी समीर टाइगर को मारने में कामयाबी हासिल की थी. इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तानी आतंकियों ने 14 जून की सुबह औरंगज़ेब का उस समय अपहरण कर लिया जब वह अपने परिवार के साथ ईद मनाने राजौरी में स्थित अपने गांव जा रहे थे. 14 जून की शाम पुलिस और सेना के संयुक्त दल ने औरंगजेब का शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु नाम के एक गांव में बरामद किया था. उनके सिर और गर्दन पर दर्जनों गोलियां दागी गई थीं.
यह भी पढ़ें : Shaurya Chakra: स्वतंत्रता दिवस पर मेजर आदित्य और शहीद राइफलमैन औरंगजेब को मिलेगा शौर्य चक्र
शहीद औरंगज़ेब की हत्या से पहले उन्हें आंतकियों ने बेहद टॉर्चर भी किया था. ईद के ही दिन शहीद औरंगज़ेब को राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द -ए -खाक किया गया. इस दिन गांव में किसी ने ईद नहीं मनाई. शहीद औरंगज़ेब के पिता सेना से रिटायर हैं तो उनके चाचा की मौत आतंकियों से लड़ते हुए साल 2004 में हुई थी. औरंगज़ेब के भाई कासिम मोहम्मद भी सेना में हैं.
VIDEO : औरंगजेब की हत्या का बदला लेने के लिए लौटे कश्मीरी
शहीद औरंगज़ेब के मृदुल स्वभाव के कारण ही उनकी हत्या का बदला लेने के लिए उनके 50 से अधिक दोस्तों ने सऊदी अरब में शानदार नौकरी छोड़कर सेना में भर्ती होने का प्रण लिया है. रक्षा मंत्री ने 20 जून को औरंगजेब के घर जाकर उनके परिवार को सांत्वना भी दी थी.
इस मौके पर शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की उपस्थिति में उन्हें "साहस को सलाम' प्रशस्ति पत्र से नवाज़ा जाएगा साथ ही एक लाख रुपये का चैक बतौर सम्मान निधि प्रदान किया जाएगा.
औरंगजेब सेना की उस टीम में शामिल थे जिसने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी समीर टाइगर को मारने में कामयाबी हासिल की थी. इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तानी आतंकियों ने 14 जून की सुबह औरंगज़ेब का उस समय अपहरण कर लिया जब वह अपने परिवार के साथ ईद मनाने राजौरी में स्थित अपने गांव जा रहे थे. 14 जून की शाम पुलिस और सेना के संयुक्त दल ने औरंगजेब का शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु नाम के एक गांव में बरामद किया था. उनके सिर और गर्दन पर दर्जनों गोलियां दागी गई थीं.
यह भी पढ़ें : Shaurya Chakra: स्वतंत्रता दिवस पर मेजर आदित्य और शहीद राइफलमैन औरंगजेब को मिलेगा शौर्य चक्र
शहीद औरंगज़ेब की हत्या से पहले उन्हें आंतकियों ने बेहद टॉर्चर भी किया था. ईद के ही दिन शहीद औरंगज़ेब को राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द -ए -खाक किया गया. इस दिन गांव में किसी ने ईद नहीं मनाई. शहीद औरंगज़ेब के पिता सेना से रिटायर हैं तो उनके चाचा की मौत आतंकियों से लड़ते हुए साल 2004 में हुई थी. औरंगज़ेब के भाई कासिम मोहम्मद भी सेना में हैं.
VIDEO : औरंगजेब की हत्या का बदला लेने के लिए लौटे कश्मीरी
शहीद औरंगज़ेब के मृदुल स्वभाव के कारण ही उनकी हत्या का बदला लेने के लिए उनके 50 से अधिक दोस्तों ने सऊदी अरब में शानदार नौकरी छोड़कर सेना में भर्ती होने का प्रण लिया है. रक्षा मंत्री ने 20 जून को औरंगजेब के घर जाकर उनके परिवार को सांत्वना भी दी थी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं