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दिल्ली की 90% हाउसिंग सोसाइटी के पास फायर NOC नहीं, 18 लाख लोग खतरे में

दिल्ली में फायर सेफ्टी को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है, जहां करीब 90% हाउसिंग सोसाइटियों के पास वैध फायर NOC नहीं है. इससे लगभग 18 लाख लोग असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर हैं.

दिल्ली की 90% हाउसिंग सोसाइटी के पास फायर NOC नहीं, 18 लाख लोग खतरे में
  • दिल्ली की लगभग नवासी प्रतिशत कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के पास वैध फायर सेफ्टी क्लीयरेंस नहीं है
  • मालवीय नगर के होटल आग हादसे में 21 लोगों की मौत हुई और सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी सामने आई
  • दिल्ली फायर विभाग के आंकड़ों के अनुसार केवल एक सौ एक सोसाइटियों के पास ही मान्य फायर एनओसी है

दिल्ली की करीब 90 प्रतिशत हाउसिंग सोसाइटियों के पास फायर सेफ्टी क्लीयरेंस नहीं है, जिससे लगभग 18 लाख लोग खतरे में रहने को मजबूर हैं. दक्षिण दिल्ली के एक होटल में लगी घातक आग ने राजधानी में लंबे समय से चली आ रही फायर सेफ्टी समस्या पर फिर से ध्यान खींच लिया है. दिल्ली फायर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शहर की केवल 11 फीसद कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के पास ही मान्य फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) है, जिससे अनुमानित 18 लाख निवासी बढ़े हुए खतरे के बीच रह रहे हैं.

मालवीय नगर आग ने खोली सुरक्षा चूक की पोल

मालवीय नगर के होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली, इस अग्निकांड ने उन सुरक्षा उल्लंघनों को उजागर किया है जो अक्सर किसी हादसे के बाद ही सामने आते हैं. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस संपत्ति को सिर्फ छह कमरों की ही इजाजत थी, लेकिन कथित तौर पर यहां 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे. यह होटल दिल्ली के बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत होम स्टे के रूप में रजिस्टर था. जून 2025 में दिल्ली फायर सर्विसेज द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शहर की 898 सक्रिय कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में से केवल 101 के पास मान्य फायर एनओसी है. बाकी में 73 ने आवेदन किया था, लेकिन सुरक्षा कमियों के कारण उन्हें मंजूरी नहीं मिली. 724 सोसाइटियों ने या तो कभी आवेदन नहीं किया, उनके प्रमाणपत्र समाप्त हो गए, या उनके पास कोई वैध क्लीयरेंस नहीं है.

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चेतावनी के बावजूद फायर नियमों की अनदेखी

फायर अधिकारियों के अनुसार, बार-बार चेतावनी के बावजूद ज्यादातर सोसाइटी या तो फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के लिए आवेदन नहीं करतीं या अपने प्रमाणपत्रों को समय पर नवीनीकृत नहीं करातीं. फायर एनओसी जांच में दो दर्जन से अधिक मानकों को परखा जाता है, जिनमें आपातकालीन निकास, वेंटिलेशन सिस्टम, अग्निशमन उपकरण, काम करने वाली मोटरें, बिजली यूनिट्स की स्थिति, हाई-टेंशन तारों की जगह, बेसमेंट निकास, लिफ्ट सिस्टम, सीढ़ियां और छत तक पहुंच शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली बहुमंजिला इमारतों के लिए वैध फायर एनओसी होना कानूनी रूप से अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश इमारतें बुनियादी मानकों तक पर खरी नहीं उतरतीं.

दिल्ली की सैकड़ों सोसाइटी सुरक्षा मानकों से दूर

कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां ऐसे आवासीय परिसर होते हैं जिनका मालिकाना हक और प्रबंधन निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के पास होता है. केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय के राष्ट्रीय डेटाबेस के अनुसार, दिल्ली में ऐसी 898 सक्रिय सोसाइटी हैं. इनमें सबसे ज्यादा 317 सोसाइटी दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में हैं, इसके बाद पूर्वी दिल्ली में 227 और उत्तर-पश्चिम दिल्ली में 166 हैं. इन सोसाइटी में करीब 18 से 20 लाख लोग रहते हैं. उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 90 प्रतिशत सोसाइटी के पास मान्य फायर एनओसी नहीं है, जिससे करीब 18 लाख निवासी ऐसे भवनों में रह रहे हैं जो फायर सेफ्टी मानकों को पूरा नहीं करते.

(एनडीटीवी के लिए संकल्प श्रीवास्तव की रिपोर्ट)
 

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