NEET PG Expert Panel: क्या आप किसी ऐसे डॉक्टर से अपना या अपनी फैमिली का इलाज कराना चाहेंगे, जिसके मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में सिर्फ 1 नंबर, जीरो (0) या माइनस में नंबर आए हों. शायद आपका जवाब नहीं ही होगा. लेकिन, भारत में पोस्ट ग्रेजुएशन (NEET-PG) मेडिकल एडमिशन में हाल ही में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. हालात ऐसे बन गए कि जीरो या माइनस में नंबर लाने वाले कैंडिडेट्स को भी एडमिशन के लिए योग्य मान लिया गया. इसी विवाद को सुलझाने के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने एक 12 सदस्यों वाली एक्सपर्ट कमेटी (Expert Panel) का गठन किया है. आइए जानते हैं कि आखिर इतना बड़ा विवाद क्यों हुआ, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत क्यों पड़ी और सिर्फ 1 नंबर लाने वाले छात्र को भी मेडिकल के पीजी कोर्स में एडमिशन कैसे मिल गया.
क्या पूरा विवाद
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBEMS) ने NEET-PG काउंसलिंग के राउंड 3 के लिए कट-ऑफ परसेंटाइल को घटाकर लगभग जीरो कर दिया. इसका असर यह हुआ कि कट-ऑफ बहुत नीचे गिर गया. इस फैसले के बाद कई बड़ी मेडिकल एसोसिएशन्स ने इसका कड़ा विरोध किया. उनका कहना था कि अगर इतने कम या माइनस में नंबर लाने वाले छात्र स्पेशलिस्ट डॉक्टर (सर्जन या फिजिशियन) बनेंगे, तो इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है.
एक्सपर्ट पैनल की जरूरत क्यों पड़ी
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें कहा गया कि पहले तय नियममों को बाद में बदला गया, जिससे मेरिट सिस्टम पर सवाल उठे. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा और सरकार को इस पूरे सिस्टम की जांच करने को कहा. इसी के बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. लोवनीश जी. कृष्णा की अध्यक्षता में 12 सदस्यों का एक एक्सपर्ट पैनल बनाया गया है.
सिर्फ 1 या जीरो नंबर पर एडमिशन कैसे मिल गया
सरकार के मुताबिक, शुरुआती काउंसलिंग के बाद देशभर में करीब 18,000 से 20,000 पीजी मेडिकल सीटें खाली रह गई थीं. इन सीटों को खाली छोड़ने से मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और पैसे का बड़ा नुकसान होता है. खाली सीटों को भरने के लिए सरकार ने क्वालिफाइंग परसेंटाइल को गिरा दिया. इससे करीब एक लाख से ज्यादा नए उम्मीदवार काउंसलिंग के लिए योग्य हो गए.
सरकार ने अपने बचाव में क्या कहा
जब सुप्रीम कोर्ट में इस पर बहस हुई, तो सरकार ने एक बड़ा तर्क दिया. सरकार का कहना है कि NEET-PG कोई पास या फेल होने वाला एग्जाम नहीं है. जो भी छात्र इस परीक्षा में बैठता है, वह पहले से ही MBBS पास होता है, यानी वह एक रजिस्टर्ड डॉक्टर है. नीट पीजी सिर्फ एक मेरिट लिस्ट बनाने का तरीका है, ताकि यह तय हो सके कि किसे कौन सा कॉलेज या सब्जेक्ट (Specialization) मिलेगा. असली योग्यता तो 3 साल की ट्रेनिंग और फाइनल एग्जाम पास करने के बाद ही तय होती है.
12 सदस्यों वाली कमेटी क्या करेगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी को काम पूरा करने के लिए 8 हफ्ते का समय दिया है. यह कमेटी नीट पीजी एडमिशन के पूरे सिस्टम का गहराई से ऑडिट करेगी. यह पता लगाएगी कि इस सिस्टम में क्या कमियां हैं. सभी संबंधित लोगों से सुझाव लेगी. एक ऐसी रिपोर्ट और समाधान पेश करेगी, जिसे लागू किया जा सके, ताकि आने वाले समय में ऐसा विवाद न हो.
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