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नारियल केवल पूजा की थाल और चटनी-तड़का तक सीमित नहीं, 3 करोड़ लोगों का सहारा, देश की झोली में भरे 7,000 करोड़ रुपये

World Coconut Day: भारतीय समाज में नारियल हजारों वर्षों से हमारी संस्‍कृति का हिस्‍सा रहा है. आज ये अपने आप में एक इंडस्‍ट्री बन चुका है और 3 करोड़ लोगों की आजीविका का साधन बना हुआ है. विदेशों से एक साल में इसने 7,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा लाने में कामयाबी हासिल की है.

नारियल केवल पूजा की थाल और चटनी-तड़का तक सीमित नहीं,  3 करोड़ लोगों का सहारा, देश की झोली में भरे 7,000 करोड़ रुपये
Coconut Day पर जानिए नारियल कैसे देश की इकोनॉमी में योगदान दे रहा है.
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

The Coconut Story: भारतीय समाज में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत 'नारियल' से होती रही है. आपने घर-मकान लिया है तो नारियल फोड़ कर गृह प्रवेश करते हैं... कार-बाइक ली हो तो आगे नारियल फोड़ शुरुआत करते हैं. पूजा-पाठ में कलश की स्‍थापना ही नारियल के साथ होती है. और फिर हवन से लेकर प्रसाद में गरी-गोला यानी सूखे हुए नारियल का प्रयोग. ये तो हो गया आस्‍था से जुड़ा मसला. अब किचन की ओर झांकिए जरा... वहां नारियल कभी लड्डू के तौर पर तो कभी चटनी के तौर पर आपके खाने का जायका बढ़ाता रहा है. 

लब्‍बोलुआब ये कि नारियल सदियों से धार्मिक अनुष्ठानों, मांगलिक कार्यों और रसोई में चटनी-सब्जी का अनिवार्य हिस्सा रहा है. लेकिन क्‍या ये केवल यहीं तक सीमित है? नहीं. 

साधारण दिखने वाला 'श्रीफल' आज एक विशाल ग्लोबल बिजनेस इंजन बन चुका है. दुनियाभर के कई देशों में एक्‍सपोर्ट होने वाला नारियल भारतीय इकोनॉमी में विदेशों से महज एक साल में 7,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा जोड़ने में सफल रहा है. 

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और नारियल विकास बोर्ड (CDB) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में नारियल आधारित उत्पादों का वार्षिक निर्यात 7,038.35 करोड़ रुपये पहुंच गया है. नारियल पानी, वर्जिन कोकोनट ऑयल (VCO), कोकोनट मिल्क पाउडर, डेसिकेटेड कोकोनट और नारियल के खोल से बनने वाले एक्टिवेटेड कार्बन ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रीमियम उत्पाद बना दिया है. 

आज विश्व नारियल दिवस (World Coconut Day) पर आइए समझते हैं, अपने देश के श्रीफल 'नारियल' की इकोनॉमी. 

देश में नारियल का उत्पादन कितना?

दुनिया के नारियल उत्पादक देशों में भारत टॉप यानी नंबर 1 पर है. वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्‍सेदारी 31.24% यानी करीब एक तिहाई के करीब है.  कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देश का वार्षिक उत्‍पादन 2030 करोड़ नट्स के करीब है. देश में एक करोड़ किसानों सहित करीब 3 करोड़ से ज्‍यादा लोग नारियल की खेती और उससे जुड़े कारोबार पर आश्रित हैं.

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वहीं कृषि क्षेत्रफल यानी रकबे के लिहाज से भारत दुनिया के टॉप-3 देशों में शामिल है. CDB के मुताबिक, साल 2024-25 के दौरान भारत ने 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती हुई और इससे लगभग 2,030.12 करोड़ नारियल का उत्पादन किया. इसकी औसत उत्पादकता 9,249 नारियल प्रति हेक्टेयर रही. 

रकबे में केरल नंबर-1 पर उत्‍पादन में तमिलनाडु अव्‍वल 

देश के चार प्रमुख दक्षिणी राज्य केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश मिलकर देश के कुल नारियल क्षेत्र का लगभग 90% और कुल उत्पादन का 91% से अधिक हिस्सा संभालते हैं. नारियल की खेती और उत्पादन को लेकर भारत के प्रमुख राज्यों में दिलचस्प समीकरण देखने को मिलते हैं.

जैसे कि रकबे में केरल नंबर-1 है, जबकि उत्पादन में तमिलनाडु अव्वल है. जी हां, देश में सबसे ज्यादा नारियल के बागान केरल में हैं, जहां करीब 7.54 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती होती है. वहीं दूसरी ओर सबसे अधिक नारियल उत्पादन तमिलनाडु में होता है, जो कि आधुनिक कृषि प्रबंधन के दम पर टॉप पर बना हुआ है.  

एक और दिलचस्‍प फैक्‍ट जान लीजिए. उत्पादकता में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु से भी आगे है. सही पढ़ा आपने, प्रति हेक्टेयर सबसे ज्यादा पैदावार (Productivity) आंध्र प्रदेश में दर्ज की जाती है. इसके बाद पश्चिम बंगाल और तब जाकर तमिलनाडु का नंबर आता है. 

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7,000 करोड़ के पार पहुंचा निर्यात

भारत का नारियल निर्यात अब केवल कच्चे नारियल या तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि हाई-वैल्यू डेरिवेटिव्स के दम पर इसमें ऐतिहासिक उछाल आया है. वित्त वर्ष 2024-25 में नारियल उत्पादों का कुल निर्यात 4,349.03 करोड़ दर्ज किया गया था. जो कि वित्त वर्ष 2025-26 में 62% की जबरदस्त छलांग लगाकर 7,038.35 करोड़ (लगभग 794.70 मिलियन डॉलर) के पार पहुंच गया. 

पिछले पांच वर्षों में भारत के नारियल और उससे जुड़े उत्पादों के व्यापार में अमेरिका सबसे बड़ा साझेदार रहा है, जहां एक्‍सपोर्ट की कुल व्‍ैल्‍यू करीब 2,974.32 करोड़ रुपये दर्ज की गई है.

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, दूसरा नंबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का है, जिसके साथ करीब 2,770.97 करोड़ रुपये का व्‍यापार रहा.

इसके बाद श्रीलंका (1,546.51 करोड़ रुपये), जर्मनी (750.12 करोड़ रुपये) और रूस (610.25 करोड़ रुपये) आते हैं. इन टॉप-5 देशों के बाद , तुर्की, बेल्जियम, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय और यूरेशियाई देशों का नाम आता है. 

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क्यों बढ़ी ग्लोबल डिमांड?

भारत केवल नारियल ही एक्‍सपोर्ट नहीं करता, बल्कि नारियल पानी, वर्जिन कोकोनट ऑयल (VCO), कोकोनट मिल्क पाउडर, डेसिकेटेड कोकोनट और नारियल के खोल से बनने वाले एक्टिवेटेड कार्बन और अन्‍य उत्‍पादों का भी निर्यात करता है. 

नारियल के खोल से बनने वाला एक्टिवेटेड कार्बन वैश्विक स्तर पर वाटर प्यूरीफायर, एयर फिल्टरेशन और इंडस्ट्रियल केमिकल प्लांट्स में भारी मात्रा में इस्तेमाल हो रहा है. 

वहीं, हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में वर्जिन कोकोनट ऑयल और प्लांट-बेस्ड डाइट में कोकोनट मिल्क की मांग अमेरिका और यूरोप में तेजी से बढ़ रही है. 

भारतीय खेतों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय लेवल पर 7,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का व्यापार खड़ा करने वाला नारियल उद्योग आज देश के 3 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का आधार बना हुआ है. 

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