Womens Day 2026: आज का भारतीय कॉर्पोरेट जगत केवल फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा. अब यहां की पहचान उन महिलाओं से भी हो रही है, जो भविष्य की नई कहानी लिख रही हैं. ये बात महिला दिवस के खास मौके पर एनडीटीवी प्रॉफिट से बात करते हुए वेदांता की CEO देशनी नायडू ने कही. उन्होंने बताया कि कैसे अब इंडस्ट्री में जेंडर नहीं, बल्कि जुनून और काबिलियत को तवज्जो मिल रही है.
बायस का समय खत्म
नायडू ने कहा दशकों से इंडस्ट्री में एक बायस मौजूद था. महिलाओं को अक्सर तकनीकी वाले कामों से दूर रखा जाता था क्योंकि समाज को लगता था कि वे इसे नहीं कर पाएंगी. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी हैं. महिलाएं सिर्फ नौकरी ही नहीं कर रहीं, बल्कि पहले मुश्किल माने जाने वाले लीडरशिप और ऑपरेशनल रोल्स में भी आगे आ रही हैं.
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वेदांता का बड़ा कदम
देशनी नायडू ने बताया वेदांता एल्युमिनियम, जहां दुनिया का सबसे बड़ा मेटल स्मेल्टर है, वहां कंपनी ने भारत की पहली प्रोडक्शन लाइन शुरू की है, जिसमें सिर्फ महिलाएं ही शामिल हैं. अभी तक 100 से ज्यादा महिलाओं को स्मेल्टिंग प्रोसेस के बड़े टेक्निकल कामों के लिए ट्रेन किया गया है. इससे महिलाएं सिर्फ ऑफिस या सपोर्ट रोल तक सीमित नहीं रहीं.
यह बदलाव आंकड़ों में भी दिख रहा है. हिंदुस्तान जिंक में आज महिलाएं लगभग 26% वर्कफोर्स का हिस्सा हैं. नायडू ने कहा कि यह सिर्फ दिखावे के लिए हायरिंग नहीं है बल्कि उन्हें लंबी अवधि का करियर देने की कोशिश है. ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और ग्रोथ के जरिए इसमें मदद की जा रही है.
खुद को सीमाओं में ना बांधें
देशनी नायडू ने संदेश देते हुए कहा कि महिलाएं बीते समय की सीमाओं में ना बंधें और खुद को आगे बढ़ने के मौके देंबीते समय की सीमाएं आपकी प्रगति की बाधा नहीं बननी चाहिए. मैं पक्के फैसले लेने और उन्हें अपने लिए सफल बनाने में विश्वास रखती हूं.
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