शेयर मार्केट में एक साल से उथल-पुथल मची हुई है. इस कारण अमीर लोग अब अपना पैसा शेयर मार्केट की जगह दूसरी जगहों पर लगा रहे हैं. पैसा लगाने के लिए अमीरों की पहली पसंद रियल एस्टेट है. सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) का डेटा बताता है कि अमीरों ने एक साल में रियल एस्टेट में 80% ज्यादा पैसा लगाया है.
SEBI के डेटा के मुताबिक, अल्ट्रा हाई नेटवर्थ (UHNI) वाले भारतीयों ने 2025-26 में रियल एस्टेट में भारी निवेश किया है. उन्होंने अपना पैसा शेयर मार्केट से निकालकर इनकम देने वाली प्रॉपर्टी में लगाया है. ये दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में सबसे अमीर लोग रिटर्न पाने के लिए रियल एस्टेट में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं.
रियल एस्टेट में कितना पैसा लगाया?
पहले इस बात को समझिए कि शेयर मार्केट या म्यूचल फंड से हटकर अमीर लोग जहां पैसा लगाते हैं, उसे 'ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड' यानी AIF कहा जाता है. इससे पता चलता है कि सबसे अमीर लोग अपना पैसा कहां लगा रहे हैं. इसमें रिस्क ज्यादा होता है और रिटर्न भी.
SEBI का डेटा बताता है कि 2024-25 तक रियल एस्टेट सेक्टर में अमीरों का 69,896 करोड़ रुपये लगा था. 2025-26 तक ये बढ़कर 1,28,937 करोड़ रुपये हो गया. यानी, एक साल में लगभग 84% निवेश बढ़ा.
अकेले 2025-26 में अमीरों ने अलग-अलग सेक्टर में 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें से लगभग 42% यानी करीब 60,000 करोड़ रुपये (1,28,937-69,896) रियल एस्टेट में लगाए.
कुल मिलाकर AIF निवेश में 25% की बढ़ोतरी हुई है. 2024-25 तक अमीरों का कुल निवेश 5.38 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 6.76 लाख करोड़ हो गया.
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रियल एस्टेट क्यों पसंद बना?
2025-26 में अमीरों के लिए रियल एस्टेट सेक्टर कितनी बड़ी पंसद बना? इसे ऐसे समझ सकते हैं कि 2022-23 से 2023-24 तक रियल एस्टेट में सिर्फ 1,356 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था. जबकि, 2024-25 से 2025-26 के बीच तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ.
रियल एस्टेट में निवेश में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी की वजह 2025-26 के दौरान शेयर मार्केट का उतार-चढ़ाव भरा प्रदर्शन है. इस दौरान सेंसेक्स में 5.2% की गिरावट आई, क्योंकि पूरे साल अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना रहा.
जानकारों का मानना है कि शेयर मार्केट की उथल-पुथल में फंसने के बजाय अमीरों ने असली कमाई देने वाले विकल्पों में पैसा लगाया. बड़े शहरों में घरों की जबरदस्त मांग, कमर्शियल ऑफिस स्पेस की लीजिंग में बढ़ोतरी और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है.
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