अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) ने लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. हालांकि सबसे बड़ी बात यह है कि फेड ने संकेत दिए हैं कि 2026 में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं. इसी वजह से दुनिया भर के निवेशकों की नजर अब फेड की अगली रणनीति पर है.भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है,क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों का सीधा कनेक्शन हमारे शेयर बाजार, विदेशी निवेश (FPI) और रुपये की सेहत से जुड़ा होता है.
लगातार चौथी बार नहीं बदलीं ब्याज दरें
फेडरल रिजर्व ने इस बार फेडरल फंड्स रेट को 3.50% से 3.75% के दायरे में ही बरकरार रखा है. यह लगातार चौथी बैठक है जिसमें ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. हालांकि यह फैसला बिल्कुल वैसा ही रहा जैसा मार्केट के एक्सपर्ट्स उम्मीद लगा रहे थे, क्योंकि फेड इस समय आर्थिक विकास और बेकाबू होती महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.
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नए चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में एकमत से हुआ फैसला
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की इस अहम बैठक की सबसे खास बात यह थी कि सभी 12 सदस्यों ने दरें स्थिर रखने के पक्ष में एकमत होकर वोट डाला. नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की कमान में हुई यह पहली बड़ी बैठक थी. बैठक के बाद जारी बयान में भरोसा दिया गया है कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त कैश या लिक्विडिटी बनाए रखने की नीति जारी रहेगी.
महंगाई दर 4.2% पर, अब भी बनी है बड़ी चिंता
ब्याज दरें भले न बढ़ी हों, लेकिन फेड ने साफ किया है कि महंगाई अभी भी उनके 2% के तय लक्ष्य से काफी ऊपर है. बैठक से ठीक पहले आए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई दर बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई है, जो पिछले 3 सालों का सबसे उच्चतम स्तर है. मध्य-पूर्व (Middle-East) में जारी तनाव और युद्ध की वजह से पेट्रोल, डीजल और एनर्जी सेक्टर की कीमतों में आया उछाल इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.
तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं और दिक्कतों के बावजूद फेड का मानना है कि अमेरिकी इकोनॉमी मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है. वहां की जीडीपी (GDP) में लगातार सुधार हो रहा है और जॉब मार्केट भी पूरी तरह स्थिर है. बेरोजगारी दर में भी कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है.
2026 में क्यों बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
आखिर बाजार में चिंता क्यों बढ़ गई है? दरअसल, फेड ने भविष्य की ब्याज दरों को लेकर सख्त (Hawkish) रुख दिखाया है. फेड अधिकारियों के 'डॉट प्लॉट' (Dot Plot) के अनुसार, 18 में से 9 अधिकारियों का साफ मानना है कि साल 2026 में कम से कम एक बार ब्याज दरें बढ़ाना जरूरी हो जाएगा. बस इसी संकेत ने निवेशकों को थोड़ा डरा दिया है. बाजार इस बैठक को 'हॉकिश' यानी सख्त रुख वाला मान रहा है.
भारतीय शेयर बाजार और FPI पर क्या होगा असर?
अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव आ सकता है.जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत जैसे बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं.विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) पहले ही भारतीय बाजार से अरबों डॉलर निकाल चुके हैं, ऐसे में फेड का यह सख्त रुख इस बिकवाली को और ज्यादा तेज कर सकता है.
रुपये पर भी बढ़ सकता है दबाव
विदेशी निवेश की निकासी का असर सिर्फ शेयर बाजार पर नहीं बल्कि भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है.2026 में रुपया पहले ही डॉलर के मुकाबले कई बार ऑल-टाइम लो पर पहुंच चुका है.अब अगर विदेशी फंड्स की निकासी और तेज हुई, तो रुपये पर दबाव और ज्यादा गहरा जाएगा
अमेरिकी शेयर बाजार में भी दिखा डर
फेड के इस फैसले का असर खुद अमेरिकी बाजारों पर भी दिखा. वहां का प्रमुख इंडेक्स डाओ जोंस (Dow Jones) शुरुआती बढ़त खोकर लाल निशान में आ गया. इसके अलावा एसएंडपी 500 (S&P 500) और नैस्डैक (Nasdaq Composite) भी गिरावट के साथ बंद हुए.
सोना-चांदी भी हुए धड़ाम, मेटल मार्केट में बड़ी गिरावट
फेड के इस कड़े रुख का असर मेटल मार्केट में भी देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2% से ज्यादा टूटकर 4,247.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गया (बाद में यह 4,241.94 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा था. चांदी में 4.36% की भारी गिरावट आई और यह 67.07 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.
आपको बता दें कि जनवरी के अंत में बने अपने पीक लेवल से चांदी करीब 40% और सोना लगभग 15% नीचे आ चुका है.
एशियाई बाजारों में दिखा मिला-जुला रुख
फेड के इस फैसले के बाद गुरुवार को एशियाई बाजारों में मिक्स ट्रेंड रहा. जहां जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 1.44%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 0.93% और थाईलैंड का सेट इंडेक्स (SET Index) 1.16% मजबूत होकर बंद हुए; वहीं ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 और न्यूजीलैंड का NZX 50 मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे.
भले ही फेड ने अभी के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखकर राहत दी हो, लेकिन 2026 में रेट हाइक का जो ट्रेलर उन्होंने दिखाया है, उसने बाजार को सतर्क कर दिया है. साफ है कि आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार, रुपया और विदेशी फंड्स की चाल पूरी तरह से अमेरिकी फेड की अगली चाल पर टिकी रहेगी.
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