एक्ट्रेस कृति सेनन का रक्षाबंधन को लेकर एक विज्ञापन विवादों में आ चुका है, सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है. उस विज्ञापन में कृति सेनन एक कुत्ते को राखी बांधती हैं. इसके अलावा उनके पहले कप़ों को लेकर भी बवाल मचा है. सांसद कंगना रनौत ने तो कह दिया है कि आखिर बिकनी पहन कौन रक्षाबंधन का त्योहार मनाता है.
अब यह कोई पहली बार नहीं है जब हिंदू त्योहार से पहले कभी कोई विज्ञापन इस तरह से विवादों में रहा हो. इससे पहले भी कई मौकों पर ऐसे एड सामने आए हैं जिन्हें सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था. नीचे उन एड्स की लिस्ट देखते हैं-
भारत मैट्रिमोनी का होली विज्ञापन
तीन साल पहले आए भारत मैट्रिमोनी के होली विज्ञापन को लेकर खूब बवाल मचा था. इस एड में एक महिला को होली के रंगों में दिखाया जाता है. लेकिन जैसे ही वो अपना मुंह धोती है, उसके चेहरे पर कई सारे चोट के निशान होते हैं. तभी एड में एक संदेश लिखा आता है- कुछ रंग इतनी आसानी से नहीं धुलते हैं. होली के दौरान होने वाले शोषण से बड़ा सदमा लगता है. इस सदमे का सामना कर चुकीं हर तीन में से एक महिला ने होली खेलना छोड़ दिया है.
इस विज्ञापन को होली त्योहार के अपमान के तौर पर देखा गया था. सवाल तो यह भी उठा था कि सिर्फ एक हिंदू त्योहार को इस तरह से महिला शोषण से कैसे जोड़ दिया गया.
रेड लेबल का गणेश चतुर्थी विज्ञापन
कुछ साल पहले टी कंपनी रेड लेबल का एक विज्ञापन आया था. वो विज्ञापन गणेश चतुर्थी से ठीक पहले रिलीज किया गया था. उस विज्ञापन में एक हिंदू शख्स गणेश भगवान की मूर्ति खरीदने आता है और दुकानदार उसे भगवान गणेश की अभय मुद्रा से लेकर दूसरे पहलुओं से अवगत करवाता है. फिर अचानक से अजान की आवाज आती है और वो दुकानदार टोपी पहन लेता है. जैसे ही वो टोपी पहनता है, ग्राहक थोड़ा असहज हो जाता है और मूर्ति खरीदने का प्लान टाल देता है.
तभी दुकानदार उसे चाय पीने के लिए कहता है. चाय पीते-पीते दुकानदार कहता है- अब नमाज अदा करने वाले हाथ अगर बप्पा की मूर्ति सजाएंगे तो हैरानी तो होगी. जब ग्राहक पूछता है कि यही काम क्यों तो सामने से जवाब आता है- भाईजान यह भी तो इबादत ही है. अब इस विज्ञापन के जरिए हिंदू-मुस्लिम एकता की बात की गई, लेकिन एक वर्ग ने इस बात पर नाराजगी जता दी कि एक अल्पसंख्यिक समुदाय के शख्स को हिंदू रीति-रिवाजों के बारे में ज्यादा पता है. वहीं दूसरी तरफ हिंदू धर्म मानने वाला शख्स अपने ही भगवान के बारे में नहीं जानता.
रेड लेबल का कुंभ मेला एड
रेड लेबल कंपनी का ही एक और विवादित विज्ञापन आया था. कुंभ मेले के दौरान इस एड को रिलीज किया गया था. इस एड में दिखाया गया था कि एक बेटा अपने ही बुजुर्ग पिता को जानबूझकर कुंभ की भीड़ में छोड़कर आ जाता है और उसका पिता रोता रहता है, बेटे को पुकारता रहता है. लेकिन फिर अचानक से उस बेटे का ह्दय परिवर्तन होता है और वो अपने पिता को खोजते हुए वापस जाता है. फिर दोनों मिलते हैं और रेड लेबल की चाय पीते हैं.
विज्ञापन के जरिए संदेश दिया जाता है कि कुंभ मेले में कई लोग अपने बुजुर्गों को छोड़ देते हैं. लेकिन समय आ गया है कि ऐसा ना किया जाए और अपनो का हाथ पकड़ा जाए. अब इस विज्ञापन को लेकर भी काफी आक्रोश देखने को मिला. असल में बुजुर्गों के सम्मान की बात, उनके ध्यान की बात तो किसी एक धर्म संग सीमित नहीं है. लेकिन इस विज्ञापन को क्योंकि सीधे-सीधे कुंभ से जोड़ दिया गया, लोगों ने इस पर आपत्ति दर्ज करवाई.
शादी के सीजन में आलिया का मान्यवर एड
कुछ साल पहले मान्यवर ने भी एक्ट्रेस आलिया भट्ट के साथ एक विज्ञापन किया था. इस विज्ञापन को शादी के सीजन के दौरान ही रिलीज किया गया था. अब एड तो जरूर कपड़ों का था, लेकिन संदेश यह दिया गया कि सिर्फ एक दुल्हन का कन्यादान क्यों होता है. सिर्फ उसे अपना घर छोड़ने के लिए क्यों कहा जाता है. आखिर कोई लड़की कैसे दान दी जा सकती है? आलिया इन सवालों को जैसे ही उठाती है, एड के अंत में एक नया शब्द आता है- कन्यादान नहीं कन्यामान.
अब संदेश जो भी दिया गया हो, लेकिन एक वर्ग ने इसे सीधे तौर पर हिंदू रीति-रिवाजों को चुनौती देने वाला माना. पूछा गया कि आखिर हिंदू त्योहार के ही रीति-रिवाजों से इतनी दिक्कत क्यों है.
आमिर-कियारा का AU स्मॉल बैंक एड
AU स्मॉल बैंक ने कुछ साल पहले एक विज्ञापन के लिए एक्टर आमिर खान और एक्ट्रेस कियारा अडवानी को लिया था. विज्ञापन में दिखाया गया था कि एक दुल्हन दूल्हे के घर नहीं जाती है बल्कि एक दूल्हा दुल्हन के घर जाता है और फिर उसका गृह प्रवेश होता है. विज्ञापन के अंत में आमिर खान कहते हैं- सदियों से जो पृथा चली आ रही होती है, वो चलती रहती है, आखिर क्यों?
अब विज्ञापन तो बैंक को लेकर था, उसकी सवाल पूछने वाली कार्यशैली को दिखाना था. लेकिन जिस तरह से यहां भी हिंदू शादी के नियम बदले गए, इससे लोग खासा नाराज हो गए.
फैब इंडिया का दिवाली एड
कुछ साल पहले फैब इंडिया ने भी एक दिवाली एड रिलीज किया था. उस विज्ञापन में कोई दिक्कत नहीं थी, पूरी तरह खुशियों से भरा वो एक ऐसा विज्ञापन था जहां एक परिवार दिवाली का त्योहार मना रहा होता है. लेकिन उस विज्ञापन के अंत में जिस तरह से लिखा गया- जश्न-ए-रिवाज बाय फैब इंडिया, इसने विवाद खड़ा कर दिया.
सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि जाबूझकर एक हिंदू त्योहार को मनाने में भी उर्दू शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है.
तनिष्क के एड पर लव जिहाद के आरोप
जूलरी ब्रांस तनिष्क के एक विज्ञापन पर लव जिहाद के आरोप लग गए थे. असल में एक हिंदू लड़की की मुस्लम घर में शादी होती है. तब उसकी मुस्लिम सास अपनी बहू के लिए गोद भराई की रस्म रखती है. बहु जब पूछती है कि ये रस्में तो आपके यहां होती ही नहीं तो सास कहती है कि लड़कियों का सम्मान तो हर जगह होता है.
अब तनिष्क के इस विज्ञापन की जो भी नीयत रही हो, लेकिन देश में जैसा माहौल चल रहा था, एक वर्ग ने इसे लव जिहाद से जोड़ दिया. कहा गया कि इसी तरह से लड़कियों को धर्म परिवर्तन करवा मुस्लिम घरों में शादी करवाई जाती है.
सर्फ एक्सल का होली एड
सर्फ एक्सल का एक होली विज्ञापन सामने आया था जहां पर होली से ठीक पहले एक संदेश देने की कोशिश हुई थी. उस विज्ञापन में एक लड़की साइकिल पर निकलती है और फिर सभी उस पर गुब्बारे मारते हैं. जैसे ही बच्चों के सारे गुब्बारे और रंग खत्म हो जाते हैं, वो लड़की एक लड़के आवाज देकर बुलाती है. फिर सफेद चममचाते कुर्ते में एक बच्चा सामने आता है जिसे नमाज अदा करती होती है.
वो लड़की उस लड़के को साइकिल पर बैठाती है और मस्जिद छोड़कर आती है. विज्ञापन के अंत में संदेश दिया जाता है कि अपनेपन के रंग से औरों को रंगने में दाग लग जाएं तो दाग अच्छे हैं. अब कुछ लोगों को तो यह विज्ञापन पसंद आया, लेकिन एक ऐसा वर्ग रहा जिसने कहा कि क्या सेकुलरिज्म का ठेका सिर्फ हिंदू समुदाय ने ले रखा है, क्या विज्ञापन यही साबित करने की कोशिश कर रहा है?
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