उत्तर प्रदेश के मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस 2026 से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के रियल एस्टेट सेक्टर में बदलाव आ सकता है. इन नियमों का मकसद बिल्डिंग के नक्शे की मंजूरी प्रक्रिया आसान बनाना, कागजी कार्रवाई कम करना और निर्माण से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को ज्यादा व्यवस्थित करना है. CM योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने इन नियमों को मंजूरी दे दी है. बताया जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और बिल्डिंग से जुड़ी मंजूरियों की प्रक्रिया को ज्यादा कुशल बनाना है.
घर खरीदने वालों के लिए भी ये बदलाव अहम हैं. कारण कि किसी रिहायशी प्रोजेक्ट की प्लानिंग और निर्माण शुरू होने से पहले मिलने वाली मंजूरियां उसके डैवलपमेंट प्रोसेस को प्रभावित करती हैं. हालांकि, नियमों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्थानीय विकास प्राधिकरण इन्हें किस तरह लागू करते हैं.
बिल्डिंग मैप की मंजूरी आसान हुई तो क्या होगा?
किसी रिहायशी प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले बिल्डिंग प्लान की मंजूरी जरूरी होती है. इस प्रक्रिया में कागजी कार्रवाई और सरकारी औपचारिकताओं के कारण देरी होने पर प्रोजेक्ट की योजना और निर्माण की समयसीमा प्रभावित हो सकती है.
मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस 2026 का उद्देश्य मंजूरी की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाना है. अगर स्थानीय स्तर पर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो डेवलपर्स को जरूरी मंजूरियां हासिल करने में मदद मिल सकती है.
इसका फायदा घर खरीदारों तक भी पहुंच सकता है. बेहतर प्लानिंग और मंजूरी की प्रक्रिया से प्रोजेक्ट के विकास को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है.
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे वाले इलाकों में खरीदारों के लिए क्या मायने हैं?
इन क्षेत्रों में घर खरीदने वालों के लिए नए नियमों का असर मुख्य रूप से प्रोजेक्ट की मंजूरी और विकास की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.
- प्रोजेक्ट की प्लानिंग: आसान मंजूरी प्रक्रिया से डेवलपर्स को निर्माण की योजना बनाने में मदद मिल सकती है.
- कागजी कार्रवाई: प्रक्रियाओं को सरल बनाने से मंजूरी हासिल करने में आने वाली प्रशासनिक मुश्किलें कम हो सकती हैं.
- निवेश का माहौल: कारोबार को आसान बनाने और निवेश को प्रोत्साहित करने की कोशिश से रियल एस्टेट सेक्टर को मदद मिल सकती है.
- खरीदारों की जानकारी: मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित होने पर खरीदारों के लिए प्रोजेक्ट की स्थिति समझना आसान हो सकता है.
क्या घर खरीदना अब ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा?
नियमों का उद्देश्य मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि घर खरीदने से पहले कानूनी जांच-पड़ताल की जरूरत खत्म हो जाएगी. इस मामले में CA अमित कुमार बताते हैं कि खरीदारों को प्रोजेक्ट की मंजूरी, जमीन के इस्तेमाल, रजिस्ट्रेशन और डेवलपर के रिकॉर्ड की जांच पहले की तरह करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि किसी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले ये देखना जरूरी है कि संबंधित मंजूरियां उपलब्ध हैं और निर्माण स्वीकृत योजना के मुताबिक हो रहा है या नहीं.
ज्यादा व्यवस्थित मंजूरी प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ने की संभावना हो सकती है, लेकिन केवल नए नियमों के आधार पर किसी प्रोजेक्ट को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता.
घर बुक करने से पहले किन 5 बातों की जांच करें?
- UP RERA रजिस्ट्रेशन: देखें कि प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) में रजिस्टर कराया गया है या नहीं और वहां दी गई जानकारी क्या है.
- मंजूर बिल्डिंग प्लान: बिल्डिंग मैप की मंजूरी और प्रोजेक्ट से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की जांच करें.
- डेवलपर का पिछला रिकॉर्ड: पहले के प्रोजेक्ट की डिलीवरी, निर्माण की प्रगति और डेवलपर की साख के बारे में जानकारी लें.
- जमीन और रहने की मंजूरी: जमीन के इस्तेमाल की मंजूरी और लागू होने वाले ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट यानी रहने की अनुमति से जुड़ी शर्तों की पुष्टि करें.
- सेल एग्रीमेंट और पेमेंट शेड्यूल: सेल डीड, भुगतान की शर्तों, कब्जा मिलने की समयसीमा और देरी से जुड़े प्रावधानों को ध्यान से पढ़ें.
सिर्फ बिल्डिंग नियम नहीं, इन बातों पर भी दें ध्यान
घर खरीदने का फैसला लेते समय सिर्फ प्रोजेक्ट की कीमत और मंजूरी देखना काफी नहीं है. कनेक्टिविटी, आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति, रोजाना आने-जाने में लगने वाला समय और भविष्य के रखरखाव का खर्च भी महत्वपूर्ण हैं.
खरीदारों को ये भी देखना चाहिए कि इलाके में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं और डेवलपर ने जिन सुविधाओं का वादा किया है, उनकी स्थिति क्या है.
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में प्रोजेक्ट चुनते समय इन पहलुओं का आकलन घर की कुल लागत और लंबे समय की उपयोगिता समझने में मदद कर सकता है.
अमित कुमार ने कहा, 'घर खरीदारों के लिए असली तस्वीर नियमों के क्रियान्वयन के बाद ही साफ होगी. तेज मंजूरी, समय पर निर्माण और समय पर कब्जा तीन अलग-अलग बातें हैं. इसलिए घर खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि नए नियमों से संभावित फायदे जरूर समझें, लेकिन प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन, मंजूर नक्शा, जमीन से जुड़े दस्तावेज और कब्जे की शर्तें जांचने के बाद ही निवेश का फैसला लें.'
यह भी पढ़ें | न्यू नोएडा में पहला सेक्टर बसाने की तैयारी, 37 गांव रेस में, एक एकड़ का ढाई करोड़ रेट, CEO ने दे दिया हिंट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं